अक्षय का फिल्मी कैरिअर 35 साल का है। 1991 में अक्षय अभिनीत राज सिप्पी द्वारा निर्देशित पहली फिल्म सौगंध रिलीज हुई, लेकिन उससे पहले भी उनका संघर्ष जारी था। दिल्ली के रहने वाले एक पंजाबी लड़के अक्षय ने बैंकॉक में शेफ बनने का इरादा छोड़ दिया, क्योंकि वहां उनके दोस्तों ने उनसे कहा था, ‘‘तुम फिल्मों के हीरो लगते हो।’’ ऐसी तारीफ सुन कर अक्षय ने दिल्ली से मुंबई की ट्रेन पकड़ी और मुंबई में अभिनय से संबंधित काम की तलाश शुरू कर दी। उन्होंने मशहूर फोटोग्राफर जयेश सेठ के स्टूडियो में सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। फोटोशूट के दौरान अक्षय कैमरे और उपकरण उठाते और उन्हें व्यवस्थित भी रखते थे। अंधेरी लोखंडवाला स्थित जयेश सेठ के स्टूडियो में 18 महीने तक मामूली वेतन पर काम करने के बाद जयेश सेठ ने अक्षय का आखिरकार मुफ्त में फोटोशूट करवाया और तसवीरें विभिन्न पत्रिकाओं और निर्माताओं को भेजी गयीं। इन तसवीरों को मशहूर निर्माता और निर्देशक प्रमोद चक्रवर्ती ने देखा और उन्हें दीदार के लिए चुन लिया गया। लेकिन यह फिल्म समय पर शुरू नहीं हो सकी और सौगंध पहले रिलीज हो गयी। अक्षय की कई फिल्में फ्लॉप रहीं, लेकिन वीनस म्यूजिक कंपनी द्वारा निर्मित फिल्म खिलाड़ी की सफलता के साथ अक्षय कुमार को उनका मशहूर उपनाम खिलाड़ी कुमार मिला और 9 फ्लॉप फिल्मों के बाद उन्हें स्टारडम भी हासिल हुआ !
फिरोज नाडियाडवाला द्वारा निर्मित और अहमद खान द्वारा निर्देशित उनकी फिल्म वेलकम टू जंगल 26 जून को रिलीज हो गयी है। इस फिल्म के अवसर पर अक्की (फिल्म इंडस्ट्री में उनका प्यारा नाम) के साथ हुई यह ताजा बातचीत यहां प्रस्तुत है-
प्रश्न : वेलकम फ्रैंचाइज के तीसरे भाग - वेलकम टू जंगल - के बारे में आप क्या कहेंगे? आप वेलकम अगेन (भाग 2) में नहीं थे... इसका क्या कारण है?
उत्तर : उस फिल्म वेलकम के बारे में बात कीजिए, जिसमें मैंने काम किया था। अब उस फिल्म के बारे में क्यों बात करूं, जिसमें मैं था ही नहीं? मेरे पास उस समय डेट्स उपलब्ध नहीं थीं, वरना मैं वेलकम जैसी कॉमेडी फिल्म करने का मौका क्यों छोड़ता? वेलकम टू जंगल एक विशुद्ध पारिवारिक मनोरंजन फिल्म है, जिसमें 34 महत्वपूर्ण कलाकार हैं। कॉमेडी के लिए इतने सारे कलाकारों की जरूरत थी और सभी ने दिल से काम किया है। इस लिहाज से यह एक बड़ा रेकॉर्ड है। निर्देशक अहमद खान, जो पहले बाल कलाकार (मिस्टर इंडिया) भी रह चुके हैं, बाद में कोरियोग्राफर बने और हाल ही में निर्देशक बने हैं। अहमद ने 34 से अधिक कलाकारों को एक साथ काम करने के लिए राजी किया, यह उनके और हमारे लिए गर्व का क्षण था। मेरा किरदार एक फ्लॉप एक्टर का है, जो भोजपुरी बोलता है। मुझे इस भाषा में बोलने का थोड़ा अभ्यास करना पड़ा। राजपाल यादव और जॉनी लीवर, दोनों कॉमेडी के बादशाह, इस फिल्म में हैं, यह कॉमेडी का एक और बड़ा पहलू है।
प्रश्न : अगर आप हर तरह की भूमिकाएं निभाते हैं, तो आपकी पसंदीदा शैली कौन सी है?
