October-2025
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April 2026
सोशल मीडिया पर हर उम्र और हर जगह से लोग आजकल रील्स बना रहे हैं। बेशक इनकी दुनिया बड़ी होती जा रही है, लेकिन उम्र कम होती जा रही है। जी हां, अब इस फील्ड में बच्चों की भी भरमार हो रही है। ब्रांड्स अपने प्रमोशन के लिए बच्चों को टार्गेट कर रहे हैं। सोशल मीडिया साइट्स पर डाले गए इन वीडियोज पर लोग सिर्फ
क्या आपको याद है अपने बचपन की दीवाली या कोई भी त्योहार जब कई दिन पहले से परिवार का हर छोटा-बड़ा सदस्य त्योहार की तैयारियों में जुट जाता था। घर की रंगाई-पुताई होती थी, बच्चे घर की सफाई करते थे, अपने हाथों से बंदनवार बनाते थे, गेरू और खडि़या से चौक पूरा जाता था, दीवाली की सजावट कैसे होगी, कहां पर
आमतौर पर हमारा मानना है कि हमें ही अपने बच्चों को सब कुछ सिखाना है- मैनर्स, व्यावहारिकता, जीवन जीने का तरीका, कैरिअर बनाना, अच्छी बातें करना, समझदारी, समस्याओं को डील करना आदि। बच्चों को घुट्टी की तरह बहुत सी बातें हम घोल कर भी पिलाते हैं। बच्चों को सिखाने और पढ़ाने के इस क्रम में हमारा ध्यान इस
लीजिए गरमी की छुटि्टयां फिर से आपके दरवाजे पर दस्तक देने लगी हैं और उसके साथ में ढेर सारी खुशियों का भी आगमन हो गया है। घर में सभी के साथ होने, साथ खेलने, खाने, सोने और साथ में वक्त बिताने से ही रौनक है। परिवार के साथ छुटि्टयां बढि़या बीते, इसके लिए आपको दे रहे हैं छोटी-छोटी सलाह। परिवार और खुशी
कैमरा हॉट पोटैटो एक फोन में कैमरा टाइमर को लगभग 5 सेकेंड तक सेट कर लें। पहला खिलाड़ी हाथ की दूरी पर फोन को पकड़ेगा और फोन कैमरा बंद होने से पहले अपनी एक बढि़या सेल्फी लेने की कोशिश करेगा। इसके बाद खिलाड़ी फोन को अगले साथी को भेज देगा और खेल इसी तरह जारी रहेगा। गेम को आप 1 मिनट के लिए भी खेल सकते
टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें हों, रंगबिरंगे चित्र हों, कागज से बना क्राफ्ट हो या मिट्टी की मूर्तियां, ये बेजान चीजें कैसे आपमें नयी जान फूंकती हैं, आइए जानें-
बोर्ड गेम्स सिर्फ टाइम पास का ही जरिया नहीं हैं, बल्कि बच्चों का दिमाग भी तेज करते हैं। बस एक बार इन्हें खेलने का चस्का लगने की देर है। थोड़ी मेहनत तो आपको भी करनी होगी।
जब एक बच्चा दुनिया में आता है और चलने-फिरने लगता है, तो उसका पहला कदम प्ले स्कूल में पड़ता है, जहां वह कुछ घंटे अपने मां-बाप के बिना निकालता है और बहुत कुछ अपने आप करना सीखता है।
क्या आपका बच्चा भी आपसे यह शिकायत कर रहा है कि स्कूल में टीचर का बर्ताव रूड है? स्कूल में टीचर का बर्ताव बच्चे के व्यक्तित्व पर भी बुरा असर डालता है। स्कूल में बच्चे की टीचर रूड हो, तो बच्चे को स्कूल जाना कतई पसंद नहीं आएगा और वह मानसिक तनाव में भी आ सकता है।
कुछ तो न्यूक्लियर परिवार और कुछ हमारा बिजी लाइफस्टाइल, ये सब मिल गए और हमें अकेला कर दिया। इसका खमियाजा भुगत रहे हैं बच्चे, जो सबसे ज्यादा अकेलेपन के शिकार हैं।
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