मिलिए फिल्मों के चंद ऐसे महिला किरदारों से, जिन्होंने असल जिंदगी में महिलाओं को नयी राह दिखायी। फिल्मों ने हमें इन सभी और इनके जैसी कई स्ट्राॅन्ग, इंडिपेंडेंट और कूल महिला किरदारों से मिलवाया है, जिनकी कहानियां परदे पर असल जिंदगी से अलग नहीं हैं। इन किरदारों ने इंपावरमेंट के कुछ स्टैंडर्ड सेट किए हैं और कई बहुत अच्छे लाइफ लेसन्स भी दिए हैं।

मिलिए फिल्मों के चंद ऐसे महिला किरदारों से, जिन्होंने असल जिंदगी में महिलाओं को नयी राह दिखायी। फिल्मों ने हमें इन सभी और इनके जैसी कई स्ट्राॅन्ग, इंडिपेंडेंट और कूल महिला किरदारों से मिलवाया है, जिनकी कहानियां परदे पर असल जिंदगी से अलग नहीं हैं। इन किरदारों ने इंपावरमेंट के कुछ स्टैंडर्ड सेट किए हैं और कई बहुत अच्छे लाइफ लेसन्स भी दिए हैं।

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मिलिए फिल्मों के चंद ऐसे महिला किरदारों से, जिन्होंने असल जिंदगी में महिलाओं को नयी राह दिखायी। फिल्मों ने हमें इन सभी और इनके जैसी कई स्ट्राॅन्ग, इंडिपेंडेंट और कूल महिला किरदारों से मिलवाया है, जिनकी कहानियां परदे पर असल जिंदगी से अलग नहीं हैं। इन किरदारों ने इंपावरमेंट के कुछ स्टैंडर्ड सेट किए हैं और कई बहुत अच्छे लाइफ लेसन्स भी दिए हैं।

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घरेलू और सीधी भी है, कभी प्यारी है, कभी दुनिया के लिए पगलैट भी, बोल्ड है कभी, कभी है शर्मीली, कभी सपोर्टिंग है, तो कभी रिबेल भी। लविंग और केअरिंग मां है, सपोर्टिंग बीवी है, बोल्ड सिंगल लेडी है, अपने पैरों पर खड़ी बिजनेस वुमन है। अपने पिता का प्यार और जिंदगी को भूल कर खयाल रखने वाली बेटी भी और अपने लेट फोर्टीज में अपनी पसंद का कैरिअर चुन कर उसके पीछे भागने वाली बीवी भी है। फिल्मों ने हमें इन सभी और इनके जैसी कई स्ट्राॅन्ग, इंडिपेंडेंट और कूल महिला किरदारों से मिलवाया है, जिनकी कहानियां परदे पर असल जिंदगी से अलग नहीं हैं। इन किरदारों ने इंपावरमेंट के कुछ स्टैंडर्ड सेट किए हैं और कई बहुत अच्छे लाइफ लेसन्स भी दिए हैं।

फिल्मों के किरदारों को देख कर महिलाएं सीख रही हैं या महिलाओं को देख कर फिल्मों के किरदार लिखे जा रहे हैं। आइए देखें कुछ लाइफ लेसन्स-

शशिः फिल्म इंगलिश विंगलिश में श्रीदेवी ने एक आदर्श बीवी और हमेशा अपने बच्चों के बारे में सोचने वाली मां का किरदार निभाया था। अपने परिवार को खुद से आगे रखने वाली शशि को एक दिन समझ आता है कि अपने लिए कुछ करना या खुद को एक बार आगे रखना स्वार्थी होने से अलग है और गलत नहीं है।

कायराः डियर जिंदगी उन फिल्मों में से है, जिसने मेंटल हेल्थ की ओर लोगों को अलर्ट किया है और थेरैपी को नाॅर्मलाइज करने की कोशिश की है। फिल्म में आलिया भट्ट कायरा का किरदार निभाती हैं, जो इंडिपेंडेंट लड़की है, लेकिन कई तरह के चाइल्डहुड ट्रॉमा से गुजरी है और एक दिन थेरैपी के जरिए हील करने का फैसला लेती है। कायरा की आगे बढ़ने की कोशिश बहुत ब्रेव है। पास्ट में चाहे जो हुआ हो अपने प्रेजेंट और फ्यूचर में उसे निकलने की उम्मीद और कोशिश करना जरूरी है।

सुलूः फिल्म तुम्हारी सुलू में अपने लाइफ पार्टनर को प्यार और हमेशा सपोर्ट करने वाली हाउसवाइफ सुलू को एक मौका मिलता है अपने लिए कुछ करने का। वह रेडियो जॉकी बनती है। चाहे लोगों को उसका इस उम्र में कैरिअर चुनना सही ना लगे, वह फिर भी अपनी पसंद के कैरिअर को चेज करती है।

आयशाः दिल धड़कने दो कई स्तर पर फैमिली इशूज और रिलेशनिशप्स के लेअर्स को एक्सप्लोर करती है। फिल्म में प्रियंका चोपड़ा सेल्फमेड बिजनेस वुमन का किरदार निभाती हैं। एक डेड मैरिज में फंसी आयशा फैमिली शुरू करने के प्रेशर और अपनी आजादी के बीच खुद को चुनती हैं।

पीकूः सिंगल इंडिपेंडेंट लेडी जो कैरिअर के साथ फैमिली में अपने बुजुर्ग पिता का भी ध्यान रखती है। उनकी सभी समस्याओं के साथ अपना ऑफिस भी मैनेज करती है। जिस तरह पीकू फैमिली का ध्यान रखती है, वह किसी भी यंग लड़की के लिए मिसाल है।

अमृताः फिल्म थप्पड़ में तापसी ने ऐसी वाइफ का किरदार प्ले किया था, जो खुद से पहले अपने पार्टनर का खयाल रखती है, घर के लोगों का और घर को स्मूदली चलाती है। लेकिन फिल्म में पति के एक बार हाथ उठाने पर बाद ही वह सबके खिलाफ खड़े होने का फैसला लेती है। टॉक्सिक मैरिज में रहना गलत है। जितना गलत हाथ उठाना है, उतना ही गलत उसको सहना भी है।