हम सभी हानिकारक केमिकल्स और पेस्टिसाइड्स आदि के नुकसान से वाकिफ हैं। रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजों में मौजूद ये केमिकल्स प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर से हमारे शरीर में जा कर हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिनकी वजह से हमें एलर्जी, इन्फेक्शन आदि का सामना कर पड़ सकता है। अगर हम थोड़ी सी सावधानी बरतें तो इन केमिकल्स के बजाय ऑर्गेनिक चीजों का इस्तेमाल करके खुद काे और अपने परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं।
रूम फ्रेशनर
इसमें वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स, फॉर्मेल्डिहाइड और सिंथेटिक फ्रेगरेंस होती हैं, जिनसे एलर्जी, सांस लेने में दिक्कत और यहां तक की कैंसर तक हो सकता है।
किससे बदलें: नेचुरल विकल्प जैसे कपूर, असेंशियल ऑइल या बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें।
अल्यूमिनियम फॉइल
इसमें गरम खाना पैक करने या खाना गरम करने में इसका इस्तेमाल करने से अल्यूमिनियम के कण खाने में मिल सकते हैं। ये कण न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स दे सकते हैं।
किससे बदलें: खासकर एसिडिक फूड आइटम जैसे टमाटर या नीबू का इसमें प्रयोग ना करें। पार्चमेंट पेपर, कांच के कंटेनर या साफ कपड़े का प्रयोग करें।
मॉस्किटो रिपेलेंट्स
मॉस्किटो रिपेलेंट्स में मौजूद हानिकारक केमिकल्स अस्थमा, साइनस जैसी दिक्कतों को बढ़ा सकते हैं। छोटे बच्चों में चेस्ट कंजेशन को बढ़ावा दे सकते हैं।
किससे बदलें: कपूर, लौंग जैसी प्राकृतिक चीजें मच्छरों को दूर रखती हैं। कपूर को एक पोटली में बांध कर कमरे में टांग सकते हैं। इसके अलावा दीये में लौंग और कपूर का धुआं या गोबर से बनी धूप का धुआं करने से भी मच्छर भाग जाते हैं।
फ्लोर क्लीनर
केमिकल युक्त फ्लोर क्लीनर्स में अमोनिया, फिनायल आदि होते हैं। इनकी गंध से ना सिर्फ बच्चों, बल्कि पालतू जानवरों को भी तकलीफ हो सकती है।
किससे बदलें: बेकिंग सोडा, नीबू का पानी, सेंधा नमक आदि का पोंछा घर में लगाया जा सकता है।
शैंपू, हैंडवॉश और डिओडरेंट
इनमें सल्फेट, लिनालूल, फॉर्मेल्डिहाइड, प्रिजर्वेटिव्स, आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस होती हैं, जो स्किन को इरिटेट कर सकते हैं।
किससे बदलें: शैंपू के बजाय बालों को आंवला, रीठा, शिकाकाई के घोल से धोया जा सकता है। इनसे बालों में वैसा ही इफेक्ट आता है, जैसे शैंपू करने पर आता है। डिओ के बजाय नहाने से पहले अंडरआर्म्स पर नीबू का टुकड़ा मलें। चाहें तो नहाने के पानी में नीबू की कुछ बूंदें भी डाल सकते हैं।