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25 साल की एक लड़की नोएडा मेट्रो हॉस्पिटल में डॉ अंजू सूर्यापाणी के क्लीनिक में आती है। लड़की 1 महीने से प्रेगनेंट है – शादी नहीं हुई है। बॉयफ्रेंड के साथ लिव इन रिलेशनशिप में है। प्यार के खुमार में बिना प्रोटेक्शन यानी बिना कंडोम का इस्तेमाल किए संबंध बना लिए। लड़की ने सोचा कि पीरियड्स खत्म हुए 1 ही दिन हुआ है तो प्रेगनेंसी नहीं होगी। लेकिन ये आकलन गलत साबित हुआ। अब समाधान के लिए यानी प्रेगनेंसी से निजात पाने के लिए डॉ अंजू के सामने बैठी है। चेहरे पर कोई चिंता नहीं है। हां, ये डर जरूर है कि गर्भपात सुरक्षित तरीके से और बिना सेहत को नुकसान हुए हो जाए।

नोएडा के मेट्रो अस्पताल में 25 साल से काम रही गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ अंजू के मुताबिक हर महीने वो 5 से 10 ऐसी लड़कियों से मिल लेती हैं जो बिना शादी के प्रेगनेंट हो गईं। महानगरों में काम करने के लिए आई लड़कियां हों, या परिवार के साथ रह रहे बच्चे – रिलेशनशिप और शादी से पहले सेक्स अब टैबू नहीं है। हालांकि अच्छी बात ये है कि नीम-हकीम के नुस्खे अपनाने की जगह आज की जेनरेशन डॉ के पास जाकर खुलकर अपनी समस्या शेयर करने में यकीन रखती है।

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अनचाहे गर्भ के नैतिक पहलू से ज्यादा ज़रुरी है मेडिकल पक्ष। लड़की को जितना जल्दी ये पता चल जाए कि गलती हो चुकी है, गर्भपात उतना ही आसान रहता है।

पहचानिए – प्रेगनेंसी है या नहीं 

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गर्भावस्था के शुरुआती संकेत हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण हैं:

पीरियड्स का मिस होना

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मॉर्निंग सिकनेस जैसे कि उल्टी आना

स्तनों में दर्द या भारीपन

ज्यादा थकान महसूस होना

बार-बार पेशाब लगना

चक्कर आना

ऐसे करें प्रेगनेंसी टेस्ट

अगर रिलेशनशिप बनाने के बाद ये शक है कि प्रेगनेंसी हो सकती है तो घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट से जांच की जा सकती है। सुबह के पहले यूरिन से टेस्ट करने पर परिणाम अधिक सटीक माना जाता है। टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से मिलकर ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड द्वारा पुष्टि कराना जरूरी होता है।

होम टेस्टिंग किट पीरियड्स मिस होने के पहले दिन किया जा सकता है। अगर पीरियड्स की सही डेट ना पता हो तो सेक्स के 21 दिन बाद ये टेस्ट कर सकते हैं। हालांकि 100 फीसदी सही नतीजों के लिए ब्लड टेस्ट करवाया जा सकता है। ये भी संबंध बनाने के दो हफ्ते के बाद करना चाहिए – जिससे टेस्ट सही नतीजे दे सके।

ब्लड टेस्ट से ये अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रेगनेंसी कितने दिन की हुई है।

कैसे हो सकता है अबॉर्शन

2 महीने से कम समय की प्रेगनेंसी में डॉक्टर दवाएं देकर गर्भपात करा सकते हैं। ये दवाएं खुद कभी भी नहीं लेनी चाहिए। दवा शुरु करने से पहले लड़की की एनीमिया यानी हीमोग्लोबीन की जांच की जाती है। क्योंकि इस प्रक्रिया में ब्लीडिंग होती है। दवा शुरु करने से पहले अल्ट्रासाउंड किया जाता है। दवाओं का कोर्स पूरा होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड करके ये सुनिश्चित किया जाता है कि सब ठीक से हो गया या नहीं।

