अगर आप जीते जी स्वर्ग की सैर करना चाहते हैं, तो यह जरूरी नहीं कि आप कश्मीर की ही सैर करें, भारत में और भी ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जहां का नयनाभिराम सौंदर्य देख कर आपकी सांसें थम कर रह जाएंगी। उत्तराखंड यों तो अपने कई हिल स्टेशंस, चारधाम यात्रा और अनगिनत ट्रेकिंग डेस्टिनेशंस के लिए मशहूर है, लेकिन यहां के कई पर्यटन स्थल ऐसे भी हैं, जो खासकर गरमियों के मौसम में ही खुलते हैं। इन्हीं में से एक है चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी। यह यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। कहा जाता है कि इसे 1931 में तीन ब्रिटिश पर्वतारोहियों ने ढूंढ़ा था। रास्ता भटक कर वे इस घाटी में पहुंच गए थे। यहां की खूबसूरती देख कर उन्होंने ही इसे फूलों की घाटी नाम दिया था।
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यहां पर आपको प्रकृति सोलह शृंगार किए हुए फूलों की सेज पर बैठी दिखती है। इस घाटी में फूलों की 600 से ज्यादा किस्में दिखायी देंगी और इनमें से कुछ तो दुर्लभ भी हैं। इस घाटी की सैर करते समय आपको ऐसे-ऐसे फूल दिखायी देंगे, जो शायद आपने जीवन में कभी नहीं देखे होंगे।
यदि आप पेंटिंग का शौक रखते हैं, तो यकीनन रंगों से तो आपका गहरा याराना होगा ही। फूलों की घाटी में जाने से पहले अपने कलर पैलेट के सारे रंगों को गौर से देख लीजिए, हो सके तो मिक्स एंड मैच करके आप कुछ नए रंग भी बना सकते हैं। फिर उन रंगों को अपनी आंखों में भर कर फूलों की घाटी में पहुंच जाइए, हमारा दावा है कि वे सारे रंग आपको इस घाटी में बिखरे हुए दिखायी देंगे। यही नहीं हर संभव आकार के फूलों और पत्तियों को भी आप यहां देख पाएंगे। यहां के फेमस और शुरुआती ब्लू पॉपी पॉइंट से आगे बढ़ने पर जहां नजर जाएगी, वहां आपको फूलों का गलीचा बिछा हुआ दिखायी देगा। उत्तराखंड की शान और वहां का राजकीय फूल दुर्लभ ब्रह्मकमल भी आप यहां देख सकते हैं।
वैसे इस घाटी का पूरा इलाका फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की सुरक्षा में आता है। लेकिन जब तीन ब्रिटिश पर्वतारोहियों के सामने इस घाटी ने अपनी बांहें फैलायी होंगी, तब तो कोई वन विभाग नहीं था, ना ही किसी को इस नैसर्गिक सौंदर्य के बारे में पता था। तब कौन था, जो इस अनछुई, अदभुत घाटी का रखवाला था। इन फूलों को यहां कौन लाया होगा, इनकी देखभाल कौन करता होगा, एकबारगी यह सवाल तो मन में इस घाटी में घूमते हुए आता ही है।
जो पर्यटक फूलों की घाटी घूमने आते हैं, वे अपने साथ एक दिन अतिरिक्त ले कर चलें तो सिखों के प्रसिद्ध गुरुद्वारे हेमकुंड साहिब के दर्शन भी कर सकते हैं। यहां तक का रास्ता भी काफी मुश्किल चढ़ाई वाला है। पर जब एक बार आप गुरुद्वारे तक पहुंच जाते हैं, तो महसूस होता है कि मेहनत सफल हो गयी।
कहां से शुरू करें
फूलों की घाटी पहुंचने के लिए आपको ऋषिकेश, जोशीमठ, गोविंदघाट से होते हुए घांघरिया पहुंचना होगा। घांघरिया से ही फूलों की घाटी का ट्रेक शुरू होता है। यहीं से हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा का भी ट्रेक शुरू होता है। घाटी में आप रात को रुक नहीं सकते, इसलिए शाम होने से पहले आपको घांघरिया वापस आना होगा। इसलिए सुबह 7 बजे से पहले यहां पर्यटकों की कतार लग जाती है। यहां पर खाने के लिए आपको कुछ नहीं मिलेगा, इसलिए अपने साथ खाने-पीने का सामान ले कर जाएं और पानी की बोतल भी साथ में रखें। लेकिन अपने साथ-साथ प्रकृति का भी ध्यान रखें और इधर-उधर कचरा और प्लास्टिक की बोतलें ना फेंकें। यहां घूमने के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय ले कर चलें।