सेक्स के लिए खुद को कैसे करें तैयार
Experts highlight that mental readiness, not just physical, is key to sexual satisfaction, and women's suppressed desire due to fatigue and societal norms needs open communication and environmental support for fulfilling intimacy.
Experts highlight that mental readiness, not just physical, is key to sexual satisfaction, and women's suppressed desire due to fatigue and societal norms needs open communication and environmental support for fulfilling intimacy.
Experts highlight that mental readiness, not just physical, is key to sexual satisfaction, and women's suppressed desire due to fatigue and societal norms needs open communication and environmental support for fulfilling intimacy.
हमेशा मन और शरीर सेक्स के लिए तैयार हो जाए, जरूरी नहीं है। रोजमर्रा की भागदौड़, आपाधापी और थकान ना सिर्फ रिश्ते पर बुरा असर डालते हैं, बल्कि स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं। लेकिन शोध और एक्सपर्ट बताते हैं कि सेक्स थकान को बढ़ाता नहीं है, बल्कि कम करता है, जबकि स्त्रियां थकान के साथ अपनी सेक्स इच्छा को नकार देती हैं। मनोचिकित्सक इसे माइंड गेम मानते हैं। सेक्स तन से नहीं, बल्कि मन से जुड़ी बात है। इसके लिए अपने तन को तैयार करने की जरूरत नहीं है, बल्कि दिमागी तौर पर तैयार होने की जरूरत है। दिल्ली एनसीआर की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट डॉ. श्वेता शर्मा बता रही हैं कि दंपतियों को इंटीमेट पलों में विशेष तौर पर किन बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है।
ब्रेन का है सारा कमाल
ब्रेन सबसे पावरफुल सेक्स ऑर्गन है। शरीर को तैयार करने से पहले अपने मन काे तैयार करने से रिश्ते पर पॉजिटिव असर आएगा। ब्रेन तैयार होगा तो शरीर खुदबखुद संसर्ग के लिए तैयार हो सकेगा। सामान्य तौर पर समाज में माना जाता है कि पुरुष इंटीमेसी में ज्यादा और जल्दी इन्वॉल्व होना चाहते हैं। जबकि मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं की सेक्सुअल ड्राइव ज्यादा होती है। सामाजिक व पारिवारिक माहौल ऐसा होता है कि कोई इस विषय पर बात करने को तैयार नहीं होता। स्त्रियां संसर्ग से जुड़ी अपनी इच्छाएं अपने पति से अभिव्यक्त नहीं कर पातीं। अगर महिलाएं ऐसा करें तो उन्हें कैरेक्टर शेमिंग का सामना करना पड़ता है।
परिवेश का भी होता है असर
सेक्सुअल इंटीमेसी में सिर्फ दो शरीरों की ही बात नहीं होती, यह पूरे परिवेश से जुड़ी बात भी है, जो तन-मन को संसर्ग के लिए प्रेरित करती हैं। गंदा कमरा, तेज लाइट, फोन में बार-बार आता नोटिफिकेशन दिमाग काे परेशान कर देता है। नतीजा, तन-मन, बार-बार उस ओर ध्यान देने की वजह से उतना उत्तेजित नहीं हो पाता, जितना उसे होना चाहिए। दिमाग को क्या बातें/ आदतें रिलैक्स और उत्तेजित करती हैं, वैसा माहौल तैयार करना होगा। फिर चाहे वह हल्की रोशनी की बात हो या फिर मनपसंद कोई धुन है। इसके लिए कोई विशेष रोमांटिक सेटअप तैयार करने की जरूरत नहीं है। कई बार सिर्फ साफ जगह और सिंपल कैंडल लाइट भी मूड काे लिफ्ट करने का काम कर जाती है।
इच्छा की अभिव्यक्ति
