స్విమ్మింగ్ అనేది ఒక వినోదాత్మక కార్యాచరణ మరియు అద్భుతమైన కార్డియో వ్యాయామం, ఇది అన్ని వయసుల వారికి సరిపోతుంది, ఎందుకంటే శరీర అవసరాలకు అనుగుణంగా వేగాన్ని సర్దుబాటు చేయవచ్చు. ఈ వ్యాయామం స్థూలకాయం, రక్తపోటు, మరియు మధుమేహం వంటి ఆధునిక జీవనశైలి వ్యాధులను నియంత్రించడంలో సహాయపడుతుంది. డాక్టర్ల అభిప్రాయం ప్రకారం, స్విమ్మింగ్ అనేది ఇన్సులిన్ నిరోధకతను మెరుగుపరుస్తుంది, వృద్ధాప్య ప్రక్రియను నెమ్మదిస్తుంది, శరీర సౌలభ్యాన్ని పెంచుతుంది, ఎక్కువ కేలరీలను బర్న్ చేస్తుంది, కండరాలను టోన్ చేస్తుంది మరియు బరువు తగ్గడంలో సహాయపడుతుంది. అయితే, తక్కువ రక్తంలో చక్కెర స్థాయిలు, అంటువ్యాధులు, లేదా శస్త్రచికిత్స తర్వాత స్విమ్మింగ్ చేయకూడదు. స్విమ్మింగ్ ను ప్రారంభించే ముందు సరైన శిక్షణ పొందడం మరియు నిపుణుల మార్గదర్శకత్వంలో చేయడం ముఖ్యం, ఇది ముఖ్యంగా PCOS వంటి పరిస్థితులకు కూడా ప్రయోజనకరంగా ఉంటుంది.

స్విమ్మింగ్ అనేది ఒక వినోదాత్మక కార్యాచరణ మరియు అద్భుతమైన కార్డియో వ్యాయామం, ఇది అన్ని వయసుల వారికి సరిపోతుంది, ఎందుకంటే శరీర అవసరాలకు అనుగుణంగా వేగాన్ని సర్దుబాటు చేయవచ్చు. ఈ వ్యాయామం స్థూలకాయం, రక్తపోటు, మరియు మధుమేహం వంటి ఆధునిక జీవనశైలి వ్యాధులను నియంత్రించడంలో సహాయపడుతుంది. డాక్టర్ల అభిప్రాయం ప్రకారం, స్విమ్మింగ్ అనేది ఇన్సులిన్ నిరోధకతను మెరుగుపరుస్తుంది, వృద్ధాప్య ప్రక్రియను నెమ్మదిస్తుంది, శరీర సౌలభ్యాన్ని పెంచుతుంది, ఎక్కువ కేలరీలను బర్న్ చేస్తుంది, కండరాలను టోన్ చేస్తుంది మరియు బరువు తగ్గడంలో సహాయపడుతుంది. అయితే, తక్కువ రక్తంలో చక్కెర స్థాయిలు, అంటువ్యాధులు, లేదా శస్త్రచికిత్స తర్వాత స్విమ్మింగ్ చేయకూడదు. స్విమ్మింగ్ ను ప్రారంభించే ముందు సరైన శిక్షణ పొందడం మరియు నిపుణుల మార్గదర్శకత్వంలో చేయడం ముఖ్యం, ఇది ముఖ్యంగా PCOS వంటి పరిస్థితులకు కూడా ప్రయోజనకరంగా ఉంటుంది.

