क्या आपने कभी नोटिस किया है - रात को सोने जाते समय अचानक दिमाग ‘मीटिंग मोड’ में चला जाता है? दिन भर की छोटी-छोटी बातें, किसी की कही एक लाइन, भविष्य की अनगिनत संभावनाएं और आप बस सोचते ही जाते हैं। यही है ओवरथिंकिंग, जहां सोच मदद करने के बजाय उलझाने लगती है। ओवरथिंकिंग का मतलब है किसी बात के बारे में जरूरत से ज्यादा और बार-बार सोचना। यह दो तरह से दिखता है-
अतीत का मलाल : “काश मैंने ऐसा कहा होता।”
भविष्य की फिक्र : “अगर ऐसा हो गया तो?”
शुरुआत में यह सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और मानसिक शांति छीन लेती है।
क्यों करते हैं हम ओवरथिंकिंग : ओवरथिंकिंग अचानक नहीं आती, इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे हर चीज बिलकुल सही करने की कोशिश, भविष्य को कंट्रोल करने की चाह, कम आत्मविश्वास, कोई गलती या नकारात्मक घटना और सोशल मीडिया और लगातार तुलना।
इसके असर क्या होते हैं : ओवरथिंकिंग सिर्फ दिमाग में नहीं रहती, यह पूरी जिंदगी को प्रभावित करती है। नींद खराब होना, चिंता और तनाव बढ़ना, निर्णय लेने में मुश्किल, आत्मविश्वास कम होना, रिश्तों में गलतफहमियां जैसे लक्षण दिखायी देते हैं। धीरे-धीरे यह एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं की ओर भी ले जा सकती है।
इससे कैसे बाहर निकलें
दिल्ली स्थित सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. शची माथुर बलहारा कहती हैं कि ओवरथिंकिंग को धीरे-धीरे काबू में किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने मन को बार-बार वर्तमान में वापस लाना सीखें और विचारों को रोकने की कोशिश करने के बजाय उनके प्रति अपनी प्रतिक्रिया बदलें।
‘स्टॉप’ बटन दबाना सीखें : यह पहचानें कि कब आपके विचार एक ही बात के आसपास घूम रहे हैं। ऐसे में खुद से प्यार से कहें कि इस विषय पर बाद में, किसी तय समय पर सोचेंगे, ताकि यह पूरे दिन पर हावी न हो जाए। जैसे ही दिमाग बार-बार एक ही बात सोचने लगे, खुद से कहें, “बस, अब नहीं।”
लिख कर बाहर निकालें : अपने विचारों को लिख लेना भी बहुत फायदेमंद होता है, इससे मन का बोझ हल्का होता है और यह समझने में मदद मिलती है कि क्या आपके नियंत्रण में है और क्या नहीं। अपने विचारों को लिखने से चीजें स्पष्ट दिखेंगी।
खुद से सवाल पूछें : क्या यह सच में इतना बड़ा मुद्दा है? क्या मैं इसे कंट्रोल कर सकता/सकती हूं?
वर्तमान में रहें : धीमी और गहरी सांसें लेना, ध्यान करना, हल्का संगीत सुनना, थोड़ा टहलना या प्रकृति के बीच समय बिताना जैसे छोटे अभ्यास मन को शांत करने में मदद करते हैं।
एक्शन लें : सिर्फ सोचने के बजाय छोटे-छोटे कदम उठाएं। इससे ध्यान बंटता है और मन अपने आप शांत होता है। एक्शन ओवरथिंकिंग का सबसे बड़ा इलाज है।
डिजिटल डिटॉक्स करें : सोशल मीडिया से थोड़ा ब्रेक लें, यह तुलना और चिंता को कम करता है।
सोचना गलत नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सोचना नुकसानदायक है। दिमाग को ‘समस्या सुलझाने वाला’ बनाएं, ‘समस्या बढ़ाने वाला’ नहीं। ओवरथिंकिंग एक ऐसी आदत है, जो धीरे-धीरे मन की शांति छीन लेती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे बदला जा सकता है। थोड़ी जागरूकता, सही आदतें और खुद पर भरोसा, यही इसकी दवा है, क्योंकि जिंदगी का मजा ‘हर पल को जीने’ में है, ना कि हर पल को ‘सोचते रहने’ में।