Wednesday 30 September 2020 11:40 AM IST : By Meena Pandey

वुमन हार्मोंस हेल्थ के साथ मूड पर भी डालते हैं असर

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हमारे शरीर में स्रावित होनेवाले हारमोन्स ही शारीरिक-मानसिक प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन्हीं के कारण मूड बनता, बिगड़ता, भूख लगती अौर क्रैंप्स अाते हैं। हमारा शरीर दर्जनों हारमोन्स पैदा करता है। किसी एक हारमोन का स्तर अचानक बढ़ने-घटने का असर हमारी मानसिक, भावनात्मक व शारीरिक सेहत पर पड़ता है। अाइए जानते हैं, ये हारमोन्स क्या हैं अौर ये किस तरह शरीर पर असर दिखाते हैं।

मुंहासे

लगभग अाधी महिलाएं पीरियड्स के दौरान चेहरे पर मुंहासे निकलने से परेशान रहती हैं, लेकिन माहवारी के बाद उनका चेहरा साफ-साफ हो जाता है। लेकिन मुसीबत उन महिलाअों की है, जो सारे महीने मुंहासों से परेशान रहती हैं, जिनकी वजह से चेहरे पर गहरे धब्बे पड़ जाते हैं। कोई क्रीम काम नहीं करती। इसके लिए एंड्रोजंस हारमोन को दोषी ठहराया जा सकता है। हम सोचते हैं कि मुंहासे की वजह खराब अाहार या सफाई की कमी है, पर यह टेस्टोस्टेरॉन की वजह से होता है, कहना है हारमोनली वलनरेबल वुमन के लेखक व एंडोक्राइनोलॉजिस्ट जियोफ्री रेमंड का। टेस्टोस्टेरॉन सीबम व तेल बहुत बनाता है, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं अौर धब्बे पड़ जाते हैं।

संतुलन बनाएं ः गर्भनिरोधक गोलियां खून के साथ तैरनेवाले फ्री टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम करती हैं। यह डेड स्किन के लिए 50 प्रतिशत जिम्मेदार है। स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भनिरोधक गोलियां लेनेवाली महिलाअों की त्वचा मेंटेन रहती है। एेसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लें, जिनमें इस्ट्रोजन का ज्यादा व एंड्रोजन का स्तर कम हो। उनमें मौजूद हारमोन में त्वचा के रोमछिद्रों को साफ रखने की क्षमता हो। वैसे ऐसे में डॉक्टर को दिखा कर इलाज करा लेना अच्छा रहेगा।

याददाश्त कम होना

क्या अापको याद नहीं रहता कि मोबाइल फोन कहां रखा या सहेली से लंच में कहां मिलने का वादा किया, यह भी तमाम कोशिशों के बावजूद ध्यान नहीं अाता। अापको महसूस होता है कि अाप बहुत कम उम्र में बातें भूलने लगी हैं, तो इसकी कुछ वजह हैं। यदि अाप लंबे समय से तनाव व दबाव में रह रही हैं, रातभर बच्चे के साथ जागी हों या अॉफिस का बड़ा प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए रात-रात भर काम किया हो, उस काम को समय से अॉफिस में जमा करने का दबाव भी है, तो ऐसे में शरीर लगातार कोर्टिसल हारमोन पंप करता है। अध्ययन से पता चलता है कोर्टिसल के लगातार हाई लेवल पर रहने से याद रखने व सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति लगातार रहने पर यह दिमाग की कोशिकाअों को नष्ट कर सकती है। खासकर मस्तिष्क के हिप्पोकैंपस को प्रभावित करता है, जहां लंबे समय के लिए सूचनाएं अौर यादें इकट्ठा रहती हैं।

संतुलन बनाएं ः सबसे पहले अपने स्वस्थ अादतें अपनाएं, जैसे सुबह की सैर, वर्गपहेली हल करना, बेर-रसभरी खाना अादि। हाल ही में किया गया अध्ययन बताता है कि जो लोग अपने लाइफस्टाइल में ये सारी बातें शामिल रखते हैं, वे दबाव व तनाव से दूर रहते हैं। उनकी याददाश्त में सुधार अाता है। स्वास्थ्यकारी खानपान व शारीरिक फिटनेस में वह ताकत है कि 2 हफ्ते पहले की बातें याद रहती हैं। इसकी वजह स्ट्रेस हारमोन के स्तर का कम हो जाना है। इसके अलावा योगाभ्यास, ध्यान अौर एरोबिक जैसे व्यायाम तनाव व थकान को दूर करने में सहायक होते हैं। ईश्वर से प्रार्थना करने व धार्मिक कामों में शामिल होने से मन को शांति मिलती है। सुबह 20 मिनट देर से उठने से भी याददाश्त ठीक रहती है। इससे कोिर्टसल को बाहर करने में मदद मिलती है। दिनभर में एक बार अाराम करें।