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స్విమ్మింగ్ అనేది ఒక వినోదాత్మక కార్యాచరణ మరియు అద్భుతమైన కార్డియో వ్యాయామం, ఇది అన్ని వయసుల వారికి సరిపోతుంది, ఎందుకంటే శరీర అవసరాలకు అనుగుణంగా వేగాన్ని సర్దుబాటు చేయవచ్చు. ఈ వ్యాయామం స్థూలకాయం, రక్తపోటు, మరియు మధుమేహం వంటి ఆధునిక జీవనశైలి వ్యాధులను నియంత్రించడంలో సహాయపడుతుంది. డాక్టర్ల అభిప్రాయం ప్రకారం, స్విమ్మింగ్ అనేది ఇన్సులిన్ నిరోధకతను మెరుగుపరుస్తుంది, వృద్ధాప్య ప్రక్రియను నెమ్మదిస్తుంది, శరీర సౌలభ్యాన్ని పెంచుతుంది, ఎక్కువ కేలరీలను బర్న్ చేస్తుంది, కండరాలను టోన్ చేస్తుంది మరియు బరువు తగ్గడంలో సహాయపడుతుంది. అయితే, తక్కువ రక్తంలో చక్కెర స్థాయిలు, అంటువ్యాధులు, లేదా శస్త్రచికిత్స తర్వాత స్విమ్మింగ్ చేయకూడదు. స్విమ్మింగ్ ను ప్రారంభించే ముందు సరైన శిక్షణ పొందడం మరియు నిపుణుల మార్గదర్శకత్వంలో చేయడం ముఖ్యం, ఇది ముఖ్యంగా PCOS వంటి పరిస్థితులకు కూడా ప్రయోజనకరంగా ఉంటుంది.

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स्विमिंग फन एक्टिविटी होने के साथ बेस्ट कार्डियो वर्कआउट भी है। हर उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग लेवल हैं, जिन पर वे स्विम कर सकते हैं। अपनी बॉडी की जरूरत के हिसाब से स्विम करने की स्पीड तय कर सकते हैं। यह हर हाल में आपके दिन के 30 से 35 मिनट का वर्कआउट का गोल पूरा कर देगी। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को 30 से 35 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।

स्विमिंग करने के फायदे

मुंबई के एस एल रहेजा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट इंटरल मेडिसिन, डॉक्टर पारितोष बघेल बता रहे हैं स्विमिंग क्यों जरूरी है और क्या हैं इसके फायदे-

आजकल के लाइफस्टाइल के कारण ओबेसिटी, हाइपरटेंशन और डाइबिटीज आम हो गयी हैं, कई लोग इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मेरा मानना है कि इस तरह की बीमारियों को कंट्रोल में रखने के लिए तीन स्टेप्स होते हैं - प्रिवेंशन, बीमारी पर कंट्रोल और उस कंडीशन को रिवर्स करना। सबसे पहले जरूरी है लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन, जो डाइट और एक्सरसाइज से होता है। इस तरह की बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए कार्डियो एक्टिविटीज जरूरी हैं जैसे वॉक, साइकिलिंग, ट्रेडमिल और स्विमिंग। सभी कार्डियो एक्टिविटीज में से स्विमिंग सबसे आसान है। हर उम्र और कई तरह की समस्याओं जैसे घुटने के दर्द, ओबेसिटी होने पर भी स्विमिंग कर सकते हैं। 30 से 40 मिनट तक स्विमिंग करने से पूरी बॉडी का वर्कआउट हो जाता है। फुल बॉडी वर्कआउट से आप काफी कैलोरीज भी बर्न कर सकते हैं।

स्विमिंग से डाइबिटीज कंट्रोल : बैठे रहने से बॉडी एक्स्ट्रा इंसुलिन स्टोर करने लगती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ जाता है। लेकिन कोई भी फिजिकल एक्टिविटी इंसुलिन रेजिस्टेंस में मदद करती है।

स्लो एजिंग प्रोसेस : फिजिकल एक्टिविटी से वॉटर रिटेंशन नहीं होता, बॉडी के जॉइंट्स फ्लेक्सिबल रहते हैं और मसल्स भी टोंड रहती हैं।

बॉडी फ्लेक्सिबिलिटी : स्विमिंग करते समय पूरी बॉडी की एक्सरसाइज होती है। जॉइंट्स, आर्म्स, लेग्स के अलावा 20 से 30 मिनट स्विम करने से पूरी बॉडी फ्लेक्सिबल रहती है। छोटे-मोटे क्रैंप्स नहीं आते हैं।

कैलोरी बर्न : फिजिकल एक्टिविटीज में स्विमिंग सबसे ज्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करती है। पूरी बॉडी के वर्कआउट से कैलोरी बर्न करना आसान होता है।

टोंड बॉडी : स्विम करने से सभी मसल्स का वर्कआउट होता है। कोर, लेग्स और आर्म्स की मसल्स रेगुलर स्विमिंग से टोंड रहती हैं। कोई भी वर्कआउट एक बार में एक या दो ही मसल्स को टारगेट करता है, लेकिन स्विमिंग फुल बॉडी टोन करने में मदद करती है।