इससे ज्यादा समय होने पर क्लीनिक में छोटी सी सर्जिकल प्रक्रिया करनी पड़ सकती है। डॉक्टर इसे Dilation and Curettage (D&C) कहते हैं। ये प्रोसीजर प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने से 4 महीने में किया जा सकता है।

केमिस्ट से सीधे भी कुछ लड़कियां एमटीपी किट्स ले लेती हैं। ये ऑनलाइन भी मिल जाती हैं लेकिन बिना अपनी मेडिकल कंडीशन को समझे खुद से दवा लेने के कई खतरे हो सकते हैं। बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, और आधा अधूरा अबॉर्शन सबसे बड़े खतरे हैं।

भारत में असुरक्षित तरीके से अबॉर्शन की वजह से 8 से 10 प्रतिशत महिलाओं की मौत हो जाती है। आधे अधूरे तरीकों से गर्भपात होने पर यूटरस में हमेशा के लिए चोट लग सकती है। कई बार पूरी तरह सफाई ना होने से इंफेक्शन फैलने का खतरा बना रहता है।

समस्या तब होती है जब गर्भपात असुरक्षित तरीके से कराया जाए या अधूरा रह जाए, जिससे गर्भाशय में संक्रमण या चोट हो सकती है।

भारत में गर्भपात का कानून

भारत में गर्भपात पूरी तरह अवैध नहीं है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (MTP Act) के तहत कुछ परिस्थितियों में गर्भपात कानूनी और सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता है। 2021 के संशोधन के बाद महिलाओं को अधिक अधिकार दिए गए हैं—अब कुछ विशेष परिस्थितियों में 24 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति मिल सकती है, हालांकि इसके लिए मेडिकल बोर्ड बनाया जाता है और डॉ डॉक्टरों की लिखित सहमति की ज़रुरत होती है। 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की वजहें आमतौर पर कानूनी होती हैं – जैसे महिला के साथ रेप, शादी का टूट जाना, विधवा हो जाना, बच्चे में कोई विकलांगता का पता चलना या ऐसा कोई और कारण। जबकि 20 सप्ताह तक एक डॉक्टर की सलाह से गर्भपात संभव है।

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अनचाही प्रेगनेंसी के खतरे से ऐसे बचें

कंडोम – एक्सटरनल तरीका है जो सबसे आसान है और इसका कोई नुकसान नहीं है। यह यौन संक्रमण से भी बचाता है। अब मेल कंडोम के साथ साथ फीमेल कॉन्डाम भी मिलते हैं। हालांकि प्रयोग की सुविधा के लिहाज से अभी भी मेल कंडोम ही इस्तेमाल में हैं।

गर्भ निरोधक गोलियां – ये भी सुरक्षित हैं हालांकि ये हार्मोन में बदलाव करती हैं जिससे आगे चलकर प्रेगनेंट होने में कुछेक महिलाओं को परेशानी हो सकती है। ये दवाएं कुछ मामलों में वज़न बढ़ा सकती हैं।

इमरजेंसी पिल (72-hour pill) – अब ये कई नामों से आती हैं। हालांकि नाम के मुताबिक इनका इस्तेमाल इमरजेंसी में ही करना चाहिए। साल में 2-3 बार से ज्यादा इनका प्रयोग नुकसान कर सकता है। ये गोली असुरक्षित संबंध के बाद जितनी जल्दी ले ली जाए, उतना ही प्रेगनेंट होने का खतरा कम हो जाता है।

कॉपर-टी – आमतौर पर शादीशुदा महिलाओं के मामले में इसे लगाया जाता है। डॉक्टर इसे महिला के यूटरस में लगा देते हैं। ये 5–10 साल तक काम करती है।

चाहे प्रेगनेंसी से बचना हो या ज़रुरत होने पर अबॉर्शन कराना हो – बिना ट्रेंड डॉक्टर के कोई काम ना करें। गली मोहल्लों में खुले अवैध सेंटर खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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