बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि छोटे-मोटे जरूरी कामों में मदद करने के लिए एक नयी कोशिश कर रहा है टाइम बैंक। इस तरह के बैंक विदेशों में होते हैं। इनके तहत बुजुर्गों में बढ़ते अकेलेपन डिप्रेशन को कम करने की खूबसूरत पहल की जा रही है।
क्या है टाइम बैंक
आप अपना जितना समय अपने इलाके के बुजुर्ग को देंगे, भविष्य में जब आपको खुद बुजुर्ग होने पर जरूरत पड़ेगी, तो आपको अपना खर्च समय वापस मिलेगा। भविष्य में यह बैंक उसी तरह से स्वयंसेवक से उतना ही समय तथा सपोर्ट उपलब्ध कराएगा। जयपुर में कोविड के समय से टाइम बैंक ऑफ इंडिया वेबसाइट खोला गया है। इस बैंक के निदेशक पी. सी.जैन कहते हैं, ‘‘आज पूरे देश भर में 9 हजार से ज्यादा सदस्य हैं। इनके पास 1688 हेल्प रिक्वेस्ट आयी हैं। इस बैंक की भी खासियत यह है कि ना तो इसका कोई ऑफिस है, ना कोई फीस ली जाती है। अपने इलाके में किसी सक्षम व्यक्ति को यूनिट हेड बनाया जाता है। उस इलाके के जो भी मेंबर जुड़ते हैं, उनकी जूम मीटिंग करायी जाती है। अगर बुजुर्ग जूम मीटिंग से वाकिफ नहीं हैं, तो मेंबर्स उनके घर जा कर हेल्प करते हैं। इसमें बुजुर्गों के काम जैसे उन्हें अस्पताल ले जाना, दवा लाना, खरीदारी करवाना, दिनचर्या से संबंधित कोई छोटे-मोटे काम करवाना आदि शामिल हैं।
बुजुर्गों के घर तक आने-जाने का खर्च या तो स्वयंसेवक खुद करते हैं या बुजुर्ग वहन करते हैं।’’
सेवा लेने पर टाइम अकाउंट से टाइम कट होता है और जो सेवा करता है, उसके खाते में समय जुड़ जाता है। आप टाइम बैंक ऑफ इंडिया की वेबसाइट (timebank ofindia.com) में रजिस्टर कर सकते हैं।
कहां-कहां हैं ये बैंक
देश के कई राज्यों में सरकारें भी इस बैंक से जुड़ कर कार्य करने लगी हैं। बैंक से सिर्फ अधेड़ व्यक्ति ही नहीं, 18 साल से अधिक उम्र का व्यक्ति जुड़ सकता है। अभी तक ग्वालियर, आगरा, पुणे, हैदराबाद, केरल और चंडीगढ़ में हेल्पिंग यूनिट बनायी गयी हैं। बैंक से जुड़ने का मकसद सिर्फ सेवा संकल्प और भरोसे का आदान-प्रदान करना है। वैसे ब्रिटेन, जापान, स्पेन, न्यूजीलैंड और ग्रीस जैसे देशों में इस योजना को सालों से अपनाया जा रहा है। इसमें अच्छी बात यह है कि युवा भी इसमें स्वेच्छा से जुड़ते हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2022 में बुजुर्गों की संख्या 14.90 करोड़ थी, जिसके 2050 तक 30.7 करोड़ होने का अनुमान है। स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ी हैं और औसत आयु बढ़ रही है। लेकिन इसके साथ ही बुजुर्गों में अकेलापन और डिप्रेशन भी बढ़ रहा है, जिस कारण टाइम बैंक की जरूरत भी बढ़ रही है। दरअसल, दुनियाभर में जॉइंट फैमिली खत्म होने और एकल परिवार बढ़ने की वजह से बड़ी उम्र में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संख्या तेजी बढ़ी है। इसीलिए देश के हर छोटे-बड़े शहर में टाइम बैंक खोला जाना चाहिए।
