घर में रखी चीजें भूल जाना, जाने-पहचाने चेहरों के नाम भूल जाना या फिर कल क्या कपड़े पहने थे – ये भी याद ना रहे तो ? आमतौर पर इसे बुढ़ापे का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है – लेकिन हो सकता है कि ये शरीर में कुछ खास विटामिन की कमी की वजह से हो रहा हो। ये भी हो सकता है कि विटामिन की कमी की भरपाई करते ही भूलने की बीमारी भी कम होने लगे। ICMR- नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की ताजा स्टडी यही बता रही है कि भारतीयों में विटामिन D और B के अलग अलग लेवल कम होने की वजह से दिमाग पर असर पड़ रहा है और याद्दाश्त कमजोर हो रही है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने इस स्थिति को माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट यानी MCI का नाम दिया है। इस हालत में किसी इंसान के याद रखने, तर्क करने और सोचने समझने की क्षमता पर असर पड़ने लगता है। हालांकि वो रोजमर्रा के काम कर सकता है लेकिन अगर ये स्थिति बनी रहे तो आगे चलकर डिमेंशिया यानी याद्दाश्त पर परमानेंट तौर पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
184 भारतीयों पर की गई स्टडी
याद्दाश्त पर की गई इस स्टडी में 184 लोगों को शामिल किया गया। इन लोगों की उम्र 55 से 85 वर्ष के बीच थी। स्टडी में 116 पुरुष और 68 महिलाएं शामिल थी। स्टडी में शामिल सभी लोग हैदराबाद के अलग-अलग जोन से थे। ये सभी लोग किसी मल्टी-विटामिन दवा को नहीं खा रहे थे। स्टडी के लिए रिसर्चरों ने विटामिन A, D, B1, B2, B6, B9 यानी फोलेट और B12 के स्तरों की जांच की। इन लोगों के ब्लड टेस्ट के सैंपल के जरिए विटामिन का स्तर और कुछ दिमागी बायोमार्कर को स्टडी किया गया। स्टडी में शामिल लगभग 37 प्रतिशत लोगों में माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट यानी MCI पाया गया। यानी हर 3 में से एक व्यक्ति को भूल जाने की समस्या थी। इन 37% लोगों में विटामिन D, B1, B2, B6, B9 और B12 का स्तर कम पाया गया। खासतौर पर विटामिन D और B6 का अधिक स्तर बेहतर कॉग्निटिव परफॉर्मेंस से जुड़ा पाया गया। जिन लोगों में विटामिन की कमी थी उनमें से ज्यादातर में डाइबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर भी पाया गया।
इस स्टडी को जुलाई 2026 में इंटरनेशनल जर्नल न्यूट्रिएंट्स में प्रकाशित किया गया है।
भारतीय महिलाओं में ये दो विटामिन हैं कम
भारतीय महिलाओं में विटामिन D और B12 को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। इस स्टडी से पहले ग्रामीण भारत में बुजुर्ग आबादी पर की गई एक बड़ी स्टडी में 1,648 लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें 776 महिलाएं थीं। इस अध्ययन में कुल आबादी में 75.7 प्रतिशत लोगों का vitamin D स्तर 30 ng/ml से कम था और 39.1 प्रतिशत में vitamin D deficiency यानी 20 ng/ml से कम स्तर पाया गया। महिलाओं में स्थिति पुरुषों की तुलना में अधिक चिंताजनक थी। महिलाओं में vitamin D deficiency 47.8 प्रतिशत, जबकि पुरुषों में 29.2 प्रतिशत थी। ये स्टडी एक अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित की गई थी।
विटामिन डी जहां बुजुर्ग आबादी में कम पाया गया, वहीं विटामिन B12 का स्तर तो युवा महिलाओं में ही कम था। दक्षिण भारत में गर्भवती महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में 366 महिलाओं को शामिल किया गया था। इसमें 51.1 प्रतिशत महिलाओं के खून में B12 का स्तर कम पाया गया, जबकि 42.4 प्रतिशत में इंपेयर्डB12 status था।
B12 और folate शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनाने के अलावा नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या विटामिन की गोली लेने से डिमेंशिया रुकेगा
आईसीएमआर - एनआईएन में बायोकेमेस्ट्री के हेड और स्टडी करने वाले मुख्य वैज्ञानिक जी भानुप्रकाश रेड्डी के मुताबिक ये स्टडी यह संकेत देती है कि बेहतर विटामिन का स्तर ठीक हो तो दिमागी सेहत बेहतर रहती है लेकिन अभी ये स्टडी यह साबित नहीं करती कि केवल विटामिन सप्लिमेंट्स लेने से MCI या डिमेंशिया को रोका जा सकता है। इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि विटामिन की कमी को नजरअंदाज न करें, लेकिन बिना जांच के सप्लिमेंट्स की हाई डोज भी न लें।
विटामिन B12 के लिए दूध-दही, पनीर, अंडे और मछली ली जा सकती है जबकि दालें, साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और ड्राई फ्रूट्स से विटामिन बी के दूसरे कई लेवल सुधारे जा सकते हैं। विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए धूप सबसे अच्छा तरीका है। आधे घंटे के लिए हाथों, पैरों और पीठ के हिस्से पर धूप लगनी चाहिए। डाइट में दूध, अंडे और मछली ली जा सकती है। अगर लगातार थकान, कमजोरी या भूल जाने की समस्या आने लगे तो तो पहले ब्लड टेस्ट करवा कर कमी का पता लगाएं। कुछ समय के लिए डॉक्टरों की सलाह से सप्लिमेंट्स लेने से फायदा हो सकता है।