October-2025
हॉलीडे, योग और बच्चों के लिए खास पन्ने- वनिता का जून, 26 अंक है ऑल इन वन
June 2026
ഇന്ത്യയിൽ പ്രതിവർഷം ജനിക്കുന്ന കോടിക്കണക്കിന് കുട്ടികളിൽ ഭൂരിഭാഗത്തിനും ജന്മനാ ഉണ്ടാകാവുന്ന രോഗങ്ങളെക്കുറിച്ച് നേരത്തേയുള്ള പരിശോധന ലഭിക്കുന്നില്ല, ഇത് ഗുരുതരമായ ആരോഗ്യ പ്രശ്നങ്ങളിലേക്ക് നയിക്കുന്നു. നവജാതശിശുക്കളുടെ ആരോഗ്യ പരിശോധന രാജ്യത്ത് വേണ്ടത്ര പ്രാധാന്യം ലഭിക്കാത്തതുകൊണ്ട്, ജനിച്ചുവീഴുന്ന അഞ്ചു ശതമാനത്തിൽ താഴെ കുട്ടികൾക്കു മാത്രമാണ് ജനനസമയത്ത് തന്നെ ഇത്തരം പരിശോധനകൾ നടത്തുന്നത്. സമയബന്ധിതമായ രോഗനിർണയം നടത്താത്തപക്ഷം കുട്ടികൾക്ക് ദീർഘകാല രോഗങ്ങൾ, അംഗവൈകല്യങ്ങൾ, അല്ലെങ്കിൽ മരണം എന്നിവ വരെ സംഭവിക്കാം. ജനിച്ച 24 മുതൽ 72 മണിക്കൂറിനുള്ളിൽ കുഞ്ഞിന്റെ കാൽപ്പാദത്തിൽ നിന്നുള്ള രക്തക്കറകൾ ഉപയോഗിച്ചാണ് സാധാരണയായി പരിശോധന നടത്തുന്നത്. ഇതിലൂടെ ഹൈപ്പോതൈറോയിഡിസം, ജി6പിഡി ഡെഫിഷ്യൻസി, സിക്കിൾ സെൽ രോഗം, താലസീമിയ തുടങ്ങിയ സാധാരണയായി കണ്ടുവരുന്ന രോഗങ്ങളെ തിരിച്ചറിയാനാകും. ഇത്തരം പരിശോധനകൾ രാജ്യത്ത് നിർബന്ധമാക്കുന്നതിനുള്ള ഒരു ദേശീയ നയത്തിന്റെ അഭാവം നിലനിൽക്കുന്നു. അതിനാൽ, നവജാതശിശുക്കളുടെ ആരോഗ്യ പരിശോധന ഒരു ഓപ്ഷണൽ സേവനമായി കാണാതെ, എല്ലാ കുട്ടികൾക്കും ലഭ്യമാക്കേണ്ട ഒരു അത്യാവശ്യ പ്രതിരോധ നടപടിയായി പരിഗണിക്കണം.
एक बार की बात है या वंस अपॉन ए टाइम... बेडटाइम स्टोरीज की शुरुआत अकसर इन्हीं वाक्यों से शुरू होती थी। कहानियों की कुछ पंक्तियां तो ताउम्र के लिए जेहन में अंकित हो गयी हैं। जैसे ...और परी ने अपनी जादू की छड़ी घुमायी, घोड़े पर उड़ता सजीला राजकुमार आया और राजकुमारी को कैद से छुड़ा ले गया... खरगोश दौड़
घर में शिशु हों, तो उन्हें मच्छरों से सुरक्षित रखने के लिए कई उपाय आजमाए जा सकते हैं। इस बारे में जानकारी दे रहे हैं कीको के एक्सपर्ट्स, जानिए कैसे चुनें अपने नन्हे मुन्नों केलिए बेस्ट मॉस्किटो रिपेलेंट्स-
नवजात शिशु अपने पेरेंट्स के लिए ढेर सी खुशियां और जिम्मेदारियां लेकर आता है। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, वैसे-वैसे आपके नन्हे-मुन्नों की ज़रूरतें भी बदलती हैं। बदलते मौसम में नयी मांओं के लिए जरूरी है कि वे अपने बेबी की हेल्थ के लिए पहले से तैयारी करके रखें।
हर बच्चा अपने में खास होता है, लेकिन कई बार किसी शारीरिक या दूसरी समस्याओं के कारण ये स्पेशल चाइल्ड बन जाते हैं। ऐसे बच्चे के पेरेंट्स कैसे उनकी मदद करें, बता रहे हैं एक्सपर्ट-
छोटे बच्चों से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं होती हैं, जिन पर समय रहते ध्यान ना देने पर वे गंभीर हो जाती हैं। जन्म के शुरुआती 28 दिनों में होने वाली समस्याएं डॉक्टरी सलाह से ठीक हो सकती हैं। इस दौरान बच्चों में कई तरह की ऐसी समस्याएं होती हैं, जिन पर ध्यान ना दिया जाए, तो ये गंभीर समस्या में बदल सकती हैं।
बच्चे की त्वचा की देखभाल करते समय अलग-अलग मौसम में नई चिंताएं पैदा होती हैं। सर्दियों में हमें अपने बच्चे की त्वचा की देखभाल में बदलाव करना ज़रूरी है। इस मौसम में हवा ठंडी और शुष्क होती है, और कम नमी के कारण त्वचा शुष्क हो जाती है। छोटे बच्चों की त्वचा बड़ों की त्वचा की तुलना में अधिक नाजुक और संवेदनशील होती है, इसलिए छोटे बच्चों की त्वचा की नमी कम होने का खतरा सबसे अधिक होता है।
मोबाइल फोन, टैब, कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की स्क्रीन अत्यधिक ऊर्जा वाली कम वेवलेंथ की नीली और बैंगनी रोशनी उत्पन्न करती है। यह रोशनी दृष्टि को प्रभावित करती है। इतना ही नहीं, यह आंखों को समय से पहले बूढ़ा बनाने का कारण भी बनती है। छोटी उम्र से ही बच्चों की आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ने से किशोरावस्था आते-आते इनकी आंखों पर बहुत ही बुरा असर पड़ सकता है।
बच्चे को आप लाड़-प्यार से पालते हैं, लेकिन जब आप उसे प्री स्कूल भेजते हैं, तब आप उसके साथ नहीं होते। यह उनके जीवन का बड़ा बदलाव है।
कोविड की दूसरी लहर ने बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रखा है। बच्चों में कोरोना के हल्के से लेकर गंभीर तक लक्षण दिखायी दे रहे हैं। कुछ केसेज में बच्चों को भी हॉस्पिटल में एडमिट करवाने की नौबत आ रही है।
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