केले के पेड़ से जुड़ी अनोखी परंपराएं
केले के पेड़ से किसने की थी शादी? क्याें सजाया जाता है केले का पेड़? जानिए केले के पेड़ से जुड़ी देश-विदेश की रोचक परंपराएं। केले का पेड़ सौभाग्य, पवित्रता वैभव का प्रतीक है। इसीलिए आपने देखा होगा गणेश पूजा के अलावा किसी भी शुभ काम में इसके पेड़ या पत्तों पर भाेग लगाया जाता है। इतना ही नहीं भारत के
केले के पेड़ से किसने की थी शादी? क्याें सजाया जाता है केले का पेड़? जानिए केले के पेड़ से जुड़ी देश-विदेश की रोचक परंपराएं। केले का पेड़ सौभाग्य, पवित्रता वैभव का प्रतीक है। इसीलिए आपने देखा होगा गणेश पूजा के अलावा किसी भी शुभ काम में इसके पेड़ या पत्तों पर भाेग लगाया जाता है। इतना ही नहीं भारत के
केले के पेड़ से किसने की थी शादी? क्याें सजाया जाता है केले का पेड़? जानिए केले के पेड़ से जुड़ी देश-विदेश की रोचक परंपराएं। केले का पेड़ सौभाग्य, पवित्रता वैभव का प्रतीक है। इसीलिए आपने देखा होगा गणेश पूजा के अलावा किसी भी शुभ काम में इसके पेड़ या पत्तों पर भाेग लगाया जाता है। इतना ही नहीं भारत के
केले के पेड़ से किसने की थी शादी? क्याें सजाया जाता है केले का पेड़? जानिए केले के पेड़ से जुड़ी देश-विदेश की रोचक परंपराएं।
केले का पेड़ सौभाग्य, पवित्रता वैभव का प्रतीक है। इसीलिए आपने देखा होगा गणेश पूजा के अलावा किसी भी शुभ काम में इसके पेड़ या पत्तों पर भाेग लगाया जाता है। इतना ही नहीं भारत के कई स्थानाें में त्योहारों में पत्तल में खाने की भी प्रथा है। यह ऐसा पेड़ है, जिसका तना, पत्ते, फूल, फल औरजड़ सभी कुछ खाने में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में जहां केले की अच्छी पैदावार होती है, वहां केले के पेड़ से जुड़ी कई तरह की परंपराएं भी हैं। असम में तरह-तरह के केलों की वेराइटी मिलती है, जिनके छिलकों से तेल निकाल कर खार बनाया जाता है। इस खार को पपीते औरलौकी की सब्जी में डाला जाता है। इसके अलावा केले से जुड़ी बहुत मीठी परंपराएं भी हैं।
तुलोनी बिया
असम में लड़की को पहली बार माहवारी शुरू होने पर पहले दिन को त्योहार के रूप में मनाया जाता है, जिसे तुलोनी बिया कहा जाता है। यह केले के पेड़ से जुड़ी बहुत सुंदर परंपरा है। माहवारी के पहले दिन से लड़की को 7 दिन तक एक अलग कमरे में रखा जाता है, जहां उसे पुरुषों से मिलने की मनाही होती है।
इस दौरान लड़की को केवल फल ही खाने को दिया जाता है। वह दिन में सिर्फ एक वक्त उबला हुआ खाना खाती है। जब माहवारी के 4 दिन पूरे हो जाते हैं, तब लड़की को पानी में हल्दी डाल कर आंगन के एक कोने में नहलाया जाता है, जहां लड़की को नहलाया जाता है, वहां पर केले का पेड़ लगाया जाता है। सालों साल वहीं नए पुराने केलेे के पेड़ लगे रहते हैं और घर में बेटी यानी लक्ष्मी के आगमन का अहसास कराते हैं। असम के अन्य समुदायों में लड़की की केले के पेड़ से शादी भी करवायी जाती है। पीरियड्स के चौथे दिन के बाद लड़की के घर में पड़ोस की कुछ महिलाएं आती हैं, जो उसे पीरियड्स से जुड़े सामाजिक नियमों के बारे में बताती हैं। ये सब बातें ‘बिया नाम’ गाना गा कर बतायी जाती हैं। बिया नाम यानी विवाह के गीत गाए जाते हैं। यह किसी फंक्शन से कम नहीं होता, इसमें रिश्तेदारों को भी बुलायाा जाता है। यहां तक कि कई लोग कार्ड भी छपवाते हैं। हॉल बुक किए जाते हैं। इसके लिए लड़की को दुलहन की तरह सजाया भी जाता है।
