जब कपल्स में हो इनकम गैप
Research reveals that 23% of women in metro cities perceive a salary gap compared to men, contributing to relationship stress, shame, and insecurity due to financial inequality. Open communication, joint financial planning, and mindful budgeting are crucial for couples to address these disparities and build a more equitable partnership.
Research reveals that 23% of women in metro cities perceive a salary gap compared to men, contributing to relationship stress, shame, and insecurity due to financial inequality. Open communication, joint financial planning, and mindful budgeting are crucial for couples to address these disparities and build a more equitable partnership.
Research reveals that 23% of women in metro cities perceive a salary gap compared to men, contributing to relationship stress, shame, and insecurity due to financial inequality. Open communication, joint financial planning, and mindful budgeting are crucial for couples to address these disparities and build a more equitable partnership.
साल 2024 मार्च में हुई रिसर्च के मुताबिक मेट्रो सिटीज में नौकरी करने वाली 23% महिलाओं ने महसूस किया है कि उन्हें पुरुषों के मुकाबले कम सैलरी दी जाती है। कपल्स में जब कोई एक घर का खर्चा चलाता है तो कई बार दूसरे व्यक्ति को आर्थिक असमानता के कारण शर्म या संकोच महसूस हो सकता है। यह असुरक्षा का भाव दोनों के बीच तनाव पैदा कर सकता है। आर्थिक असमानता के कारण वर्चस्व की लड़ाई, अपने खर्च पार्टनर से छुपाना या अपनी सैलरी को ले कर शर्म महसूस करने जैसी कई भावनाएं कम कमाने वाले पार्टनर के मन में आ सकती हैं।
रिलेशनशिप काउंसलर डॉ. दीपाली बत्रा बता रही हैं कि घर में इस आर्थिक असमानता का सामना कैसे करें-
कपल्स के बीच तनाव का एक मुख्य कारण पैसा है। बहुत से कपल्स सैलरी गैप जैसे सेंसेटिव मुद्दे को समझ नहीं पाते हैं और यह उनके रिश्ते में तनाव का कारण बन जाता है। जबकि शादी तय होते समय ही सैलरी और खर्चों के बारे में सही तरीके से बातचीत कर लेनी चाहिए। हालांकि यह सेंसेटिव मुद्दा है तो लोग इस पर बात करना पसंद नहीं करते, जिसकी वजह से शादी के बाद उनका रिश्ता कई परेशानियों से गुजरता है। हर व्यक्ति की फाइनेंशियल पर्सनेलिटी होती है। कोई एक सेवर होता है तो दूसरा स्पेंडर यानी किसी को खर्चा करने की आदत होती है और किसी को पैसे बचाना पसंद होता है। एक-दूसरे से खुल कर बात करने से फाइनेंस से जुड़ी छोटी-बड़ी आदतें पता चलती हैं और उस हिसाब से कपल अपने खर्चे और सेविंग करने के तरीके आपसी सहमति से तय कर सकते हैं।
आर्थिक असमानता होने पर इन बातों का जरूर ध्यान रखें-
खुल कर बात करें : अपनी भावनाएं खुल कर अपने पार्टनर से शेअर करें। किसी तरह की असुरक्षा या शर्म का खयाल आने पर पार्टनर से बात करें। अपने मन में आए किसी भी विचार को ही सच ना मानें, बल्कि सामने वाले की राय भी उस पर जरूर लें। अपनी स्पेंडिंग हैबिट्स या अपने सेविंग प्लान पार्टनर से जरूर शेअर करें। घर से जुड़े खर्चे भी आपस में प्लान करें।
भाषा का ध्यान रखें : अपने पार्टनर से पैसों या इनकम से जुड़ी बातों पर सोच-समझ कर ही चर्चा करें। किसी भी विवाद के दौरान आर्थिक असमानता से जुड़ी बात पर मेरा, तुम्हारा पैसा जैसे शब्दों का इस्तेमाल ना करें। इस तरह के शब्द पार्टनर के मन में आर्थिक असमानता से जुड़ी शर्म और असुरक्षा को जन्म दे सकते हैं।
फैसले अकेले ना करें : कोई भी चीज खरीदने या इन्वेस्टमेंट का फैसला अकेले ना करें, इससे आपके पार्टनर को बुरा लग सकता है। पार्टनर को अपने फैसलों में जरूर शामिल करें। बच्चों को भी इस बात का अहसास ना होने दें कि दोनों में से स्पेंडिंग पावर किस के पास है। मिल कर एक फैसला लें। छोटे खर्चों में भी अपनी सैलरी का रौब जताते हुए अकेले प्लान ना बनाएं।
एक नतीजे पर पहुचें : दोनों में से अगर एक स्पेंडर है और दूसरा सेवर, तो बजट बनाते समय दोनों अपनी बात रखें और इस तरह से बजट बनाएं कि दोनों को समानता महसूस हो।
माइंडफुल रहें : आर्थिक असमानता बहुत सेंसेटिव मुद्दा है, इसलिए पार्टनर के प्रति सहानुभूति रखें, अपनी बातों से उन्हें कमतर ना महसूस होने दें, उन्हें हमेशा बराबर महसूस कराने का प्रयास करें।
फाइनेंस मैनेजमेंट के कुछ टिप्स
इवैल्युएट : खर्च और इनकम एक साथ प्लान करें। दोनों की सेविंग और स्पेंडिंग की आदतों को ध्यान में रखते हुए बजट, इन्वेस्टमेंट और खर्चे प्लान करें।
जॉइंट बजट : पार्टनर और अपनी इनकम में से एक तय राशि जाॅइंट अकांउट में डालें। इससे पार्टनर को बराबरी का अहसास बना रहेगा। साथ ही लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट भी मिल कर प्लान करें।
ट्रेवल बजट : साल में जितने भी ट्रिप आप लेना चाहें, उसके लिए पहले से बजट बना कर रखें, इससे आने वाले खर्चों से पार्टनर को इनसिक्योरिटी नहीं होगी।
पॉकेट मनी : अगर पार्टनर ने जॉब से ब्रेक लिया है या वह नौकरी ना करने का फैसला लेते हैं तो आप उनके लिए पॉकेट मनी बना लें, जिसे हर महीने उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दें। इस पॉकेट मनी का हिसाब उनसे ना लें। ऐसा करने से उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता का अहसास होगा।
स्मार्ट सेविंग : दोनों खुल कर बात करें। दोनों पार्टनर कमा रहें हैं तो गैप पर ध्यान दे कर नेगेटिव भावनाओं की जगह स्मार्ट सेविंग के बारे में सोचें और अपनी जॉइंट इनकम का फायदा उठा कर इन्वेस्ट करें। इस तरह अपनी फाइनेंशियल ग्रोथ को डबल करें।