हक

दिसंबर संजोग भाग-2

दिसंबर संजोग भाग-2

बांसुरी व किताब का मेरे पास लौट आना, दिसंबर की वही तारीख यह सब संजोग था या कोई पारलौकिक घटना, यश्वी के घर ऐसा क्या पता लगा जिसने मेरे होश ही...

दिसंबर संजोग भाग-1

दिसंबर संजोग भाग-1

यश्वी से मिल कर लगा कि मुझे एक बेहद अच्छी सखी मिल गयी है। उसने अपना सब कुछ मुझसे साझा किया, लेकिन कुछ तो ऐसा था, जिसे वह छुपा गयी। जब मैं उसका...

पार्क में लड़की भाग-2

पार्क में लड़की भाग-2

घर छोड़ देना किसी समस्या का हल नहीं, यह बात जब तक लड़की समझती, देर हो चुकी थी। आखिर उसे घर छोड़ने से किसी ने क्यों नहीं रोका था। क्या हश्र हुअा...

पार्क में लड़की भाग-1

पार्क में लड़की भाग-1

घर छोड़ देना किसी समस्या का हल नहीं, यह बात जब तक लड़की समझती, देर हो चुकी थी। आखिर उसे घर छोड़ने से किसी ने क्यों नहीं रोका था। क्या हश्र हुअा...

कायापलट

कायापलट

प्रेम में असीम शक्ति होती है, पर इसे सही दिशा मिलनी चाहिए। विवाहिता मृदुला डॉ. हरेंद्र के व्यक्तित्व से आकर्षित हुईं और अपने अहसास की मुखर...

कुछ रातों की सुबह नहीं होती भाग-2

कुछ रातों की सुबह नहीं होती भाग-2

ये अस्मित की महत्वाकांक्षा का दबाव था या नैना का प्रखर के प्रति आकर्षण, लेकिन उस रात वह प्रखर के दरवाजे तक पहुंच गयी। क्या मंशा थी उसकी?

कुछ रातों की सुबह नहीं होती भाग-1

कुछ रातों की सुबह नहीं होती भाग-1

मौकापरस्त पति और अधूरा प्यार, इस दोराहे पर खड़ी नैना ने कैसे अपने प्यार को मुकम्मल करने की कोशिश की। वह कौन सी रात थी, जिसकी सुबह नहीं हुई?

गेंदे के फूल

गेंदे के फूल

नाटक में तो वे रोमियो जूलियट के किरदार अदा न कर सके लेकिन गेंदे के फूलों ने जिंदगी को वसंत से भर ही दिया।

सही निर्णय

सही निर्णय

बड़े भैया ने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करने से इनकार कर दिया, तो वंदना बेहद आहत हुई। आखिरकार उसने ऐसा क्या निर्णय लिया, जिसकी उम्मीद किसी ने...

फरेब भाग-2

फरेब भाग-2

पिता का नाम-पता ले कर प्रवीर प्रयागराज जा पहुंचा, क्या यही सच था, जो उसकी मां ने बताया था या उसके सामने से किसी फरेब से परदा उठने वाला था?

फरेब भाग-1

फरेब भाग-1

प्रवीर यही जानता था कि उसकी मां ने पिता द्वारा तलाक दिए जाने के बाद कितनी मुश्किलों से उसकी परवरिश की थी। क्या यही सच था या उसके सामने से किसी...

एक ढका छुपा सच

एक ढका छुपा सच

श्रुति से सोमेश का विवाह होने ही वाला था कि एक कटु प्रसंग ने सब कुछ उलट-पलट कर दिया। वह कौन सा सच था, जिसे रितेश भाई की मृत्यु के बाद साेमेश ने...

मैं तुम्हें फिर मिलूंगी भाग-2

मैं तुम्हें फिर मिलूंगी भाग-2

ट्रेन में जिस लड़की से मुलाकात हुई थी, लाख चाहने पर भी अमित उसे ढूंढ़ नहीं पाया, लेकिन उस पर धुन सवार हो गयी थी कि वह शादी तो उसी से करेगा। क्या...

मैं तुम्हें फिर मिलूंगी भाग-1

मैं तुम्हें फिर मिलूंगी भाग-1

गलत ट्रेन में चढ़ी एक लड़की ने अमित पर ऐसा जादू किया कि 5 मिनट में ही वह उसका दीवाना हो गया। अमित पर धुन सवार हो गयी थी कि वह शादी तो उसी से...

तैरती कश्ती का प्रतिबिंब भाग- 2

तैरती कश्ती का प्रतिबिंब भाग- 2

अपनी भाभी के बुरे बर्ताव के कारण राजीव गांव की सीधीसादी लड़की से विवाह करना चाहता था, मौसी ने उसके लिए कैसी लड़की देख रखी थी, क्या सरिता वैसी...

