October-2025
फेस्टिवल की तैयारियों से जुड़ी विशेष जानकारी पाएं वनिता के अक्तूबर, 2026 अंक में
October 2026
Meghna Gulzar's 'Daayra' is a compelling film that delves into the complex relationship between the police and the justice system, prompted by the investigation of a brutal crime against a young woman. The movie adeptly portrays the differing ideologies of two police officers, highlighting contrasting approaches to achieving justice within the same legal framework. Drawing inspiration from real-life incidents, including the 2019 Hyderabad case, the film's themes resonate powerfully with current societal concerns regarding women's safety and the efficacy of justice. 'Daayra' prompts critical reflection on the societal tendency to question victims rather than perpetrators and questions the adequacy of 'instant justice' as a sole solution. The film ultimately leaves the audience contemplating the essence of justice, the boundaries of law, and the essential societal transformations needed to combat crimes against women at their origin.
मिस्टर परफेक्शिस्ट आमिर खान का जादू पिछली कुछ फिल्मों से कम हुआ है लेकिन उनका कमाल है कि वह हमेशा प्रयोग करते हैं, अलग विषयों पर फिल्म बनाते हैं और जोखिम उठाते हैं। सितारे जमीन पर फिल्म तारे जमीं पर...की सीक्वल नहीं है, जैसी कि अटकलें लगाई जा रही थीं। चूंकि दोनों फिल्मों की थीम लगभग समान थी, इसलिए
लापता लेडीज हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। सुरजमुखी गांव के किरदारों की इस कहानी ने दर्शकों का दिल छू लिया है और बहुत सी बड़ी बातें बड़ी आसानी से कह दी हैं।
सितंबर में प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले 90 साल ही हो जाएंगी, इस मौके पर दुबई में एक भव्य म्यूजिकल कॉन्सर्ट आयोजित किया जाएगा। जानिए इससे जुड़ी सारी जानकारी-
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने एंटरटेनमेंट का तरीका बदल दिया है। अब घर बैठे अपनी पसंद का कंटेंट कभी भी देख सकते हैं। यहां हर किसी के लिए कुछ ना कुछ है। शोज इतने एंटरटेनिंग हैं कि हमें हंसा और रुला भी सकते हैं। इन शोज के किरदारों की कही बात फैंस के दिल में उतर जाती है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नयी कहानियों का ट्रेंड शुरू हुआ था, जिसका स्वागत भी हुआ, पर कुछ सालों के बाद दर्शकों को नयी रिलीज भी बासी-बासी सी लगने लगी है।
हिमाचल की हसीन वादियों में पैदा हुई रुबीना दिलैक उसी दिन हर दिल में बस गयी थी जब सीरियल छोटी बहू बन कर उन्होंने भारतीय दर्शकों के दिल में खास जगह बना ली। भोली सी इस बहू का अवार्ड्स से पुराना नाता रहा है। 2006 में उनके सिर पर मिस शिमला का ताज सज चुका है।
सोशल मीडिया इन दिनों कई मशहूर और बेरोजगार कलाकारों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है। कुछ कलाकार तो करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। सोशल मीडिया से होने वाली कमाई पर इनका कहना है कि यह सारा खेल डिमांड और सप्लाई का है।
अंडरवर्ल्ड हो, मनोरंजन हो, सस्पेंस हो या मनोरंजन हो, वेब सीरीज ने हर वर्ग के दर्शकों की नब्ज पकड़ ली है। एक नजर वेब वर्ल्ड की उन सीरीज पर जो पिछले साल दर्शकों का मनोरंजन करती रहीं।
नजर नीचे झुकाए सिर पर पल्लू रखनेवाली सीधी-सादी बहुअों को क्या हुआ, जो सोलह सिंगार छोड़ कर माइक्रो मिनी में लहरा रही हैं। इतने पर भी फुल स्टॉप कहां? बिंदास हो कर बोल्ड सीन्स कर रही हैं। बाथरूम के शावर से ले कर बेडरूम की लाइट्स में भी ये अपने तराशे जिस्म की बारीकियां दिखा रही हैं।
ओटीटी प्लेटफॉर्म ने कई कलाकारों को पहचान दिलायी। कोई बड़े शहर का गैंगस्टर बन कर मशहूर हुआ, तो कोई छोटे शहर का गुंडा-मवाली। इस प्लेटफॉर्म ने हर छोटे-बड़े कलाकार को नाम कमाने का मौका दिया, कभी बदनामी भरा रोल करके, तो कभी सीधा-सादा अनाड़ी बनके। दूसरे शब्दों में कहें, तो फिल्मों में खुद को साबित करने
आजकल एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज खूब चर्चा में है। मिस श्रीलंका रह चुकी जैकलीन को देख कर लगता है कि वह हर दिन पहले से ज्यादा खूबसूरत होती जा रही है। इसके सबसे ज्यादा नंबर जाते हैं जैकलीन की फिट बॉडी को। आइए जैकी से जानें कि खुद को फिट रखने के लिए वे क्या करती हैं
एक से बढ़ कर एक वेबसीरीज दीवाली की फुलझडि़यों सा मजा देने की पूरी तैयारी में हैं। फेस्टिवल की शाम करें, वेबसीरीज के नाम
फिल्मों को ले कर सेंसर बोर्ड जो भी हो-हल्ला मचा ले, वेब सीरीज को कोई छू भी नहीं पाता। फिल्मी दुनिया में सभी एलजीबीटी सब्जेक्ट के कई शो एक साथ दिखाने में लग गए हैं। वेब सीरीज इस मामले में टॉप पर है अौर दूर-दूर तक उसका कोई प्रतियोगी भी नजर नहीं अा रहा है। एएलटी बालाजी, वुट, हॉटस्टार, जिअो, जी 5,
अामतौर पर फिल्मों को यू, यू/ए अौर ए सर्टिफिकेट दिया जाता है। ए सर्टिफिकेट उन फिल्मों को दिया जाता है, जिन्हें केवल एडल्ट ही देख सकते हैं । अामतौर पर ऐसी फिल्मों में हिंसा अौर सेक्स की भरूपर डोज होती है। <br> 1952 के सिनेमैटोग्राफिक एक्ट के अनुसार सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पास फिल्मों को सर्टिफिकेट
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