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देसी घी खाने से जी ना चुराएं, पर कितना और कैसे खाएं कि देसी घी की पूरी पौष्टिकता का लाभ उठा सकें। तरु अग्रवाल कंसल्टेंट डाइटीशियन से घी पर कुछ सवाल-जवाब।

घी को डाइट में शामिल करने के क्या-क्या लाभ हैं?

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देसी घी डाइट में शामिल करने से स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचता है। सरदियों में शरीर को गरम रखने के लिए देसी घी को अपने खानपान का जरूरी हिस्सा बनाएं। देसी घी हर उम्र के लिए जरूरी है। यह हमारे शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता और मजबूती देता है।

क्या देसी घी सुपर फूड है?

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इसे हम सुपर फूड मान सकते हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लामेट्री गुण भी मौजूद होते हैं। कई तरह के विटामिन होने की वजह से यह काफी फायदेमंद होता है। यह डाइजेशन को भी सही रखता है। आंतों में कई तरह के एसिड का स्राव होता है। देसी घी खाने से आंतें स्वस्थ रहती हैं, जिससे पाचन क्रिया सही रहती है। वेट मैनेजमेंट में भी घी मददगार होता है।

गाय के दूध से बना घी या भैंस के दूध का घी, कौन सा घी बेहतर होता है? कितनी मात्रा में देसी घी लेना चाहिए?

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भैंस के दूध से बने घी की तुलना में गाय के दूध का घी ज्यादा पौष्टिक होता है। देसी घी को लेने की मात्रा अलग-अलग होती है। युवा दिन भर में 3-4 छोटे चम्मच देसी घी ले सकते हैं। छोटे बच्चे 2 छोटे चम्मच देसी घी ले सकते हैं। किशोर 3 छोटे चम्मच ले सकते हैं। बुजुर्ग डाइजेशन की स्थिति देखते हुए कभीकभार 2 छोटे चम्मच डाइट में शामिल कर सकते हैं।

घी को खाने का सही तरीका क्या होना चाहिए? घी खरीदते समय क्या ध्यान रखें?

घी को सही तरीके से खाएं तो ही इसके ज्यादा फायदे मिल पाएंगे। घी को तलने के लिए या डीप फ्राई करने के लिए इस्तेमाल ना करें। बेहतर होगा कि घी को दाल, सब्जी या कोई भी व्यंजन बनाने के बाद ऊपर से डाल कर खाएं। भरवां रोटी तंदूर में सेंकें और देसी घी से ब्रश करके परोसें। देसी घी खरीदते समय पैकेजिंग पर जरूर गौर करें। नो एडेड प्रिजर्वेटिव, नो एडेड कलर जैसी बातों का जिक्र हो। देसी घी का ब्रांड एफडीए से अप्रूव हो, इस बात कर जरूर ध्यान रखें। देसी घी कहां का है, यानी प्रोडक्ट कहां से सोर्स किया गया है, ऐसी बातों पर भी ध्यान दें। कलर, महक और स्वाद भी देखें।

क्या डाइबिटीज के मरीज भी देसी घी ले सकते हैं? उन्हें देसी घी कितनी मात्रा में लेनी चाहिए और वे घी लेते समय किन बातों का खयाल रखें।

डाइबिटीज के मरीज भी देसी घी ले सकते हैं, लेकिन वे मात्रा का ध्यान रखें। कम मात्रा में लें तो बेफिक्र हो कर इसे डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसमें शर्करा की मात्रा कम होने की वजह से यह ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता है। पर घी लेते समय कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का ध्यान रखें। घी से डाइबिटिक पेशेंट का मेटाबॉलिज्म भी संतुलित रहता है।

क्या घी के इस्तेमाल से बोन हेल्थ और जॉइंट्स सही रहते हैं?

घी में विटामिन डी और विटामिन ए व ई मौजूद होते हैं। ज्यादातर लोगों की शिकायत होती है कि कैल्शियम सप्लीमेंट्स लेने के बावजूद हडि्यों पर अच्छा असर नहीं दिखता। दरअसल लोग कैल्शियम तो लेते हैं, पर वह शरीर में एब्जॉर्ब नहीं हो पाता। कैल्शियम सही कॉम्बिनेशन के साथ खाएं। जैसे आयरन वाली चीजों के साथ चाय-कॉफी ना लें। बैलेंस डाइट लें। इसमें घी भी शमिल करें। इसमें विटामिन ए, बी सी, डी और के होते हैं। 

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