दिमाग में एक के बाद एक विचार ऐसे आते हैं, मानो कड़ाही में पॉपकॉर्न के दाने उछल रहे हों, इसी को कहते हैं पॉपकॉर्न ब्रेन। इस समस्या की वजह कहीं सोशल मीडिया तो नहीं।
क्या है पॉपकॉर्न ब्रेन
जब आप किसी एक विचार या काम में अपना ध्यान एकाग्र ना कर पाते हों तो वह स्थिति पॉपकॉर्न ब्रेन की स्थिति कहलाती है। आप कुछ काम कर रहे हैं और अचानक आपको कुछ याद आता है या फिर आप काम छोड़ कर मोबाइल स्क्रॉल करने लगते हैं।
दिमाग का बदलता पैटर्न
जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया कंटेंट, साउंड और वीडियो की बमबारी से दिमाग ओवरस्टिमुलेशन का शिकार होता है। ऐसे में हमारा दिमाग इस जानकारी को प्रोसेस करने के लिए तेजी से काम करने लगता है और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है।
क्या है नुकसान
ऐसी स्थिति में हमारा ध्यान जल्दी तो भटकता है ही, साथ ही एंग्जाइटी के शिकार भी होने लगते हैं। ऐसे लोग अकेले रहना पसंद करते हैं और बातचीत करने से कतराते हैं। चूंकि सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध होता है तो धैर्य की कमी भी होने लगती है।
क्या है वजह
आपके दिमाग की ध्यान केंद्रित ना कर पाने की क्षमता की सबसे बड़ी वजह है सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल। बार-बार आने वाली नोटिफिकेशंस, स्क्रॉल करने की आदत दिमाग को एडिक्ट बना देती है।
क्या है इलाज
इस स्थिति से बचने के लिए सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम को कम करें। फोन की नोटिफिकेशन साइलेंट करें और मैसेज चेक करने का समय निर्धारित करें। किसी खेल या फिजिकल एक्टिविटी में भाग लें।
