October-2025
अगस्त, 26 अंक लाया है मानसून में गार्डनिंग से जुड़े टिप्स
August 2026
A tale of academic resilience, this story follows Mahendra, who faces a significant setback in his CA exams after marriage. His wife, Suranjana, steps in with a well-thought-out strategy, providing unwavering support and motivation. Her meticulous planning and encouragement help Mahendra overcome his struggles, leading him to achieve exceptional results, including a gold medal, and highlighting the crucial role of a supportive partnership in professional success.
सुकून के गलीचे पर फिर से नागफनी उगने लग गए हैं। कितने जतन करके सब कुछ ठीक किया था। भीतर के मंथन का जहर पीने के लिए शिव को नहीं साधा, बस कंठ को अवरुद्ध कर लिया था। ऐसा नहीं कि आत्ममंथन से अमृत नहीं निकला था। उसके लिए खुद ही मोहनी बनी और अपने परिवार को तृप्त किया। अठारह साल बाद तुम्हारे मैसेज का आना
मां जी की तेरहवीं बीत जाने के बाद पूरा घर सूना हो गया था। सारे मेहमान वापस चले गए थे। एक सन्नाटा सा पसर गया था पूरे घर में। दिनचर्या तो यथावत ही थी, पर तृप्ति को लग रहा था जैसे कोई काम ही नहीं रह गया है। मां जी अपने साथ उसके सारे काम भी ले कर चली गयी थीं। थोड़ी देर ऐसे ही खामोश रही तृप्ति ! फिर खुद
‘‘सुनिए! अब मैं भी बिजनेस करना चाहती हूं।’’ श्रीमती जी के मुखारबिंद से आठ शब्दों का यह वाक्य क्या फूटा कि हमारे शरीर से हैरत का झरना फूट पड़ा। ज्ञानेंद्रियों में उनके नसीब के हिसाब से जो प्रतिक्रिया हुई, सो अलग। आंखों ने अपना साइज, फट जाने की सीमा तक बढ़ा कर उन्हें देखा, जो शायद उनके पूरे होशोहवास
मिसेज मुखर्जी ने प्रेम विवाह किया था। विवशता का प्रेम और जबर्दस्ती का विवाह। बीते 3 बरसों में उनके पास प्रेम के बस अवशेष बचे हुए हैं और विवाह... हां, विवाह तो शेष बचा ही है, क्योंकि विवाह तो वे चाह कर भी नहीं तोड़ सकतीं। इज्जत, सामाजिकता, ममता उनके बंधन हैं। ...और फिर कोई कारण भी तो नहीं है विवाह
समंदर की नगरी से लौट कर आया तो पाया कि अभी गोमती के शहर ने अपनी निर्मलता को बरकरार रखा है। यह अलग बात थी कि भाईचारे में वह पहले वाली बात नहीं रही। पापा ने भी चौक का घर बेच कर गोमती नगर में नया ठिकाना बनाया है। मेरा ऑफिस भी शहीद पथ के उस पार है। अब पुराना लखनऊ सिर्फ जेहन के कहीं बहुत भीतर फंस कर रह
सलोनी के परिवार में जिस फोन की सुबह से प्रतीक्षा थी, वह 12 बजे आया। उसके पापा सोमनाथ जी ने अपना फोन कान से लगा कर कुछ देर सुना, फिर बरस पड़े , “नहीं, नहीं ! हरगिज नहीं ! अरे, लड़के और लड़की को मिलाना है, ना कि कपड़ा खरीदना है... यह पसंद आया वह नहीं!” दूसरी ओर से सावित्री बुआ की आवाज आ रही थी,
भैया जी बहुत नाराज थे, आज भी उन्हें मेट्रो में सीट मिलते-मिलते रह गयी थी। भाभी जी वैसे तो भैया जी की बड़ी से बड़ी नाराजगी की रत्तीभर भी परवाह नहीं करती थीं, लेकिन आज मसला कुछ अलग ही था। कभी पानी का गिलास भैया जी को नहीं पकड़ाने वाली भाभी जी ने आज बड़ी नजाकत से उन्हें पानी का गिलास पकड़ाया तो वे
हमारी एक भाभी जी हैं, बात के ही नहीं, अकसर बिना बात के भी हंसती रहती हैं। एक दिन उनकी नॉनस्टॉप हंसी सुन कर हमारे भैया को स्कूल की किताब में पढ़ा द्रौपदी की किस्सा याद आ गया। उनको लगा कि इन मोहतरमा की हंसी किसी दिन महाभारत पार्ट टू ना करवा दे, सो प्यार से उनको समझाया कि इस तरह हंसोगी तो किसी दिन
प्रेम करने की कोई उम्र फिक्स नहीं, तो प्रेम दिवस मनाने में क्या रिस्क, यही सोच कर जब हमने वेलेंटाइन बाबा का व्रत रखना चाहा, तो देखिए क्या-क्या गुल खिले...
छोटी उम्र में वैधव्य का दंश झेलने वाली बड़ी मां ने जीवन को रुकने नहीं दिया। अपनी निजी खुशी को दरकिनार करते हुए उन्होंने सबके सुख के लिए जीवन निछावर कर दिया। उन्होंने ऐसा क्या किया कि वे मेरी मां के लिए आदर्श बन गयीं?
अंतरंग सखी से मिले धोखे से हतप्रभ दिव्या को अकस्मात ही उसका खोया प्यार हासिल हो गया। उसकी मौकापरस्त सखी ने आखिर किस तरह उसका दिल छलनी किया था?
भाविनी को अपने प्यार और कैरिअर के बीच चुनाव करना था। प्यार उसके सपनों का बलिदान मांग रहा था। आखिर उसने क्या फैसला लिया?
कॉलेज के मस्त माहौल में मैं आजाद पंछी की तरह उड़ा-उड़ा फिरता था, तभी मेरी मुलाकात स्वाति से हुई। क्या मेरा प्यार परवान चढ़ पाया? क्या मैं उसे कभी अपने दिल के जज्बात बता सका?
अनुजा यों तो पारंपरिकता में विश्वास करती थी, पर उसके पहनावे में बदलाव देख कर उसकी भाभी हैरान थी। आखिर यह परिवर्तन की बयार कैसे चली?
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