उत्तर : पिछले 34-35 सालों में मैंने कई तरह के किरदार निभाए हैं, प्रेमी, देशभक्ति, स्वतंत्रता सेनानी, कॉमेडी, धोखेबाज, एक्शन, पारिवारिक। जब मैं इंडस्ट्री में नया था, तो मुझे सिर्फ एक्शन रोल ही मिलते थे... बाद में मैंने अलग-अलग तरह के किरदार करने का फैसला किया, लेकिन मुझे यकीन नहीं था कि फिल्म निर्माता मुझे चुनेंगे। धीरे-धीरे मैं जम गया। कॉमेडी करना आसान नहीं है, लेकिन मेरी कॉमेडी सबको पसंद आती है। जॉनी भाई, फरीदा जलाल, राजपाल यादव मेरे पसंदीदा कॉमेडी कलाकार हैं इस फिल्म में। मैंने सबसे थोड़ी-थोड़ी कॉमेडी सीखी है।
प्रश्न : आपके कैरिअर की शुरुआत को 35 साल हो चुके हैं। क्या आप जैसे वरिष्ठ कलाकार के लिए मल्टी-स्टारर फिल्म करना सही है?
उत्तर : कुछ समय से हर शुक्रवार को कोई ना कोई हीरो हफ्ते का स्टार बन जाता है। एक साल में 3-4 फिल्में सुपर हिट होती हैं, 2-3 हिट होती हैं और 1-2 फिल्में साधारण हिट होती हैं। आज तक किसी को भी यह पता नहीं चल पाया है कि दर्शकों को कौन सी फिल्म पसंद आएगी। फिल्म वेलकम के पहले दो भाग हिट हुए थे, इसलिए मुझे पूरा यकीन है कि वेलकम टू जंगल भी पसंद आएगी। इस फिल्म को मसाला फिल्म बनाने के लिए मल्टी-स्टारर बनाया गया है। मुझे खुद सभी तरह की फिल्में करना पसंद है, चाहे वो मल्टी-स्टारर हों या सोलो हीरो वाली। दर्शकों को भी एक ही स्क्रीन पर कई सितारों को देखना अच्छा लगता है। एक साथ कई सितारों के साथ काम करने के लिए आत्मविश्वास भी जरूरी है, जो मुझमें है।
प्रश्न : क्या आप पिछले 35 वर्षों में हुई अपनी प्रगति से संतुष्ट हैं? कभी बोर नहीं हुए लगातार काम करते हुए? कभी रिटायर होने का खयाल नहीं मन में आया?
उत्तर : मैं एक ऐसा कलाकार हूं, जिसने शून्य से शुरुआत की। मुंबई में मेरा कोई नहीं था, मेरा कोई अपना नहीं था... लेकिन इस शहर की यह खासियत है कि यहां हर किसी को अपनापन महसूस होता है। मैं एक वरिष्ठ फोटोग्राफर के यहां बिना वेतन के सहायक के तौर पर काम करने लगा। मुझसे सहानुभूति जताते हुए उन्होंने मेरा फोटोशूट किया, तसवीरें कुछ निर्माताओं को पसंद आयीं, उन्होंने मुझे चुन लिया... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई ! मेरी फिल्में फ्लॉप हो गयीं, पर फिल्म खिलाड़ी हिट होने से मेरा रास्ता बन गया। मैं हार नहीं मानता, यही मेरी खूबी है। मैं 35 साल तक टिका रहा... शायद आगे भी बढ़ता रहूंगा... रिटायर होने का मन नहीं बनता, सुबह उठने का दिल जब नहीं करता तो यह खयाल आता है कि मेरे फिल्म के सेट पर मेरा इंतजार करने वाले 200-300 लोग हैं, जिसमें निर्माता-निर्देशक, को-एक्टर और प्रोडक्शन स्टाफ होता है। शूटिंग होती है तो सभी का घर चलता है। उन सभी का विचार मुझे सुबह उठने पर मजबूर कर देता है और रिटायर होने का विचार कहीं दूर भाग जाता है !
प्रश्न : आपकी फिटनेस हमेशा चर्चा का विषय रहती है, आप फिटनेस के लिए क्या करते हैं?
उत्तर : फिटनेस के लिए सबसे जरूरी चीज है अनुशासन। अपने 58 साल के जीवन में मैंने कभी सूर्योदय देखना नहीं छोड़ा। मैं सुबह 5 बजे उठता हूं और कई तरह के व्यायाम करता हूं। इनमें सूर्य नमस्कार से ले कर पुश अप्स, वेट ट्रेनिंग, कार्डियो, तैराकी, टेनिस और बैडमिंटन जैसे कई खेल शामिल हैं। मुझे एक ही तरह का व्यायाम करना पसंद नहीं है। मैं हमेशा सकारात्मक सोचता हूं। और मुझे निराशावादी लोग पसंद नहीं हैं। मैंने कम से कम 20 सालों से तैलीय भोजन नहीं खाया है। मैं शाम 7 बजे खाना खाता हूं और खाने के बाद अपने परिवार, खासकर बच्चों के साथ खेलता और बातें करता हूं। यह मेरी सरल फिटनेस है।