जैसे खाने वालों को खाने का और हंसने वालों को हंसने का बहाना चाहिए, वैसे ही घूमने वालों को घूमने का बहाना चाहिए होता है। कोई जगह बहुत पसंद आयी तो हर दूसरे साल वहां पहुंच जाते हैं या फिर किसी नयी जगह के बारे में सुना तो वहां तो जाना ही जाना है। यह तो हुआ शौकिया टूरिज्म। पर क्या आप जानते हैं कि आजकल योग टूरिज्म का क्रेज लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। शहर की भीड़भाड़, जीवन और काम की आपाधापी ना सिर्फ हमें थका रही है, बल्कि शरीर और मन दोनों को बीमार भी कर रही है। ऐसे में कुछ दिन सुकून से बिताने का दिल करना तो लाजिमी है ही। अब लोगों का रुझान योग और मेडिटेशन की तरफ बढ़ रहा है। योग सीखने के लिए हमारे यहां बड़ी तादाद में विदेशी पर्यटक भी आते हैं, इसीलिए अब कई रिजॉर्ट और आश्रमों में योग के शॉर्ट टर्म कोर्सेज सिखाने के लिए विशेष प्रबंध भी किए जाने लगे हैं।
पिछले कुछ सालों में ऋषिकेश, धर्मशाला, केरल, मैसूर, गोवा जैसी जगहों में खासकर अपनी वेलनेस के इरादे से योग व मेडिटेशन सीखने के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ी है। इसमें भी बड़ी तादाद युवाओं की है। आजकल लगभग सभी रिजाॅर्ट, आश्रम और योग टीचर्स के सोशल मीडिया पर अपने पेज होते हैं, जिनके फॉलोअर्स की संख्या काफी ज्यादा होती है। इन्हीं से जानकारी ले कर ये लोग अपनी मनपसंद जगहों पर जाते हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए योगा एक्सपर्ट और द योगा साइंस के लेखक दिव्यांश ने बताया, ‘‘आजकल लोग सोशल मीडिया पर किसी ना किसी योगा रिट्रीट, टीचर को फाॅलो करके जानकारी प्राप्त करते हैं और फिर उनसे योग सीखने के लिए अलग-अलग जगहों पर जाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी योग में रुचि होती है और वे कोई खास योगासन या योग की कोई खास शैली जैसे अष्टांग योग, हठ योग, विन्यास योग, एरियल योग आदि सीखना चाहते हैं। इनमें दो तरह के पर्यटक होते हैं- एक वे जो प्लान करके योग सीखने आते हैं और दूसरे वे जो बिना किसी प्लानिंग के आते हैं। बिना प्लानिंग के आने वाले पर्यटकों की रुचि कोई खास योगासन सीखने में होती है। मैंने बड़ी संख्या में लोगों को हैंडस्टैंड पोज सीखने के लिए क्लास लेते हुए देखा है। ऐसे लोग अलग-अलग टीचर्स के सोशल मीडिया पेज देख कर व फॉलो करके आते हैं और अपने पूरे टूर के दौरान अलग-अलग टीचर्स से क्लासेज भी लेते हैं। ये क्लाॅसेज ड्राॅप इन क्लासेज कहलाती हैं, जो एक दिन की होती हैं और इनकी फीस 800 रुपए से ले कर 1000 रुपए तक होती है। खासकर ऋषिकेश के कुछ रिजाॅर्ट्स में योग के साथ कीर्तन, आरती, मेडिटेशन की भी व्यवस्था की जाती है। यहां भी बड़ी संख्या में देशी-विदेशी टूरिस्ट इकट्ठा होते हैं। सुबह योग, शाम को कीर्तन, गंगा घाट के किनारे आरती के साथ सात्विक खाना और रहने का इंतजाम इन रिजाॅर्ट्स या आश्रमों में किया जाता है।’’
थ्री स्टार व फाइव स्टार सुविधाएं
