सोनी कैसे बनीं हरियाणा रोजवेज में मैकेनिक हेल्पर ! बसों की सर्विसिंग, ग्रीस की गंध और कड़ी मेहनत से कितनी संतुष्ट है वह? समाज और सुरक्षा के बारे में क्या सोचती हैं? जानिए- हरियाणा के जिला हिसार गांव राजली की रहने वाली सोनी समाज के लिए एक मिसाल हैं। अपने 8 बहन-भाइयों में सबसे होनहार हैं। दो बहनों की

सोनी कैसे बनीं हरियाणा रोजवेज में मैकेनिक हेल्पर ! बसों की सर्विसिंग, ग्रीस की गंध और कड़ी मेहनत से कितनी संतुष्ट है वह? समाज और सुरक्षा के बारे में क्या सोचती हैं? जानिए- हरियाणा के जिला हिसार गांव राजली की रहने वाली सोनी समाज के लिए एक मिसाल हैं। अपने 8 बहन-भाइयों में सबसे होनहार हैं। दो बहनों की

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सोनी कैसे बनीं हरियाणा रोजवेज में मैकेनिक हेल्पर ! बसों की सर्विसिंग, ग्रीस की गंध और कड़ी मेहनत से कितनी संतुष्ट है वह? समाज और सुरक्षा के बारे में क्या सोचती हैं? जानिए- हरियाणा के जिला हिसार गांव राजली की रहने वाली सोनी समाज के लिए एक मिसाल हैं। अपने 8 बहन-भाइयों में सबसे होनहार हैं। दो बहनों की

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सोनी कैसे बनीं हरियाणा रोजवेज में मैकेनिक हेल्पर ! बसों की सर्विसिंग, ग्रीस की गंध और कड़ी मेहनत से कितनी संतुष्ट है वह? समाज और सुरक्षा के बारे में क्या सोचती हैं? जानिए-

हरियाणा के जिला हिसार गांव राजली की रहने वाली सोनी समाज के लिए एक मिसाल हैं। अपने 8 बहन-भाइयों में सबसे होनहार हैं। दो बहनों की शादी हो गयी और मां व दादी के अलावा बाकियों की जिम्मेदारी उनकी है। वे गांव में पली-बढ़ी हैं। नवीं के बाद सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने के लिए गयीं। फिर हिसार के कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इतने छोटे गांवों में रह कर ग्रेजुएट होना भी बड़ी बात है। इसके साथ-साथ मार्शल आर्ट सीखी। पर इसके चलते पिता जी जब जीवित थे तो उन्हें गांव वालों से काफी सुनना पड़ा।

सोनी कहती हैं, ‘‘गांव वाले कहते थे, लड़कियों को क्यों यह सब सिखाना है? आगे चल कर घर में गोबर ही थापना है। मेरे पिता जी ने उन लोगों की एक ना सुनी और मुझे हमेशा खेल व पढ़ाई में आगे बढ़ने काे प्रोत्साहित किया। इसी मार्शल आर्ट के पेंचक सिलेट खेल के अंतर्गत नेशनल और इंटरनेशनल लेवल तक गयी व लगातार तीन साल गोल्ड मेडल भी लिया।’’

पिता जी सोनी को नौकरी करता नहीं देख पाए। सोनी के नौकरी जॉइन करने से 3 दिन पहले उनके पिता का देहांत हो गया। 2019 में सोनी की जॉब लग गयी थी।वे बताती हैं, ‘‘कभी नहीं सोचा कि मैं इस क्षेत्र में आऊंगी। हरियाणा में सरकारी नौकरी में ग्रुप डी में मेरा सेलेक्शन हुआ। मुझे हरियाणा रोडवेज में मैकेनिक हेल्पर की पोस्ट मिली। फिलहाल, मैं पिछले 7 साल से इस पोस्ट पर कार्यरत हूं।’’

क्यों छोड़ा खेल

2018 में एशियन गेम्स के लिए सोनी इंडोनेशिया गयीं। लौटने पर उनकी तबियत खराब रहने लगी है। उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। डॉक्टर ने रेस्ट बताया। इस बीच पिता जी का देहांत हो गया।

कठिन है ड्यूटी

हेवी बस सर्विस के बारे में जब हम सोचते हैं तो किसी पुरुष की छवि उभरती है। पर सोनी को इसमें महारत हसिल है। उनके अनुसार, ‘‘दिन में कम से कम 2-3 बस ठीक कर लेती हूं। मेरी ड्यूटी बी सर्विस की है। इसमें ब्रेक ग्रीसिंग का काम किया जाता है। टायर को निकाल कर उनके पार्ट्स की सर्विस की जाती है। टायर बदलने में शुरू में दिक्कत होती थी, पर यहां का स्टाफ काफी सहयोग करता है। उन्हीं की बदौलत मैं यह काम सीख पायी। अब मुझे यह काम कठिन नहीं, बल्कि रोचक लगता है। मुझसे बहुत पूछा गया कि अगर मैं इस काम में सहज नहीं हूं तो मेरी ड्यूटी कहीं और शिफ्ट कर सकते हैं, पर मैं नहीं गयी। मैंने इसे चैलेंज के तौर पर स्वीकारा। मेरी ड्यूटी का समय 9-5 होता है। हमारा काम पूरी टीम में बंटा हुआ होता है। वायरिंग, लाइनिंग, ग्रीसिंग और भी बहुत कुछ...। इस काम को करने में शुरू में ग्रीस की गंध सिर पर चढ़ती थी। बुरा लगता था। पर अब तो यह मेरा काम है, सोच कर मैं खुश हूं। यही रोजी-रोटी है मेरी। मां को भी यह काम पहले बुरा लगता था, पर धीरे-धीरे मेरे काम की तारीफ होने लगी। मेरी मेहनत उन्हें महसूस होने लगी और वह मेरे काम काे सराहने लगीं। अब पूरी तरह से मैं अपने इस काम में डूब गयी हूं।’’

आर्थिक मजबूती है जरूरी

लड़कियों का अपने पैरों पर खड़ा होना जरूरी है, ताकि वे अपने परिवार और समाज में अपना वजूद बना सकें। सोनी मानती हैं, ‘‘औरतें आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं होंगी तो उन्हें कौन जीने देगा? पिता जी की मृत्यु हो गयी, तो मैंने अकेले पूरा घर संभाल लिया। अब पड़ोसी लोहा मानते हैं कि वाकई लड़कियों का अपने पैरों में खड़ा हाेना जरूरी है। वह कोई भी निर्णय ले सकती है। आपको अपने पति पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा, वरना एक-एक रुपए काे मोहताज बना दिया जाता है।’’

सोनी के छोटे-भाई बहन हैं, जो स्कूल में पढ़-लिख रहे हैं। शादी के बाद भी उनकी पढ़ाई पूरी होने तक वे उनका खर्चा उठाना चाहती हैं और इसमें अपने पति से साथ देने की उम्मीद करती हैं।मां में मेरी जान बसती है। मां की तबियत ठीक नहीं रहती। वे चाहती हैं कि मेरी शादी हो जाए और मैं पिता को किया वादा पूरा करना चाहती हूं।