October-2025
फेस्टिवल की तैयारियों से जुड़ी विशेष जानकारी पाएं वनिता के अक्तूबर, 2026 अंक में
October 2026
Despite advancements, gender inequality persists in India, with women disproportionately shouldering unpaid domestic labor, impacting their career opportunities. Policy gaps, particularly the absence of mandatory paternity leave in the private sector, and deeply ingrained societal expectations further exacerbate this imbalance. True equality requires the equal sharing of domestic responsibilities and opportunities in both home and professional spheres.
The news article recounts the extraordinary story of Begum Wilayat Mahal, who, claiming to be the daughter-in-law of the last Nawab of Awadh, occupied a VIP waiting room at New Delhi Railway Station for ten years, demanding the return of her family's vast confiscated wealth. Her prolonged protest eventually led to the government allocating her the dilapidated Malcha Mahal, where she tragically died by suicide, followed by the deaths of her children in obscurity. The article also delves into the life of Abida Sultan, the rebellious daughter of the Nawab of Bhopal, known for her unconventional ways and her struggles during the partition of India, which ultimately resulted in her disinheritance.
बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि छोटे-मोटे जरूरी कामों में मदद करने के लिए एक नयी कोिशश कर रहा है टाइम बैंक। इस तरह के बैंक विदेशों में हाेते हैं। इनके तहत बुजुर्गों में बढ़ते अकेलेपन डिप्रेशन को कम करने की खूबसूरत पहल की जा रही है। क्या है टाइम बैंक आप अपना जितना समय अपने
केले के पेड़ से किसने की थी शादी? क्याें सजाया जाता है केले का पेड़? जानिए केले के पेड़ से जुड़ी देश-विदेश की रोचक परंपराएं। केले का पेड़ सौभाग्य, पवित्रता वैभव का प्रतीक है। इसीलिए आपने देखा होगा गणेश पूजा के अलावा किसी भी शुभ काम में इसके पेड़ या पत्तों पर भाेग लगाया जाता है। इतना ही नहीं भारत के
हमारे यहां शादी का मतलब तड़क-भड़क और लाखों करोड़ों का बजट, लेकिन अब कपल्स शादी में दिखावे को नहीं, बल्कि ऐसे यादगार अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं जो उनके साथ बिताए गए सफ़र को दिखाते हैं। शादी की प्लानिंग को ले कर कपल्स की क्या डिमांड है, इस बारे में बता रही हैं टैमरिंड ग्लोबल की वाइस प्रेसिडेंट –
भारत के कुछ राज्य ऐसे हैं, जिनकी दीवाली, खानपान, कला, संस्कृति, साज-सज्जा, परंपरा, पूजा और आस्थाएं बिलकुल अलग हैं। जानिए कुछ ऐसे ही राज्याें के बारे में, जहां दीवाली की रौनक आश्चर्य में डाल देगी और आप कह उठेंगे, क्या वाकई ऐसा होता है?
नमक से लेकर जहाज और सॉफ्टवेअर तक फैली टाटा इंडस्ट्रीज को लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सीधे-सादे और सरल उद्योगपति रतन टाटा का हाथ था। आखिर ऐसा क्या था इस उद्योगपति में कि वह भारतीयों के इतने चहेते रहे हैं!
बीके शिवानी का मानना है कि आंतरिक विकास एक सतत प्रक्रिया है। नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त राजयोग मेडिटेशन शिक्षिका बीके शिवानी पिछले 25 वर्षों से लाखों-करोड़ों जीवन की उलझनें सुलझा रही हैं। घर-घर में लोग उनके विचारों, वीडियोज और पॉडकास्ट से अपने जीवन को समृद्ध कर रहे हैं।
क्या भारत प्यारा देश हमारा कहने के दिन लद गए ! नागरिकता छोड़ने के आंकड़ों पर एक नजर।
सिंगल पेरेंट्स ना सिर्फ दोहरी जिम्मेदारी निभाते हैं, बल्कि कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हुए अपने बच्चे के मेंटल और इमोशनल हेल्थ को स्वस्थ रखने की कोशिश भी करते हैं।आइए, इस बार मदर्स डे पर कुछ खास मांओं से एक छोटी मुलाकात करें।
कुछ लोगों के लिए मामी, आंटी या टीचरों ने मां की जगह ली है। इन मदर फिगर्स ने हमेशा मां से बढ़ कर प्यार देने की कोशिश की है और हर कदम पर दोस्त की तरह साथ भी दिया है। मदर्स डे पर मां के साथ-साथ उन सभी लोगों की भी याद जरूर आ जाती है, जो मां से कम नहीं हैं। मां की जगह कोई नहीं ले सकता, लेकिन मां का फर्ज
मुंबई की डॉ. सिमरन कपूर पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन दिल से पर्यावरण प्रेमी हैं। वे हाल ही में लॉन्च हुए वुमन क्लाइमेट कलेक्टिव का हिस्सा हैं। वे महिलाओं को बता रही हैं कि पर्यावरण के लिए खतरनाक सैनिटरी पैड्स का निस्तारण कैसे संभव हो सकता है।
यूनाइटेड नेशंस ने हाल ही में दुनिया की जो हैप्पीनेस रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उसमें अभी हम 136वें नंबर पर हैं, जबकि पिछले साल हम 139वें पायदान पर थे। यानी हम सुधर रहे हैं। लाफ्टर योग कम्युनिटी मई महीने के पहले संडे को लाफ्टर डे मनाती है। यों भी पोस्ट कोविड दुनिया में लाफ्टर थेरैपी की जबर्दस्त जरूरत है।
राजस्थान के सीकर के एक गांव में हाल ही में एक सास ने अपनी विधवा बहू की शादी करवायी है। महज 3 महीने की शादी के बाद जब कमला देेवी का बेटा चल बसा, तो उनके दिल में बस यही सवाल था कि बहू, जो महज 21 साल की है अपना जीवन कैसे काटेगी।
फागुन का मस्त महीना अपने साथ रंगों व जोशीले गीतों का तोहफा ले कर आया है। आइए, आप भी झूमें फाग की धुन पर।
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