संसर्ग में संतुष्टि के लिए सबसे पहले इच्छा की अभिव्यक्ति जरूरी है। पर हमारे समाज में महिलाओं को सिखाया जाता है कि उन्हें सेक्स से जुड़ी अपनी इच्छाओं को ले कर बात नहीं करनी है। इसीलिए वे खुद अपनी बॉडी के साथ कंफर्टेबल नहीं होतीं। यह स्थिति सालों पहले भी थी, आज भी यही है। महिलाएं सेक्सुअल फैंटेसी तो करती हैं, पर उधेड़बुन में रहती हैं कि उसे अपने साथी के सामने अभिव्यक्त करें या नहीं। इससे कहीं उनके रिश्ते ना बिगड़ जाएं। इंटीमेसी का अर्थ सिर्फ इंटरकोर्स नहीं है। यह भी महत्वपूर्ण है कि आप अपने साथी के समक्ष प्यार की अभिव्यक्ति कैसे करेंगे। आप अपनी अनिच्छा और इच्छा खुल कर बोल सकते हैं। अपनी बॉडी के साथ सहज हैं, तो आप अपने साथी के साथ भी सहज रहेंगी। ऐसे में साथी भी नहीं हिचकेगा। उन मोमेंट में सिर्फ यही सोचें कि वह आपका इंटीमेट पार्टनर है। संसर्ग को ले कर महिला अगर खुद को दायरे में रखेगी और साथी को भी दायरे में रहने को कहेगी, तो एंजॉय कैसे करेगी? इंटीमेंसी में आप जितना फ्री फ्लो महसूस करेंगी, सेक्सुअल लाइफ में सहजता बनी रहेगी और ऑर्गेज्म भी मिलेगा। ऑर्गेज्म सेक्स लाइफ के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरूरी है।
कई शोध बताते हैं कि जो महिलाएं अपने साथी को भावनात्मक स्वीकृति देती हैं, वे ऑर्गेज्म सहज रूप से महसूस कर पाती हैं। मेल भी ऑर्गेज्म में टाइम देते हैं, दोनों अपनी फैंटेसी को जीते हैं। यह सिर्फ 10 मिनट की बात नहीं है। एक-दूसरे के साथ 3-4 घंटे की बात है। ऐसे में दोनों के बीच बॉन्डिंग मजबूत होती है। जो समय आप एक-दूसरे को देते हैं, उससे ‘बॉन्डिंग मोमेंट’ बनता है।
सेक्स की शेड्यूलिंग
सेक्स को शेड्यूल करना सोच कर बहुत अजीब लगता है। पर जब कपल्स की व्यस्तताएं ज्यादा हो जाएं, तो एक-दूसरे को समय देने के लिए पहले से समय तय करना बुरा ऑप्शन नहीं है। इससे दिमाग को संसर्ग के लिए मानसिक रूप से तैयार करने में बहुत मशक्कत करने की जरूरत नहीं होगी। ज्यादातर कपल्स फीमेल पार्टनर के साथ ओव्यूलेशन पीरियड में सेक्स शेड्यूल करते हैं। सेक्स की शेड्यूलिंग के चलते वीकेंड सेक्स का चलन भी रहा है।
डॉक्टर अपनी क्लीनिकल प्रैक्टिस में देखते हैं कि तनाव, समय की कमी, संसर्ग का मूड नहीं बन पाने से ज्यादातर महिलाएं संसर्ग के दौरान चरम सुख की प्राप्ति नहीं कर पाती हैं, क्योंकि उन्हें ऑर्गेज्म के लिए समय लगता है। उनका बॉडी टाइप अलग है। सबके लिए संसर्ग संतुष्टि का पॉइंट अलग-अलग है, जिसे जी स्पॉट कहते हैं। सभी का जी स्पॉट अलग होता है। ऑर्गेज्म बहुत बड़ी दुविधा ले कर आता है। कई बार फीमेल फेक ऑर्गेज्म कर रही होती है, क्योंकि उसे मेल ईगो को संतुष्ट करना होता है। सच मानें तो ऑर्गेज्म को एंजॉय करना या ऑर्गेज्म काे सिर्फ हाव-भाव से प्रकट करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। बेहतर होगा कि कपल्स एक-दूसरे को समय दें। पहले से समय भी तय कर लें, तो खासतौर पर स्त्रियां कम से कम मन से तैयार रहेंगी। पर इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि इस बीच दोनों के बीच रोमांस ना हो या फिजिकल कनेक्शन और इंटीमेसी ना हो।
हारमोन्स की जांच
सेक्स और इच्छा में हारमोन्स बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। शोध बताते हैं थायरॉइड में असंतुलन, पिट्यूटरी ग्लैंड और सेक्स हारमोन्स में गड़बड़ी से उत्तेजना में कमी और सेक्स की इच्छा में सुस्ती महसूस होगी। अगर आप गौर कर पा रही हैं कि पहले की तुलना में संसर्ग की इच्छा में कमी आयी है, शरीर हर समय गिरा-पड़ा लग रहा है और मूड उखड़ा रहता है, तो डॉक्टरी सलाह की जरूरत है। जांच से मालूम चलेगा कि कहीं कोई हारमोनल इशू तो नहीं है।