तैरती कश्ती का प्रतिबिंब भाग- 1

तैरती कश्ती का प्रतिबिंब भाग- 1

सरिता को जो सुख जीवन में मिला, वह शायद उसकी बहन की किस्मत में नहीं लिखा था। ऐसी क्या विशेषता थी सरिता में, जो उसे राजीव जैसा सर्वगुण संपन्न पति...

पीली पुस्तक – भाग 2

पीली पुस्तक – भाग 2

संझा दीदी का दूसरा ब्याह कराने की नीलाभ की कोशिश नाकामयाब हो गयी। अपने वैधव्य का बोझ ढोती संझा दीदी ने आखिर जीवन से हार मान ली। फिर नीलाभ ने...

ये जो शॉपिंग का सुरूर है

ये जो शॉपिंग का सुरूर है

खरीदारी की खुमारी से भला कौन बच पाया है ! अाप चाहें ऑनलाइन शॉपिंग करें या ऑफलाइन, इस सुरूर को कम ना होने दें...

पीली पुस्तक- भाग 1

पीली पुस्तक- भाग 1

पति प्रेम में आकंठ डूबी संझा दीदी के असमय वैधव्य ने नीलाभ को हतप्रभ कर दिया था। क्या संझा का दूसरा ब्याह कराने की नीलाभ की मासूम कोशिश कामयाब...

लोकल में ससुराल

लोकल में ससुराल

नेहा की सासू मां चाहती थीं कि उनकी बेटी की शादी लोकल में ही हो। क्या कहा उसने अपनी ननद से कि सासू मां की धारणा ही बदल गयी?

नीलकंठ

नीलकंठ

कौमी नफरतों के बीच पारोमिता और परवेज के बीच प्यार के फूल भी खिले थे, जो समय से पहले ही मुरझा गए। आज बरसों बाद पारोमिता को सुख की नींद सोने देने...

हुनर मांगने का

हुनर मांगने का

मांगो उसी से, जो दे दे खुशी से और कहे ना किसी से! अजी छोडि़ए इस पुराने नुसखे को, दिल खोल कर हर किसी से मांगिए, हर मांग के पूरी होने के बाद यह...

मुस्कान की डिलीवरी

मुस्कान की डिलीवरी

उम्रदराज दंपती विवेक जी और आशा जी ने अपना मकान बेचने के लिए प्रॉपर्टी एजेंट प्रशांत और अदिति को घर बुलाया, लेकिन किस तरह प्रोफेशनल रिश्ता अपनेपन...

मूर्खता में छिपी चतुराई

मूर्खता में छिपी चतुराई

किसी को मूर्ख समझने से पहले जरा सोच लें, क्या वह वाकई मूर्ख है या मूर्ख बन कर आपको मूर्ख बना रहा है। मूर्खता से जुड़ी कुछ रोचक दास्तां

दूध पीती बच्ची

दूध पीती बच्ची

बचपन से हर ट्रिप पर मम्मी-पापा के साथ जाने वाली वृंदा के दोस्त यूरोप घूमने का प्लान बना रहे थे, लेकिन उसका मन अन्यमनस्क था। आखिर वह किन विचारों...

रूया

रूया

मशहूर मॉडल मेहनाज का चेहरा एक एक्सीडेंट में बुरी तरह जख्मी हो गया, तो वह गहरे अवसाद में चली गयी और एकांतवास करने लगी। कौन थी वह रूया, जिसने उसे...

लव गुरु

लव गुरु

दूसरों को प्रेम का पाठ पढ़ाने वाले छगनलाल खुद प्रेम के मामले में कंगाल थे। आखिरकार ऐसा क्या गुल खिला कि उनकी प्रेम की गाड़ी सरपट दाैड़ पड़ी?

मेरा आकाश

मेरा आकाश

बेटे की चाह में थे पिता और जन्म हुआ मेरा ! बेटी होने की सजा मुझे कई रूपों में मिली, मुझसे दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता, मेरी शादी एक तलाकशुदा...

बारिश के आंसू और फूलों की वर्षा

बारिश के आंसू और फूलों की वर्षा

धृति की अखिल से मुलाकात कॉलेज में हुई। दिलों में कुछ कोमल से जज़बात पनपे, पर दोनों बिछड़ गए। इस बार जो इत्तफाकन मिले, तो पता चला कि वह तो छोटी...

भूलने की बीमारी

भूलने की बीमारी

इंसान को भूलने का वरदान मिला है, लेकिन जब यह रोजमर्रा की बात हो जाए, तो दूसरों के लिए मुसीबत का सबब भी बन जाता है। ऐसे ही भूलने की बीमारी से...

छांव

छांव

अम्मा के जाने के बाद प्रिया ने बाबू जी की पसंद-नापसंद का खयाल रखना छोड़ दिया था। ऐसा क्या हुआ कि बाबू जी की उपस्थिति मात्र ही उसे घनी छांव की...

अथ मूंछ पुराण

अथ मूंछ पुराण

मूंछों की महिमा न्यारी है, मगर जिनकी मूंछें नहीं हैं, वे क्या करें !

