प्री-मेनोपॉज के समय हारमोन्स बहुत तेजी से बदलते हैं, जो स्किन हेल्थ पर असर करते हैं, जिससे ड्राईनेस, स्किन का डल होना और पिगमेंटेशन शुरू हो सकती है। 40 की उम्र के बाद अचानाक ग्लो कम होने लगता है। स्किन में अनचाही इरिटेशन हो सकती है और कई बार हाइड्रेट करने के बाद भी ड्राईनेस महसूस होती है। यह सब मेनोपॉज की निशानी है। हारमोन के ऊपर-नीचे होने की वजह से स्किन बैरिअर कमजोर हो सकता है और हाइड्रेशन पूरी तरह से नहीं हो पाती है। कई बार पुराने स्किन केअर रूटीन काम करना बंद कर देते हैं। एक्सफोलिएशन के कारण स्किन और ज्यादा कमजोर हो सकती है, पील करने वाले केमिकल मास्क स्किन की सेंसिटिविटी बढ़ा सकते हैं। नए प्रोडक्ट्स और किसी तरह के एक्सपेरिमेंट स्किन झेल नहीं पाती है।
बदलें पुराना स्किन केअर रूटीन
प्री-मेनोपॉज से 7 साल पहले ही लक्षण दिखने लगते हैं जैसे ड्राईनेस, स्किन में खारिश और मसल लॉस के कारण लूज स्किन। अगर स्किन या स्कैल्प ऑइली है तो वह ड्राई होने लगता है, जिसके लिए माइल्ड हेअर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करना शुरू करें। स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए हेवी क्रीम इस्तेमाल ना करें, ये सिर्फ स्किन के पोर्स को क्लॉग कर देते हैं। हायल्यूरॉनिक एसिड वाली क्रीम में इन्वेस्ट करें, जो स्किन को डीप मॉइस्चराइजेशन देगी और स्किन के पोर्स को भी बंद नहीं करेगी। दिन में 2 बार मॉइस्चराइज जरूर करें, इसके लिए गीली स्किन पर मॉइस्चराइजर या कोकोनट ऑइल लगाएं। स्किन में इस्ट्रोजन कम होने के कारण कोलेजन भी कम हो जाता है, जिससे स्किन लूज हो जाती है और ड्राई भी। अगर आप स्किन एक्सफोलिएट करना चाहें तो स्किन को हार्श स्क्रब से एक्सफोलिएट ना करें मेनोपॉज के बाद स्किन सेंसिटिव हो जाती है। ऐसे स्क्रब चुनें, जिनमें लैक्टिक एसिड और पीएचए हो, जो बैलेंस्ड तरीके से स्किन के पोर्स क्लीन करेंगे और स्किन बैरिअर डैमेज भी नहीं होगा। इस समय स्किन पर नए प्रोडक्ट्स ट्राई ना करें। सबसे जरूरी है एक्सेप्टेंस, अपनी स्किन को अपनाएं। कोलेजन बूस्टर्स से ज्यादा जरूरी है डाइट बदलना। एंटी ऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ाएं, नींद पूरी लें और योगा और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें, जो मसल लॉस से स्किन को ढीली होने से बचाएगा। ब्यूटी का ध्यान अंदर से रखना शुरू करें, ट्रीटमेंट्स पर निर्भर ना रहें।