केले का पेड़ और दुर्गा स्वरूप
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा में केले के पेड़ों को भी पूजा पंडाल में दुर्गा स्वरूप स्थापित किया जाता है। इसे लाल बॉर्डर की साड़ी पहनायी जाती है, पत्तों पर सिंदूर लगाया जाता है। पेड़ को सजाने के बाद इसे पूजा वाली जगह पर भगवान गणेश जी की मूर्ति के बिलकुल पास स्थापित किया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। देवी के इस रूप को कोला बा के नाम से जाना जाता है। बंगाली में कोला का मतलब केला और बा का मतलब स्त्री होता है। कोला बा स्नान दुर्गा पूजा का एक बड़ा संस्कार होता है।
मांगलिक कार्यों में प्रयोग
घर में कोई पूजा-अर्चना हो या कोई मंगल कार्य, केले के पत्तों और केलों का इस्तेमाल होता है। माना जाता है, इससे घर में सुख, संपन्नता और आपसी प्रेम भी बढ़ता है। अगर किसी को मांगलिक दोष बताया गया है तो पहले केले के उसका पेड़ से विवाह कराया जाता है।
केले के पेड़ और बहू
धार्मिक कथा में बताया जाता है कि जब गणेश भगवान विवाह के लिए जा रहे थे तो अचानक उन्हें याद आया कि वे कुछ भूल गए हैं। जब घर लौटे तो देखा कि उनकी मां जल्दी-जल्दी खाना खा रही हैं। पूछने पर कि आप ऐसे क्यों खा रही हैं, उन्होंने जवाब दिया कि शादी के बाद क्या पता बहू खाना दे या ना दे। यह सुनते ही गणेश जी केले का पेड़ काट कर लाए औरमां काे थमाते हुए बोले, ‘आज से यही आपकी बहू है। आपका हर तरह से खयाल रखेगी।’ इसीलिए केले के पेड़ को गणेश जी के बाद स्थापित किया जाता है।
डिजाइनर कर रहे हैं इस्तेमाल
खाने औरपरंपरा से जुड़े रीति रिवाज के अलावा आजकल केले के तने से फैब्रिक भी तैयार किए जा रहे हैं। साड़ी, जैकेट से ले कर इससे टेबल मैट भी तैयार किए जाते हैं। हालांकि इसे तैयार करने का प्रोसेस लंबा औरखास तरह का होता है, पर इकोफ्रेंडली होने की वजह से नेशनल और इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर इसे सराह रहे हैं।
विदेशों में भी है परंपरा
जैसे भारत में शादी-ब्याह में फूलों के गहने पहनने की प्रथा है, वैसे थाईलैंड में केलेे के पत्तों से मुकुट और ज्वेलरी तैयार की जाती है। मिठाई की थाली और सजावट में भी इसका प्रयोग होता है। इसके अलावा केले के तनों को काट कर दोने जैसा बनाया जाता है। उनके विशेष त्योहारों में इस दोने में फूल और अगरबत्ती जला कर नदी में बहाया जाता है। वहां केले के पत्तों को बाई टोंग कहा जाता है। थाई मोनार्क में केले के पत्तों की सजावट होती है। चावल व मछली बनाने में केले के पत्तों का प्रयोग होता है।
केले के तने और पत्तों का इस्तेमाल
केले में हाई फाइबर, पोटैशियम और अच्छे कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। यह मिथक है कि इसे खाने से वजन में बढ़ता है। कच्चे केले में विटामिन सी, बी6, फाइबर, मैगनेशियम औरजिंक की प्रचुर मात्रा होती है। केले के पत्तों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करते हैं। ये खाने में स्वाद बढ़ाने के अलावा डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक रखने में मदद करते हैं। केले के फूल और तनों की सब्जी बनायी जाती है, जो आयरन से भरपूर होती है।