अलग-अलग रिजाॅर्ट और आश्रम अपने यहां आने वाले गेस्ट के लिए तरह-तरह के पैकेज बनाते हैं, जिनकी कीमत 8 हजार से शुरू होती है और कोर्स की अवधि और आप अपने स्टे में क्या-क्या शामिल करना चाहते हैं, इसके हिसाब से बढ़ती जाती है। यहां पर योग, मेडिटेशन, आयुर्वेदिक थेरैपी, मड हाउस में स्टे, ऑर्गेनिक फाॅर्मिंग, ट्रेकिंग, लोकल साइटसीइंग, विलेज टूर, कीर्तन क्लबिंग, स्पा जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। हालांकि लगभग सभी हिल स्टेशनों पर आपको कोई ना कोई रिजाॅर्ट ऐसा मिल जाएगा, जहां वेलनेस पैकेज मुहैया करवाया जाता है, लेकिन फिर भी ऋषिकेश और धर्मशाला का नंबर इनमें सबसे पहला आता है। इन डेस्टिनेशंस में जहां पूरे साल भीड़ रहती है और छुट्टियों के दौरान व लाॅन्ग वीकेंड पर बुकिंग ओवर होने तक की नौबत आ जाती है वहीं गोवा में सीजन के मुताबिक ही पर्यटक योग सीखने पहुंचते हैं।
ऋषिकेश व धर्मशाला के बाद केरल, पुणे, कुर्ग, मैसूर में भी योग टूरिज्म का काफी क्रेज है। मैसूर तो अष्टांग योगा का केंद्र ही है। यहां हर क्लास में लगभग 150 लोग सीखने आते हैं और भारतीयों के मुकाबले ज्यादा संख्या विदेशी पर्यटकों की होती है। ये सारे डेस्टिनेशंस वैसे भी लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शुमार हैं, इसलिए यहां घूमने-फिरने के कई ठिकाने मौजूद हैं।
यही खूबी पर्यटकों को इनकी तरफ आकर्षित करती है। ऋषिकेश के शिवा योगा पीठ के फाउंडर स्वामी सुधीर जी का कहना है, ‘‘हमारे यहां अलग-अलग अवधि के कोर्सेज मौजूद हैं, जिन्हें सीख कर कोई भी योगा टीचर बना सकता है। यहां पर 4 दिन से ले कर 7 दिनों के कोर्सेज भी मौजूूद हैं, जिनके लिए हमारे पास पैकेज मौजूद हैं।’’
ये हैं रिफ्रेश सेंटर
धर्मशाला के ओम योग आश्रम के योग गुरु स्वामी रशपाल जी का कहना है, ‘‘पिछले कुछ सालों में ऐसे लोागों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है, जो सिर्फ कुछ दिनों के लिए रिलैक्स करने हमारे यहां आते हैं, वे योग सीखते हैं, मेडिटेशन करते हैं और रिफ्रेश हो कर वापस जाते हैं। ऐसे लोगों के लिए हमारे आश्रम में विशेष रूप से एक सप्ताह के पैकेज हैं। इनमें शामिल हैं शांत वातावरण में योग, मेडिटेशन, रेकी, साउंड हीलिंग, कीर्तन, आरती आदि। इसके अलावा एक दिन ट्रेकिंग के लिए रखा जाता है और लोकल साइटसीइंग भी करवायी जाती है। इस पैकेज में इन सब सुविधाओं के अलावा रहना और खाना भी शामिल है। एक सप्ताह बाद पर्यटक नयी उर्जा के साथ अपने तनाव से छुटकारा पा कर घर लौटते हैं।’’
स्पष्ट है आजकल के बढ़ते तनाव और भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल से थोड़ी राहत पाने के लिए लोग सिर्फ घूमने-फिरने से ही संतुष्ट नहीं हो रहे हैं। वे एक ऐसा अनुभव चाहते हैं, जो उनके जीवन को नए मायने दे, कुछ अलग हट कर हो और उन्हें मानसिक रूप से राहत दे। आम पर्यटन में जहां लोग दिन भर घूमते-फिरते और मौज-मस्ती करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें आराम करने का मौका नहीं मिल पाता है। इसका नतीजा तो कई बार यह भी होता है कि वे छुट्टी से और ज्यादा थक कर वापस आते हैं। वहीं योग टूरिज्म का फायदा यह है कि इसमें भागदौड़ शामिल नहीं है। यह अपने अंदर झांकने और खुद से जुड़ने का मौका देते है। यहां पर थ्रिल नहीं, ठहराव है।