स्क्रीन एडिक्शन पर लगाम कसना जरूरी
Screen addiction negatively impacts physical health, mental well-being, and daily productivity, but it can be effectively managed by tracking device usage, setting strict boundaries, and embracing offline hobbies.
Screen addiction negatively impacts physical health, mental well-being, and daily productivity, but it can be effectively managed by tracking device usage, setting strict boundaries, and embracing offline hobbies.
Screen addiction negatively impacts physical health, mental well-being, and daily productivity, but it can be effectively managed by tracking device usage, setting strict boundaries, and embracing offline hobbies.
कोई भी आदत नियंत्रण से बाहर हो जाए और व्यक्ति को उसके नुकसान झेलने पड़ें तो यह लत कही जाएगी। इन दिनों स्क्रीन की लत से कई लोगों की भूख, नींद, शारीरिक-मानसिक सेहत के अलावा पारिवारिक-सामाजिक व व्यावसायिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली में साइकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. ज्योति मिश्रा कहती हैं, गैजेट्स और डिवाइसेज पर निर्भरता से कई समस्याएं हो रही हैं-
क्या हैं नुकसान
1. लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहने से आंखों में जलन, सूखापन व सिर दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। घंटों एक पोजिशन में बैठने से गरदन, उंगलियों में सुन्नपन व पीठ दर्द की समस्या होती है।
2. सोशल मीडिया पर ज्यादा रहने से लोग अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं। इससे तनाव, चिंता व आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। एंग्जाइटी, सोशल आइसोलेशन और डिप्रेशन के लक्षण पनपने लगते हैं।
3. देर रात तक फोन चलाने से नींद पूरी नहीं होती और थकान रहती है।
4. एकाग्रता कम होती है, पढ़ाई व दिनचर्या बाधित होती है।
5. स्क्रीन ऑफ होने पर खालीपन, क्रोध या नकारात्मक भावनाएं पनपने लगती हैं। व्यक्ति दोबारा स्क्रीन ऑन करने की कोशिश करता है।
6. नींद का टाइम होने के बावजूद स्क्रॉलिंग से नहीं बच पाते।
7. झूठ बोलने की आदत पड़ती है। स्क्रीन पर टाइम अधिक बिताने के कारण काम पेंडिंग रहते हैं, जिनके लिए बहाने बनाए जाते हैं।
कैसे छूटे लत
1. स्मार्टफोन्स में स्क्रीन टाइम ट्रैक करने का फीचर होता है, इसे डिवाइस में इनेबल रखें, ताकि स्क्रीन के साथ बिताया टाइम पता चल सके।
2. दिन भर में कुछ घंटे बिना फोन के रहें। सुबह उठने के एक घंटे बाद तक व सोने से 2 घंटे पहले फोन को साइलेंट मोड में रखें। इस दौरान वॉक, व्यायाम, रीडिंग या पेंटिंग जैसे शौकिया कार्य करें।
3. हर 30-40 मिनट में कुछ मिनट ब्रेक लें और आंखों को आराम दें।
4. टेक-फ्री जोन बनाएं। बेडरूम या ऑफिस में कुछ देर फोन ना छुएं।
5. स्क्रीन टाइम को ऑफलाइन हॉबीज से रिप्लेस करें। टाइम घटाने से पहले अपने नर्वस सिस्टम को शांत रखें। ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
6. स्क्रीन में सबसे ज्यादा यूज किए गए एप्स को लास्ट पेज में मूव करें। एप्स से लॉगआउट करें, ताकि हर बार खोलने के लिए पासवर्ड टाइप करना पड़े। कभी-कभी यूज होने वाले एप्स को डिवाइस से डिलीट या अनइंस्टॉल कर लें।
भावनाएं ऐसे करें कंट्रोल
बोर हैं : मूवमेंट की जरूरत है।
ट्राई करें : म्यूजिक की बीट्स पर डांस, स्ट्रेचिंग, वॉकिंग या अपनी जगह से हटना।
अकेले हैं : कनेक्शन की जरूरत।
ट्राई करें : एक फोन किसी दोस्त को, फिजिकल टच, आई कॉन्टैक्ट और फैमिली मेंबर्स से बातचीत।
स्टक हैं : रिलीज की जरूरत है।
ट्राई करें : भावनाओं की जर्नलिंग, मुंह पर पानी के छींटे मारें, गुनगुनाएं, खुद को हिलाते-डुलाते रहें यानी फिजिकल गतिविधियां करें।
थके हुए हैं : आराम की जरूरत है।
ट्राई करें : सीधे लेटें, आई मास्क लगा कर सो जाएं, कुछ देर अकेले बैठें या बाहर निकल जाएं।