दिल की बीमारी अमूमन सीने में दर्द या सांस फूलने से जुड़ी होती है, लेकिन इसका खतरा सालों तक चुपचाप बढ़ सकता है। तीन अहम चीजेें - हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल - खून की नसों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती हैं। इनके आपसी संबंध को समझना न सिर्फ बचाव के लिए जरूरी है, बल्कि उन लोगों के लिए भी जरूरी है जिनकी पहले ही स्टेंट प्रक्रिया, बाईपास सर्जरी या दिल का कोई और इलाज हो चुका है। नोएडा के मेदांता हॉस्पिटल में कार्डिअक सर्जरी में डाइरेक्टर डॉ. संजय कुमार दे रहे हैं वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर हार्ट केअर से जुड़ी जानकारी-
ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर दिल पर कैसे असर डालते हैं
हाई ब्लड प्रेशर खून की नसों की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव डालता है और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। समय के साथ, अनियंत्रित हाइपरटेंशन धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है, प्लाक बनने को बढ़ावा दे सकता है और हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। चुनौती यह है कि हाई बीपी के अक्सर कोई खास लक्षण नहीं दिखते, इसलिए अच्छा महसूस करने का मतलब यह नहीं है कि आपका बीपी कंट्रोल में है।
हाई ब्लड शुगर, खासकर डाइबिटीज वाले लोगों में, खून की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है और सूजन व प्लाक जमा होने में योगदान दे सकता है। डाइबिटीज अक्सर हाई बीपी, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और ज्यादा वजन के साथ भी होती है, जिससे ऐसे जोखिम पैदा होते हैं जो दिल की बीमारी को तेजी से बढ़ा सकते हैं। इसलिए, ब्लड शुगर को व्यक्ति-विशेष के लिए तय लक्ष्य सीमा के भीतर रखना दिल की सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है।
हाई कोलेस्ट्रॉल, खासकर बढ़ा हुआ एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल, धमनी की दीवारों में फैट जमा होने में योगदान देता है। ये जमाव दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों को संकरा कर सकते हैं। अगर प्लाक फट जाता है और खून का थक्का बन जाता है, तो यह खून के बहाव को रोक सकता है और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। हाई ट्राइग्लिसराइड्स, खासकर जब कम एचडीएल या हाई एलडीएल के साथ हों, तो दिल से जुड़े जोखिम में भी योगदान दे सकते हैं।
उदाहरण के लिए, डाइबिटीज वाले व्यक्ति को हाई बीपी और असामान्य कोलेस्ट्रॉल भी हो सकता है। सिर्फ एक चीज को मैनेज करना और दूसरों को नजरअंदाज करना बड़े जोखिम को बिना समाधान के छोड़ सकता है। नियमित जांच, जिसमें बीपी मापना, लिपिड प्रोफाइल और सलाह मिलने पर ब्लड शुगर या HbA1c की जांच शामिल है, समस्याओं की जल्दी पहचान करने में मदद करती है।
स्टेंट या बाईपास के बाद जिंदगी: मरीजों को क्या जानना चाहिए
स्टेंट या बाईपास सर्जरी से दिल में खून का बहाव फिर से शुरू हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज (दिल की धमनियों की बीमारी) होने की संभावना खत्म हो गई है। दूसरी धमनियों में भी प्लाक जमा हो सकता है और मौजूदा बीमारी बढ़ सकती है। लंबे समय तक देखभाल ज़रूरी है।
1. दवाएं ठीक वैसे ही लें जैसे बताई गई हैं। स्टेंट के बाद, खून के थक्के जमने का खतरा कम करने के लिए एंटीप्लेटलेट दवाएँ दी जा सकती हैं। बाईपास सर्जरी के बाद, डॉक्टर एस्पिरिन, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएँ और दिल की सुरक्षा के लिए अन्य इलाज बता सकते हैं। एस्पिरिन, खून पतला करने वाली दवाएं, स्टेटिन या बीपी की दवाएं खुद से बंद न करें—भले ही आप पूरी तरह ठीक महसूस कर रहे हों। अगर कीमत, साइड इफेक्ट या भूलने की वजह से दवाएं लेना मुश्किल हो रहा है, तो अपने डॉक्टर से दूसरे विकल्पों के बारे में बात करें।
2. फॉलो-अप अपॉइंटमेंट न छोड़ें। मरीज़ों को अपने कार्डियोलॉजिस्ट के साथ बीपी, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, किडनी के काम करने की क्षमता और अन्य ज़रूरी टेस्ट की नियमित रूप से जाँच करवानी चाहिए। हार्ट अटैक, स्टेंट या बाईपास के बाद लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इंटरनेट पर दी गई आम "सामान्य" वैल्यू पर भरोसा न करें।
3. धीरे-धीरे और देख-रेख में शारीरिक गतिविधियाँ करें। कार्डियक रिहैबिलिटेशन (दिल की बीमारी के बाद ठीक होने की प्रक्रिया) से मरीज़ों को हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी या हार्ट सर्जरी के बाद सुरक्षित रूप से ताकत वापस पाने में मदद मिल सकती है। अपनी मेडिकल टीम की सलाह के अनुसार चलना और व्यायाम करना शुरू करें। बाईपास सर्जरी के बाद, भारी चीजें उठाने, गाड़ी चलाने, घाव की देखभाल और काम पर लौटने के बारे में दिए गए निर्देशों का पालन करें। बिना मंजूरी के अचानक भारी व्यायाम या घर के मुश्किल काम शुरू करने से बचें।
4. रोजाना के खाने में दिल के लिए फायदेमंद चीजें चुनें। सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और प्रोटीन के सही स्रोत चुनें। ज्यादा नमक, मीठे ड्रिंक्स, मिठाइयां, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड व ट्रांस फैट वाली चीजें कम खाएं। डाइबिटीज वाले लोगों के लिए, खाने की मात्रा और कार्बोहाइड्रेट का सेवन मायने रखता है। एक डाइटीशियन घर पर बनने वाले जाने-पहचाने खाने का इस्तेमाल करके एक प्रैक्टिकल प्लान बनाने में मदद कर सकता है।
5. चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दें। सीने में नया या बढ़ता हुआ दबाव, सांस फूलना, ठंडे पसीने आना, बेहोश होना या बिना किसी वजह के बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने को नजरअंदाज न करें। महिलाओं और डाइबिटीज वाले लोगों में लक्षण कम आम हो सकते हैं। अगर ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें, खासकर हार्ट से जुड़ी प्रक्रिया के बाद। अगले अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें। मकसद है लंबे समय तक दिल की सुरक्षा।
दिल की सेहत सिर्फ सर्जरी या किसी एक अच्छे टेस्ट रिजल्ट से सुरक्षित नहीं रहती। यह बीपी, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को लगातार कंट्रोल करने, रेगुलर एक्टिविटी, संतुलित डाइट, तंबाकू से दूर रहने, भरपूर नींद और लगातार मेडिकल फॉलो-अप पर निर्भर करती है। चाहे कोई दिल की बीमारी से बचाव की कोशिश कर रहा हो या किसी बड़े प्रोसीजर के बाद ठीक हो रहा हो, सही इलाज के साथ छोटे-छोटे और लंबे समय तक अपनाए जा सकने वाले बदलाव दिल को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।