इनसोम्निया यानी अनिद्रा

यदि अापको अामतौर पर नींद अाने में दिक्कत है या पीरियड्स से ठीक पहले नींद डिस्टर्ब रहती है, तो ऐसा मेंस्ट्रुअल साइकल में प्रोजेस्ट्रॉन हारमोन के तत्काल तेज हो जाने के कारण होता है। न्यूयॉर्क युनिवर्सिटी के स्लीप डिस्अॉर्डर सेंटर में एसोसिएट प्रोफेसर जॉयस वॉल्सबेन के अनुसार प्रोजेस्ट्रॉन बढ़ने से से हाथ-पैर ढीले हो जाते हैं। इसी वजह से पीरियड्स व डिलीवरी के समय बेअारामी महसूस होती व नींद नहीं अाती है। इसके दुष्प्रभावों में ब्रेस्ट का मुलायम पड़ना व क्रैंप्स अाना शामिल हैं।

संतुलन बनाएं ः पानी, शरबत, शिकंजी अादि खूब लें। इससे सूजन कम होगी। दोपहर के बाद चाय-कॉफी ना लें। सोने से पहले गरम दूध पिएं अौर मेवे खाएं। इनमें ट्राइप्टोफन होता है, जो मस्तिष्क में सेरोटोनिन केमिकल बनाता है, जिससे नींद कंट्रोल में रहती है।

बेहिसाब भूख

कुछ हारमोन्स की वजह से हम ज्यादा खाने लगते हैं। गेरेलिन हारमोन भूख पैदा करता अौर लेप्टिन अॉक्सीनटोमोड्यूलिन हारमोन भूख को दबाता है। इनका तालमेल गड़बड़ाने पर या तो भूख नहीं लगती या बहुत भूख लगती है। स्लीप एंड अोबेसिटी शोधकर्ता ग्रेजर हसल के अनुसार लेप्टिन हारमोन की कमी होने पर दिमाग को लगता है कि वसा की ज्यादा जरूरत है, लिहाजा वह भूख जगा देता है।

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संतुलन बनाएं ः नींद अाए ना अाए 7-9 घंटे अांखें मूंद कर लेटे रहें। इससे लेप्टिन हारमोन का स्तर बढ़ता है अौर अोवरवेट होने का खतरा 23 प्रतिशत घटता है। हाई कैलोरीवाला, वसा या प्रोटीनयुक्त भोजन के बजाय ताजी सब्जियां व अनाज खाएं।

हमेशा थकान

कई बार ऐसा लगता है कि उठा ही नहीं जाएगा, शरीर में ताकत ही नहीं है। कम खाने पर भी वजन बढ़ जाता है। हो सकता है थायरॉइड हारमोन की कमी हो गयी हो। हाइपोथायरॉइडिज्म से शरीर का मेटाबोलिज्म नियंत्रण में रहता है। इसकी कमी होने पर शरीर के सारे सिस्टम की गति धीमी हो जाती है। इसलिए हाइपोथायरॉडिज्म बेहाल महसूस कराता है।

संतुलन बनाएं ः थायरॉइड का स्तर जानने के लिए टेस्ट कराएं। डॉक्टर अापको उपचार बताएंगे। वुमंस एंड टीन गर्ल्स मूड एंड हारमोन क्लीनिक के डाइरेक्टर ब्रेजेनडाइन कहते हैं कि यदि अापको डिप्रेशन, घबराहट व थकान महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखा लें। हो सकता है, एेसा थायरॉइड के असंतुलन के कारण हो रहा हो। डॉक्टर थायरॉइड का टेस्ट कराएंगे। उसके बाद जो इलाज बताया जाए, उसे पूरा करें।

पेट में मरोड़

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कुछ लोग तनाव व दबाव में सिर दर्द, तो कुछ लोग पेट में मरोड़ महसूस करते हैं। क्योंकि उस स्थिति में कई हारमोन व नर्व्स दिमाग अौर पेट दोनों जगह समान प्रतिक्रियाएं देते हैं। सेरोटोनिन हारमोन का स्तर असामान्य होने पर पेट में मरोड़, पेड़ू में दर्द, डायरिया अादि की शिकायत हो जाती है। पीरियड्स के दौरान पेट में एेंठन इस्ट्रोजन अौर प्रोजेस्ट्रॉन की वजह से होती है।

संतुलन बनाएं ः शोधकर्ता डॉ. अर्नोल्ड के अनुसार जिन मरीजों ने 25 ग्राम फाइबर हर रोज भोजन के बाद लिया, उनके पेट दर्द में कमी अायी। फाइबर अांत में मौजूद हारमोन्स को प्रभावित करता है। यह छोटी-बड़ी अांत को बढ़ा देता है, जिससे पेट की जिस मांसपेशी में दर्द हो रहा होता है, वह अाराम की स्थिति में अा जाती है। अपने भोजन में साबुत अनाज, फल, सब्जियां शामिल करें।