ब्रांड्स की कॉपी और फर्स्ट कॉपी मार्केट में अकसर आ जाती है। अगर आप ब्रांडेड चीजें इस्तेमाल करना पसंद करती हैं तो यह समझना जरूरी है कि कौन सा प्रोडक्ट असली है और कौन कॉपी है। बैग्स के साथ अकसर ऐसा होता है। लोगो की इमिटेशन अच्छी होने से कई स्ट्रीट शॉप्स हर तरह के बड़े ब्रांड के बैग्स की कॉपी रखते हैं। सही पहचान ना होने पर आप ठगे जा सकते हैं। फैशन एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कैसे पहचानें ओरिजनल बैग।
देखें अलाइनमेंट : बड़े ब्रांड्स हमेशा डिजाइन और किसी भी तरह के पैटर्न की अलाइनमेंट का बहुत ध्यान रखते हैं। बैग पर बने किसी भी तरह के पैटर्न की हर एक लाइन, शेप्स या स्टिच मार्क आपस में अलाइन करते हैं। लग्जरी बैग्स में क्विल्टिंग का इस्तेमाल होता है। सामने के फ्लैप और बैक पॉकेट पर क्विल्टिंग सेंटर में होनी चाहिए। पैटर्न ना मैच करे या सेंटर में ना हो तो बैग कॉपी या फेक ही है।
हार्डवेअर मटीरियल : बैग को खोलते और बंद करते समय जिपर की क्वाॅलिटी फील होती है और सुनायी भी देती है। ज्यादातर फेक बैग्स में चीप क्वाॅलिटी का मटीरियल इस्तेमाल किया जाता है। यह आप जिप से पता कर सकती हैं, जो छूने में हल्की लगेगी और बैग खोलने और बंद करने पर आवाज भी तेज आएगी। लग्जरी ब्रांड्स फिलिप हेड के बजाय फ्लैटहेड स्क्रू का इस्तेमाल करते हैं ।
स्मेल से लेदर पहचानें : बैग्स के लेदर को महक से पहचाना जा सकता है, लेकिन बैग में से लेदर की महक तेज आने पर समझें कि वह नकली है।
टच करें फैब्रिक : फेक बैग्स में चीप क्वाॅलिटी का मटीरियल इस्तेमाल किया जाता है, जो देखने में ब्रांड जैसा होता है, लेकिन छूने से पता लग जाता है। चीप फैब्रिक के कारण फेक बैग्स का वजन भी ओरिजिनल बैग से हल्का होता है।
ऑब्जर्व करें लोगो : फेक प्रोडक्ट्स बनाने वाले बड़े ब्रांड्स के लोगो को अच्छी तरह कॉपी कर लेते हैं, लेकिन आप फिर भी पहचान सकती हैं। ब्रांड्स अपने हर एक बैग पर ध्यान देते हैं और मास प्रोडक्शन नहीं करते, इसलिए उन में डिटेलिंग होती हैं। कॉपी किए गए बैग्स बल्क में बनाए जाते हैं, जिससे क्वाॅलिटी खराब हो जाती है। लोगो में इस्तेमाल होने वाला मेटल चीप होता है, जिस पर लगाया हुआ पेंट जल्दी ही हटने लगता है। सीम के आसपास से धागे निकलने लगते हैं और जिप के पास भी कई धागे निकल आते हैं।
