बरेली से दिल्ली आ कर चर्चित टीवी शो गुस्ताखी माफ में वॉयस ओवर आर्टिस्ट और विविध भारती में रेडियो नाटकों से शुरू हुई संदीप की यात्रा मुंबई में स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में बदस्तूर जारी है। बैरी जॉन एक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग ले कर उन्होंने कुछ मशहूर डाइरेक्टर्स के साथ भी काम किया।

बरेली से दिल्ली आ कर चर्चित टीवी शो गुस्ताखी माफ में वॉयस ओवर आर्टिस्ट और विविध भारती में रेडियो नाटकों से शुरू हुई संदीप की यात्रा मुंबई में स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में बदस्तूर जारी है। बैरी जॉन एक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग ले कर उन्होंने कुछ मशहूर डाइरेक्टर्स के साथ भी काम किया।

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बरेली से दिल्ली आ कर चर्चित टीवी शो गुस्ताखी माफ में वॉयस ओवर आर्टिस्ट और विविध भारती में रेडियो नाटकों से शुरू हुई संदीप की यात्रा मुंबई में स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में बदस्तूर जारी है। बैरी जॉन एक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग ले कर उन्होंने कुछ मशहूर डाइरेक्टर्स के साथ भी काम किया।

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बरेली से दिल्ली आ कर चर्चित टीवी शो गुस्ताखी माफ में वॉयस ओवर आर्टिस्ट और विविध भारती में रेडियो नाटकों से शुरू हुई संदीप की यात्रा मुंबई में स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में बदस्तूर जारी है। बैरी जॉन एक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग ले कर उन्होंने कुछ मशहूर डाइरेक्टर्स के साथ भी काम किया। 

इतना कुछ करने के बाद स्टैंडअप कॉमेडी में आ कर जम गए, ऐसा क्यों? संदीप कहते हैं, ‘‘सेंस ऑफ ह्यूमर तो हमेशा से थी, कई तरह की आवाजें निकाल लेता था, मिमिक्री करता था। फिर क्लब में शो करने लगा। माइक से परिचय शुरू से रहा, बस खुद को स्टेज के हिसाब से ढालना था और वह भी आ ही गया।’’ 

कॉमेडियंस के साथ विवाद भी जुड़ जाते हैं, आपके साथ कभी कुछ हुआ, इस सवाल पर संदीप कहते हैं, ‘‘मैं विवादों को तूल ही नहीं देता। कभी-कभी कॉमेडियंस विवादों को जानबूझ कर हवा देते हैं, ताकि लाइमलाइट में बने रहें। मुझे लंबी रेस का घोड़ा बनना है, तो विवादों के बजाय काम पर ध्यान देना होगा, और मैं वही करता हूं।’’ 

लॉकडाउन में समय का सदुपयोग कैसे किया। संदीप कहते हैं, ‘‘मैं एनिमल लवर हूं। पहले भी मेरे पास दो कुत्ते थे और लॉकडाउन में दो और स्ट्रे डॉग्स को अडॉप्ट किया। कोविड दौर में अपने बारे में सोचने-लिखने का मौका मिला। हमारा काम क्रिएटिव है और इसमें ठहर कर सोचना बहुत जरूरी है। कुछ फाइनेंशियल दिक्कतें हुईं, चिंताएं भी वाजिब थीं, लेकिन मैंने समय का सदुपयोग किया। शरीर पर ध्यान दिया, स्टेमिना बढ़ाया।’’ स्टेज पर डेढ़ घंटा खड़ा होने-बोलने के लिए ताकत चाहिए। रोज ढाई घंटे फिटनेस को देता हूं। एनर्जी का स्तर बढ़िया होगा, तो परफॉर्मेंस भी बेहतर होगी। मैं अब अपने काम को ज्यादा एंजॉय करता हूं। कई बार तो स्टेज पर ही कुछ नयी लाइनें भी लिख लेता हूं। 

शब्दों व भाषा पर नियंत्रण हटा, तो कॉमेडी के साथ दुर्घटना घटी। संदीप हंसते हैं, ‘‘मेरी पत्नी स्क्रिप्ट सुनती हैं। जगह-जगह चेंज कराती हैं। वे तसल्ली कर लेती हैं कि कहीं कोई सेक्सिस्ट-रेसिस्ट कमेंट तो नहीं है। हम आखिर तो पुरुष ही हैं ना। धीरे-धीरे सभ्य होना सीख रहे हैं। हमारे पास पावर है और सोसाइटी ने भी नहीं सिखाया कि कैसा व्यवहार करना चाहिए, मगर अब हम खुद को बदल रहे हैं। कॉमेडी सावधानी से की जानेवाली बकैती है, घंटे-डेढ़ घंटे कोई विशुद्ध बकैती नहीं कर सकता’’ 

कॉमेडी में किन बातों का ध्यान रखते हैं? संदीप कहते हैं कि जो कुछ भी समाज, देश या दुनिया में घट रहा है, उस पर पैनी नजर रखनी होती है। हमें देखना होता है कि अभी किन मुद्दों पर बात चल रही है और किन पर अभी बात करना ठीक नहीं होगा। कभी ऐसा भी होता है कि पछताता हूं कि इस थीम पर जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए थी। कॉमेडी में अपने प्रति ईमानदारी जरूरी है। स्टेज पर वैसे ही रहें, जैसे वास्तविक जीवन में हैं। जिंदगी रोज नए टॉपिक देती है, बाकी तो हर चीज पहले घटित हो चुकी है, केवल उसके प्रति नजरिया अलग करना होता है।’’

मूड खराब है, मगर स्टेज पर परफॉर्म करना है, ऐसे में हाले दिल क्या होता है, जवाब में संदीप कहते हैं, ‘‘हम कितने भी बीमार हों, स्टेज पर अपनी पीड़ा नहीं दिखा सकते। पिछले साल मेरी एक दाढ़ टूट गयी थी, जिसमें भयंकर दर्द था। डेंटिस्ट ने प्रॉब्लम फिक्स करने की कोशिश में मेरे दूसरे दांत को नुकसान पहुंचा दिया। उसमें फ्रैक्चर हो गया, तो डॉक्टर ने सीमेंट भर दिया, पर थोड़ी खाली जगह रह गयी। जब फ्लाइट में बैठा, तो दर्द बढ़ गया। 5-6 पेनकिलर्स खा कर स्टेज पर परफॉर्म किया। डेढ़ घंटे स्टेज पर दर्द भूला रहा, मगर शो खत्म होते ही दर्द शुरू हो गया। 15-20 दिन इसी तरह दर्द में परफॉर्म करता रहा। यहीं पर सेंस ऑफ ह्यूमर और कॉमेडी में फर्क होता है। सेंस ऑफ ह्यूमर है, तो भी परफॉर्म नहीं कर पाएंगे। यह एक किस्म की ट्रेनिंग होती है, समय के साथ ये चीजें आती हैं।’’ 

संदीप कहते हैं, ‘‘कॉमेडी में कभी पंचडाउन नहीं करना चाहिए। किसी क्लास, जाति, नस्ल या जेंडर पर कमेंट नहीं होना चाहिए। मुझे लोग पसंद इसीलिए करते हैं, क्योंकि मैं उन्हें उनके ही परिवार का बच्चा लगता हूं। मेरे वीडियोज लोग माता-पिता या संबंधियों को फॉरवर्ड करते हैं। अब दो साल बाद लाइव आ रहा हूं, तो शरीर-दिमाग पर नए सिरे से काम कर रहा हूं। अब महामारी ना आए, यही दुआ है।’’