2024
वनिता के अगस्त, 2025 के होम कैरिअर विशेष में पढ़ें पारुल गुलाटी का खास इंटरव्यू
August-2025
बारिश के मौसम में भीगने का और देर तक पानी में खेलने का आनंद ही कुछ और है। पर भीगने के बाद घर पर और एक बार नहाना जरूर चाहिए। खासतौर पर पैरों को साबुन से धोने की जरूरत है। ऐसा नहीं करने पर पैरों में इन्फेक्शन की परेशानी हो सकती है। पैरों में कई तरह के इन्फेक्शन का खतरा रहता है। किस तरह के इन्फेक्शन
मस्से जिन्हें वॉर्ट भी कहा जाता है, त्वचा पर निकलने वाले छोटे आकार के, कठोर और खुरदरे उभार होते हैं। मस्सों की समस्या काफी आम है और लगभग हर उम्र के लोगों में पायी जाती है। ज्यादातर मस्से दर्दरहित होते हैं, लेकिन कुछ मस्से परेशान करने वाले भी हो सकते हैं। देखा जाए तो सामान्य रूप से मस्से किसी गंभीर
‘‘अरे, तुम लड़के हो कर रोते हो ! कोई सुनेगा तो क्या सोचेगा...’’ ‘‘अरे, दर्द को अंदर ही अंदर पीना सीखो, तुम कोई लड़की नहीं कि जरा सी बात पर टेसुए बहाने लग जाओ..’’ ‘‘भाई, क्या औरतों की तरह रो रहा है, अरे मर्द को दर्द नहीं होता, समझे...’’ ऊपर लिखे चंद डायलॉग्स तकरीबन हर लड़के को बचपन में परिवार या
आंखों को ले कर कवियों-शायरों ने ना जाने कितनी कल्पनाएं कर डाली हैं, ना जाने कितने मुहावरे आंखों पर बनाए गए हैं। वाकई हकीकत यही है कि इसके बिना जीवन सूना है। तो क्यों ना कुदरत से मिले इस बेशकीमती तोहफे को संभाल कर रखें, ताकि ये जिंदगी भर हमें दुनिया दिखाती रहें। आंखों की सेहत कैसे बनी रहे, कभी कोई
बॉडी, माइंड एंड सोल के बीच बेहतर सामंजस्य बिठाना ही हारमोन्स का काम है। ये शरीर के केमिकल मैसेंजर हैं, जो शरीर की हर क्रिया को प्रभावित करते हैं। जानें क्या है इनका काम और कैसे इन्हें संतुलित रखा जा सकता है।
आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी तमाम बीमारियों का डॉन है डाइबिटीज। जान को जोखिम में डाल देने वाले इस रोग को कैसे कंट्रोल में रखें, बता रहे हैं विशेषज्ञ-
लांसेट न्यूरोलॉजी स्टडी के एक अध्ययन के मुताबिक वर्ष 1990 से 2021 के बीच स्ट्रोक के केसेज में 51 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि हर 4 में से 1व्यक्ति स्ट्रोक के खतरे का शिकार है। इस बारे में रमैया मेमोरियल हास्पिटल, के एचओडी और न्यूरोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ.
कभी-कभी रोमांटिक कपल्स में भी अपने रिश्ते को ले कर चिंता, घबराहट और तनाव की स्थिति पैदा होती है। इसकी क्या वजह है और इससे कैसे निकाला जा सकता है?
विश्व मानसिक स्वास्थय दिवस के अवसर पर यह समझना जरुरी है कि भारत में घर की दहलीज को लांघ तक कामकाजी बनने का सफर तय करने वाली महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा तनाव में क्यों हैं। इस समय भारत में ये बहस जोरों पर है। इस बहस के केंद्र में हाल ही में हुई कुछ घटनाएं भी हैं।
मेंटल हेल्थ को ले कर लोग जागरूक हुए हैं, लेकिन थेरैपिस्ट के पास जाना अभी भी आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स की मानें तो रोजमर्रा के तनाव से निपटने में सेल्फ थेरैपी मददगार हो सकती है। इससे थेरैपी सेशन में भी मदद मिलती है।
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