प्रियंका चोपड़ा अब खुद एक बच्ची की मां बन चुकी हैं। पापा की लाड़ली प्रियंका मां को अपनी पूरी दुनिया मानती हैं।

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प्रश्नः इन दिनों मदर्स डे की खासी धूम रहती है। क्या आप भी मनाती हैं यह दिन ?

उत्तरः पहले तो यह वेस्टर्न कंट्रीज की परंपरा थी, वहीं से अपने देश में भी आ गयी। सच कहूं तो मां के लिए तो हर दिन मदर्स डे होना चाहिए। मैं जब से खुद मां बनी, अपनी मां की अहमियत समझने लगी। बच्चे का पहली बार मुस्कराना, उसकी खुशी, दर्द, तड़प, उसकी सफलता, बेचैनी, अकेलापन जैसी हर भावना को मां ही बेहतर समझ पाती है। मां तो बिना चेहरा देखे, फोन पर आवाज सुन कर ही बच्चों का मूड भांप जाती है। डॉ. मधु चोपड़ा यानी मेरी मां मेरे लिए पूरी दुनिया हैं, मेरी जान हैं। मेरा कैरिअर आज जिस मुकाम पर है, मेरी मां की कोशिशों का ही परिणाम है। मैं जब यूएस पढ़ने गयी तो रेसिस्ट कमेंट्स से बहुत अपसेट हुई, वहां मैं बहुत अकेली पड़ गयी थी। मैंने खुद को सबसे अलग-थलग कर लिया था लेकिन मां ने मुझे कुछ इस तरह समझाया कि मैं आगे बढ़ी और सारी चुनौतियों का सामना कर सकी। जिस देश में बचपन में इतनी अकेली थी, वहीं शादी के बाद सेटल हो चुकी हूं तो ये मेरी मां की ही कोशिशें हैं। पहले मुंबई में हम लोग मदर्स डे पर छोटा सेलिब्रेशन करते थे। अब यूएस में हूं तो हमेशा मां के साथ नहीं रह पाती। कभी मां मेरे साथ होती हैं तो कभी मुंबई में भाई सिड के साथ।

प्रश्नः आप तो पापा की भी लाड़ली रही हैं?

उत्तरः पूछिए मत ! चोपड़ा परिवार में मैं सबसे बड़ी हूं। मुझे बहुत प्यार व नाजों से पाला गया है। 2013 में पापा की डेथ के समय मैं फिल्मों में हाथ-पैर मारते हुए धीरे-धीरे सेटल हो रही थी। तब 30 की भी नहीं थी। मेरी कलाई पर टैटू है- पापाज लिटिल डॉटर... किस्मत देखिए, पापा आर्मी में डॉक्टर रहे और कैंसर से उनकी मौत हुई। यह अफसोस ताउम्र मेरे साथ रहेगा।

प्रश्नः आप एक कैरिअर वुमन हैं, ऐसे में बेटी मालती की परवरिश कैसे कर पाती हैं?

उत्तरः 2018 में मेरी शादी हुई थी। मैं तब 35 की उम्र पार कर रही थी। मैं और निक बच्चे के लिए देर नहीं करना चाहते थे। मुझे मेडिकल इशूज थे, जिस कारण सरोगेसी की मदद लेनी पड़ी। निक का परिवार इसके लिए राजी हुआ और इस तरह मेरी बेटी हमारी जिंदगी में आयी। पूरे जोनस परिवार ने मुझे हर कदम पर मदद की। निक की जितनी तारीफ करूं, कम ही होगी। आज के समय में बच्चे की परवरिश मां अकेली नहीं कर सकती। निक बहुत जिम्मेदार और प्यारे पापा हैं। वे रात में बच्ची का डायपर बदल देते हैं। उसे कैल्शियम ड्रॉप्स देनी हो या सैरेलेक, हर काम खुशी से करते हैं। पूरे जोनस परिवार का मेरी बेटी की परवरिश में योगदान रहा है। मम्मी भी जब यूएस आती हैं तो नातिन को खूब प्यार-स्नेह देती हैं। तब मालती पूरी तरह उनकी जिम्मेदारी हो जाती है।

प्रश्नः बेटी के कारण कैरिअर में बदलाव करना पड़ा?

उत्तरः बेटी के जन्म से कुछ समय पहले से मुझे अपने कैरिअर को थोड़ा ब्रेक देना पड़ा। बतौर सिंगर भी अल्बम बनाने के कुछ मौके आए थे, लेकिन मैंने मना किया। मैं इस खूबसूरत दौर को पूरी तरह एंजॉय करना चाहती थी और खुद को तमाम प्रोफेशनल जिम्मेदारियों से दूर रखना चाहती थी। अब मालती दो वर्ष पूरे कर रही है। कुछ समय बाद जब वह प्ले स्कूल जाने लगेगी, मैं फिर काम शुरू करूंगी। बच्चों को बड़ा करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कई बार तनाव हो जाता है, खासकर तब, जब बच्चे को मौसमी सर्दी-जुकाम या बुखार हो जाए, वोमिटिंग हो जाए या वह रोना शुरू कर दे... मैं छोटी-छोटी बातों पर पैनिक हो उठती हूं।

प्रश्नः क्या न्यू मदर्स का कोई वॉट्सएप ग्रुप बनाया है?

उत्तरः ऐसा कुछ मैंने नहीं किया। मैं ज्यादा विश्वास पीडियाट्रीशियन पर ही करती हूं। अगर किसी दूसरी मां की सलाह मेरे काम न आ सकी तो इसका कोई फायदा नहीं। अमेरिका में डॉक्टर्स अमूमन हॉस्पिटल्स में ही होते हैं, भारत की तरह जगह-जगह क्लीनिक नहीं होते। मैं जरूरत पड़ने पर हॉस्पिटल जाती हूं या छोटी समस्याओं पर फोन पर काउंसिलिंग लेती हूं। हालांकि मैंने सुना है कि बॉलीवुड में मांओं का एक वॉट्सएप ग्रुप है, जिसमें वे बच्चों की समस्याओं को लेकर बात करती हैं।