प्रतिफल

प्रतिफल

पति नाराज ना हो जाएं, इस वजह से मैं अपनी पसंद की साड़ी पूरे 10 साल तक नहीं पहन पायी। क्या पति के व्यवहार में कोई बदलाव अाया?

अतिथि तुम क्यों आए

अतिथि तुम क्यों आए

अतिथि देवता होते हैं, तो देवता तो मंदिरों में वास करते हैं, यहां हमारे घर में कैसे पधारे ! मेहमाननवाजी और मेजबानी के बीच फंसी मधुमति के दर्द ने...

एक मौका

एक मौका

दीपा के अतीत ने 32 साल बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ा। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा था कि अपने बेटे की शादी दीपा की बेटी से करूं या नहीं। उसकी कहानी...

आंखों की गुस्ताखियां

आंखों की गुस्ताखियां

जब इंसान की नजर कमजोर हो जाती है, तो उसे लगता है काश, पहले जैसा दिखायी दे। लेकिन जब नजर दोबारा ठीक हो जाए, तो लगता है काश, नजर कमजोर ही बेहतर...

फुस्स...

फुस्स...

बिंदिया मुझ पर अपनी जान न्योछावर करना चाहती थी, लेकिन मैं ही कमजोर पड़ गया था। मुझसे दूर होने के बावजूद उसका वजूद मेरे इर्दगिर्द ही लिपटा रहता...

अहसास

अहसास

हम सभी भ्रम में जीते हैं, लेकिन बड़ी भाभी का भ्रम उनके दांपत्य जीवन पर भारी पड़ रहा था। क्या भैया के मित्र दिनकर भैया की स्थिति को आईने की तरह...

लेफ्टी

लेफ्टी

सुंदर सुशील सीमा का बाएं हाथ से काम करना ससुराल में उसकी सासू मां को खलता था। उसकी ननद छवि ने ऐसा क्या किया कि सासू मां की आंखें खुल गयीं?

ख़ुशी ज़िन्दगी की

ख़ुशी ज़िन्दगी की

शिकागो में मुझे मेरी सहेली का बेटा अवि अचानक मिला और अपने घर ले गया। वहां उसकी पत्नी स्मिता के बजाय किसी और महिला को देख कर मेरा माथा ठनका। आखिर...

तालमेल

तालमेल

सीधी सरल सुधा अपने बेटे नीरज के लिए अपने जैसी ही बहू लाना चाहती थी। सीमा में उसे वे सारे गुण नजर आए और सीमा से नीरज का ब्याह हो गया। क्या सीमा...

राज

राज

पापा को हमेशा प्रसन्नचित्त देख कर मैं सोचती कि उनकी खुशी का राज क्या है। आखिर पापा ने किस तरह से मुझे भी खुश रहने के लिए मोटिवेट किया?

शादी हमारी जनम की बैरन

शादी हमारी जनम की बैरन

मुंबइया शादी में पहली बार गए, तो हमसे जाने-अनजाने वह हो गया, जो सोचा भी नहीं था। जब दोबारा एक गलती और हो गयी, तो क्या तोबा कर ली?

दीप्ति कुमारी

दीप्ति कुमारी

अपनी बहन को खोने और पिता के अपाहिज होने के गम ने भी दीप्ति को टूटने नहीं दिया। एक बहादुर लड़की की प्रेरक कहानी।

राइट फुट इन

राइट फुट इन

शादी की पहली रात ही पता लगा कि कोमला किसी और से शादी करना चाहती थी, तो मेरे होश फाख्ता हो गए। क्या मैं सूझबूझ से अपनी शादी बचा पाया?

रेजा

रेजा

नामचीन हस्तियों को अवॉर्ड देने में आने वाली दिक्कतों ने मानसी का मन तिक्त कर दिया था। आखिर उसने जिसे अपने अवॉर्ड के लिए चुना, वह नाम...

हाय टमाटर... आय हाय टमाटर...

हाय टमाटर... आय हाय टमाटर...

मेहमानों को भी क्या पता नहीं है कि टमाटर का क्या भाव चल रहा है एक मध्यमवर्गीय परिवार का तो उन्हें दो टाइम का खाना खिलाने में ही बजट बिगड़ जाएगा।

मुक्ति

मुक्ति

प्रेम में पड़ी स्त्री को प्रेमी के भीतरी रूप का पता नहीं चलता, मधुलिका के साथ भी ऐसा ही कुछ हुअा था। लंबा वैवाहिक जीवन जीते हुए वह किस मुक्ति की...

कोमलिका

कोमलिका

कोमलिका अमरेंद्र का पहला प्यार थी, पर अमरेंद्र ने इसका इजहार कभी नहीं किया। क्या कोमलिका भी अमरेंद्र से प्रेम करती थी? अमरेंद्र की सगाई में...

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रूप ने अंग्रेजी कैसे सीखी ? क्यों सीखी? रंजीत क्या इससे प्रभावित हुआ या शक की...