Swimming helps in weight loss and tone down the body

वेटलॉस : फुल बॉडी वर्कआउट 40 मिनट करने से वेटलॉस के गोल्स पूरे करना मुश्किल नहीं है। स्विमिंग के दौरान बॉडी तेजी से कैलोरी बर्न करती है, जिससे वेटलॉस भी तेजी से होता है। हेल्दी वेटलॉस के लिए स्विमिंग सबसे अच्छा वर्कआउट होता है।

कब ना करें स्विमिंग

हाइपोग्लाइसीमिया : लो शुगर लेवल रहने पर ध्यान देना जरूरी है। अपना शुगर लेवल चेक करके ही वर्कआउट प्लान करें। शुगर लो हो तो स्विमिंग या कोई भी वर्कआउट ना करें। लो शुगर से बेहोशी हो सकती है, जो स्विमिंग के दौरान होना बहुत खतरनाक हो सकता है।

कंटेजियस डिजीज : अगर आपको कोई भी ऐसी बीमारी है, जो फैल सकती है जैसे जुकाम, खांसी, स्किन का कोई रैश व एलर्जी, तो स्विमिंग पूल में ना जाएं।

सर्जरी के बाद : किसी तरह की सर्जरी के तुरंत बाद या जब बॉडी में कहीं स्टिच लगे हों तो स्विम ना करें। अगर कहीं भी घाव है तो भी पूल में जाने से बचें। क्लोरीन और पानी में भीगने से समस्या हो सकती है।

पहले सीखें : हर वर्कआउट या नए रूटीन से पहले उसे अच्छी तरह सीखना जरूरी है। पहले पर्याप्त ट्रेनिंग लें और फिर किसी इंस्ट्रक्टर की मदद से ही स्विमिंग शुरू करें।

जरूरतों को समझें : कोई भी वर्कआउट ज्यादा करने से बॉडी पर स्ट्रेन पड़ सकता है। स्विमिंग भी अपने ट्रेनर से बॉडी की जरूरतें समझ कर करें। ज्यादा कर लेने से थकान हो सकती है, क्योंकि यह पानी में की जाती है। स्किन पर इसका असर पड़ सकता है।

स्विमिंग से पीसीओडी कंट्रोल

While helping in regulating PCOS, swimming also lowers blood sugar levels

स्विमिंग के कई फायदे हैं। बॉडी की मसल्स को टोंड रखने के साथ यह लड़कियों में पीसीओडी के कारण होने वाली समस्याओं को भी कंट्रोल करने में मदद करती है। मैक्स हॉस्पिटल, गुड़गांव की सीनियर गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ. ऋतु सेठी का इस बारे में कहना है, ‘‘अब्नॉर्मल हारमोन लेवल्स के कारण ओवरी में सिस्ट बनते हैं और पीसीओडी की समस्या शुरू हो जाती है। इंसुलिन लेवल हाई रहने से भी इसमें कई तरह की परेशानी आती है और वजन भी बढ़ने लगता है। पीसीओडी भी आजकल लाइफस्टाइल डिस्ऑर्डर बन गया है। इसके होने के कई कारण हैं, जैसे ऑफिस में देर तक बैठ के काम करते रहना, वजन बढ़ना, जंक फूड ज्यादा खाना, स्ट्रेस लेना और हाइपोग्लाइसिमिक होना यानी हाई शुगर लेवल रहना भी पीसीओडी का कारण बन सकता है।’’

- स्विमिंग से कैलोरी तेजी से बर्न होती है।

- फुल बॉडी वर्कआउट हाेने के कारण वेटलॉस भी होता है, जो पीसीओडी में जरूरी होता है।

- वेटलॉस के साथ इंसुलिन लेवल का फ्लक्चुएशन भी स्विमिंग से कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे पीसीओडी के लक्षण भी कंट्रोल में रहते हैं।

स्विमिंग हेल्थ के लिए तो जरूरी है ही, फन और अच्छा स्पोर्ट भी है। हर उम्र के लोग स्विम कर सकते हैं। इसे शुरू करने से पहले सही पूल का चयन करें और कितनी देर स्विम करना चाहिए, इस बात का ध्यान जरूर रखें। बिना इंस्ट्रक्टर के स्विमिंग ना करें।