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ओवेरियन कैंसर यानी अंडाशय का कैंसर शुरुआती दौर में पहचानना कई बार मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर रोजमर्रा की पेट से जुड़ी परेशानियों जैसे एसिडिटी, अपच या पेट फूलने जैसे लग सकते हैं। इस बारे में दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में कंसल्टेंट गाइनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. परमिंदर कौर का कहना है, ‘‘कभी-कभार ऐसी परेशानी होना आम बात है, लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें या बिना किसी स्पष्ट वजह के बार-बार हों, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार पेट फूलना, थोड़ा सा खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना, लगातार अपच या एसिडिटी, पेट में असहजता, या मल-मूत्र की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण कभी-कभी ओवेरियन कैंसर से भी जुड़े हो सकते हैं। खासकर तब, जब ये लक्षण नए हों, लगातार बने रहें और सामान्य इलाज या सावधानियों से ठीक न हों।’’

इन लक्षणों का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि महिला को ओवेरियन कैंसर ही है। लेकिन बिना वजह समझे बार-बार इन्हें सिर्फ “एसिडिटी” मानकर इलाज करते रहना बीमारी की पहचान में देरी कर सकता है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले लगातार बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और अगर लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं, अगर ऐसे लक्षण तीन हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बने रहते हैं या उनके साथ पेल्विक यानी पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब करने की आदतों में बदलाव, बिना किसी वजह वजन कम होना या पेट का लगातार फूलना जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जागरूक होने का मतलब सबसे बुरा मान लेना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि कब किसी सामान्य लगने वाले लक्षण पर थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है।

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कैसे मिलेगा आराम

रोजवॉक रेनबो चिल्ड्रंस हॉस्पिटल में ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनीकोलॉजी में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अपूर्व गुप्ता, का कहना है, ‘‘बार-बार होते हैं या एंटासिड जैसी सामान्य दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो लंबे समय तक खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि ऐसे लक्षण होने पर कैंसर ही है, क्योंकि इनके कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। लेकिन लगातार बने रहने वाले बदलावों की जांच जरूर करानी चाहिए।’’

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दूसरे कुछ कैंसर की तरह ओवेरियन कैंसर के लिए फिलहाल ऐसी कोई भरोसेमंद नियमित स्क्रीनिंग जांच उपलब्ध नहीं है, जो सामान्य जोखिम वाली महिलाओं में इसे शुरुआती स्तर पर पकड़ सके। इसलिए इसके संभावित लक्षणों को लेकर जागरूक रहना बेहद जरूरी है। शरीर में होने वाले लगातार या असामान्य बदलावों पर ध्यान देना और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना बीमारी की जल्द पहचान और सही इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

हालांकि इन लक्षणों का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि महिला को ओवेरियन कैंसर ही है। लेकिन बिना वजह समझे बार-बार इन्हें सिर्फ “एसिडिटी” मानकर इलाज करते रहना बीमारी की पहचान में देरी कर सकता है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले लगातार बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और अगर लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं या उनके साथ पेल्विक यानी पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेशाब करने की आदतों में बदलाव, बिना किसी वजह वजन कम होना या पेट का लगातार फूलना जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जागरूक होने का मतलब सबसे बुरा मान लेना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि कब किसी सामान्य लगने वाले लक्षण पर थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है।

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