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पीरियड्स और मासिक धर्म से जुड़े कई मिथक अभी भी डर, शर्म और कलंक को बढ़ावा देते हैं। ये गलत धारणाएं महिलाओं को सुरक्षित और मासिक धर्म की देखभाल के सही तरीकों का उपयोग करने से रोकती हैं। मासिक धर्म के बारे में सही जानकारी प्रदान करने से अधिक महिलाओं को पीरियड्स को समझने और उस दौरान अपने शरीर की सही देखभाल करने में मदद मिलेगी। इस बारे में जानकारी दे रही हैं ब्लिस नेचुरल की फाउंडर और डाइरेक्टर निवेदा रविकुमार

मिथक 1: पीरियड का खून “गंदा” होता है

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पीरियड्स के बारे में सबसे बड़े मिथकों में से एक यह है कि मासिक धर्म का खून अशुद्ध और/या विषैला होता है। सच्चाई यह है कि पीरियड ब्लड गर्भाशय के ऊतक, रक्त और म्यूकस का एक प्राकृतिक मिश्रण होता है और यह हेल्थ के लिए किसी भी तरह से हानिकारक नहीं होता। पीरियड्स हर महिला के शरीर में होने वाली एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, इसे अशुद्ध या खराब कह कर इसके प्रति भ्रम नहीं फैलाना चाहिए।

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मिथक 2: पीरियड्स के दौरान नहाना नहीं चाहिए

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यह मिथक कई बहुत ज्यादा माना जाता है। लेकिन यह सरासर गलत और हानिकारक है। पीरियड्स के दौरान इन्फेक्शन या असुविधा से बचने के लिए अच्छी हाइजीन बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। गुनगुने पानी से नहाने से दर्द कम करने में मदद मिलती है।

मिथक 3: टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप का प्रयोग वर्जिनिटी पर असर डालता है

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वर्जिनिटी को लेकर कई गलत धारणाएं हैं। उनमें से एक यह है कि टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करने से वर्जिनिटी पर असर पड़ता है। हाइमन (झिल्ली) कई कारणों से खिंच या फट सकती है, जिसमें टैम्पॉन या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग भी शामिल है। इन्हीं सब गलत मिथकों की वजह से महिलाएं पीरियड्स के दौरान आरामदायक और एनवायरनमेंट फ्रेंडलि उत्पादों का प्रयोग करने से बचती हैं।

मिथक 4: मासिक धर्म के दौरान व्यायाम नहीं करना चाहिए

आमतौर पर यह माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और असुविधा के कारण शारीरिक गतिविधि से बचना चाहिए। हालांकि, रिसर्च से यह पता चला है कि पीरियड्स के दौरान हल्का व्यायाम करने से दर्द व क्रैंप्स कम हो सकते हैं। इससे इमोशनल हेल्थ भी बेहतर बनती है। हल्का व्यायाम जैसे योग, वॉकिंग, स्ट्रेचिंग ना सिर्फ पीरियड्स के दौरान होने वाली असुविधा को कम करते हैं, बल्कि पीरियड्स को नियमित भी बनाते हैं।

मिथक 5: अनियमित पीरियड्स सामान्य हैं

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कई लोग मासिक चक्र की अनियमितता को सामान्य मानते हैं, लेकिन लगातार अनियमितता किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है। हार्मोनल असंतुलन और थायरॉयड समस्याएं, साथ ही पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओडी), अनियमित पीरियड्स से जुड़ी होती हैं। यह मान लेना कि शरीर का अनियमित होना सामान्य है, समस्या की पहचान और उसके उपचार में देरी का कारण बन सकता है।

मिथक 6: पीएमएस सामान्य सी बात है

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आमतौर पर महिलाओं को पीएमएस से जुड़े लक्षणों के कारण “मूडी” या “भावनात्मक रूप से अस्थिर” कहा जाता है। हालांकि, पीएमएस शारीरिक और भावनात्मक लक्षणों का मिश्रण है, जिसमें थकान, सूजन, चिंता/अवसाद जैसे लक्षण शामिल हैं और कई मामलों में यह गंभीर स्थिति का रूप ले सकता है, जिसके लिए डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता होती है।

मिथक 7: मासिक धर्म के दौरान गर्भधारण संभव नहीं है

हालांकि पीरियड्स के दौरान गर्भधारण की संभावना कम होती है, लेकिन यह संभव है, खासकर यदि आपका चक्र छोटा है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि शुक्राणु यौन संबंध के बाद शरीर में लगभग 3-5 दिनों तक जीवित रह सकते हैं। चूंकि ओव्यूलेशन का समय हर महीने बदल सकता है, इस दौरान यौन संबंध बनाने से गर्भधारण की संभावना बनी रहती है।

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