अस्पताल में कोई मरीज कई दिन से भर्ती हो तो उसकी सेहत में कितना सुधार हो रहा है, मरीज को छुट्टी देकर घऱ भेजा जाए या नहीं – ये फैसला लेने से पहले अनुभवी डॉक्टर पहला सवाल पूछते हैं कि यूरिन आउटपुट कितना है। यानी मरीज ने पिछले कुछ घंटों में कितना पेशाब किया। अस्पताल में भर्ती मरीज के पेशाब की मात्रा को

अस्पताल में कोई मरीज कई दिन से भर्ती हो तो उसकी सेहत में कितना सुधार हो रहा है, मरीज को छुट्टी देकर घऱ भेजा जाए या नहीं – ये फैसला लेने से पहले अनुभवी डॉक्टर पहला सवाल पूछते हैं कि यूरिन आउटपुट कितना है। यानी मरीज ने पिछले कुछ घंटों में कितना पेशाब किया। अस्पताल में भर्ती मरीज के पेशाब की मात्रा को

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अस्पताल में कोई मरीज कई दिन से भर्ती हो तो उसकी सेहत में कितना सुधार हो रहा है, मरीज को छुट्टी देकर घऱ भेजा जाए या नहीं – ये फैसला लेने से पहले अनुभवी डॉक्टर पहला सवाल पूछते हैं कि यूरिन आउटपुट कितना है। यानी मरीज ने पिछले कुछ घंटों में कितना पेशाब किया। अस्पताल में भर्ती मरीज के पेशाब की मात्रा को

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अस्पताल में कोई मरीज कई दिन से भर्ती हो तो उसकी सेहत में कितना सुधार हो रहा है, मरीज को छुट्टी देकर घऱ भेजा जाए या नहीं – ये फैसला लेने से पहले अनुभवी डॉक्टर पहला सवाल पूछते हैं कि यूरिन आउटपुट कितना है। यानी मरीज ने पिछले कुछ घंटों में कितना पेशाब किया। अस्पताल में भर्ती मरीज के पेशाब की मात्रा को बाकायदा नापा जाता है और रंग पर डॉक्टर और नर्सों की पैनी नज़र रहती है। क्योंकि पेशाब का रंग और मात्रा दोनों ही ये बता सकती हैं कि मरीज की किडनी अच्छे तरीके से काम कर रही है या नहीं।

इंसान का शरीर एक शानदार मशीन की तरह काम करता है। ये मशीन बीमारी आने से पहले कई तरह के सिग्नल देती है। इन संकेतों में सबसे महत्वपूर्ण है हमारे पेशाब यानी यूरिन का रंग। यूरिन का रंग बहुत कुछ बता देता है। किडनी हमारे शरीर का 'फिल्टर' है, जो खून को साफ कर खराब चीजों को बाहर निकालती है। जब कि़डनी के कामकाज में कोई बाधा आती है, तो उसका सीधा असर यूरिन के रंग, गंध और मात्रा पर पड़ता है। अक्सर हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यूरिन के रंग की सही पहचान आपको किडनी की गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।

पेशाब का रंग हल्का पीला है तो आप सेहतमंद हैं

एक स्वस्थ व्यक्ति के यूरिन का रंग हल्का पीला (स्ट्रॉ कलर) होना चाहिए। यह इस बात का प्रतीक है कि आपकी किडनियाँ सही ढंग से काम कर रही हैं और आपके शरीर में पानी की कमी नहीं है।

रंग बदलते ही समझें किडनी का हाल

गहरा पीला - यदि आपके यूरिन का रंग गहरा पीला है, तो यह शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) का सबसे पहला संकेत है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो किडनियाँ अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यूरिन को अधिक गाढ़ा कर देती हैं। इसे अधिक पानी पीकर ठीक किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी स्थिति किडनी में पथरी का कारण बन सकती है।

साबुन के झाग जैसा - यदि यूरिन में साबुन के झाग की तरह बुलबुले दिखते हैं और यह बार-बार हो रहा है, तो यह खतरे की घंटी है। यह दर्शाता है कि आपकी किडनी से 'एल्बूमिन' नाम का प्रोटीन लीक हो रहा है। सामान्य स्थिति में किडनी प्रोटीन को शरीर के भीतर ही रखती है, लेकिन डैमेज होने पर यह यूरिन के जरिए बाहर आने लगता है। यहां से किडनी की बीमारी की शुरुआत हो जाती है। जिसने मेडिकल भाषा में 'क्रोनिक किडनी डिजीज' यानी CKD भी कहते हैं।

लाल रंग- यदि आपने चुकंदर, अनार या लाल रंग का फल नहीं खाया है और फिर भी यूरिन का रंग लाल दिख रहा है, तो इसका मतलब हो सकता है कि इसमें खून आ रहा है। डॉक्टर इसे 'हेमट्यूरिया' कहते हैं। यह किडनी इंफेक्शन, पथरी या किसी ट्यूमर का संकेत हो सकता है। इसे कभी भी नजरअंदाज न करें।

गहरा भूरा रंग- यूरिन का बहुत गहरा भूरा होना किडनी के साथ-साथ लिवर की खराबी की ओर भी इशारा करता है। यह किडनी फेलियर की गंभीर स्थिति या मांसपेशियों के टिश्यू टूटकर यूरिन से बाहर आने के कारण हो सकता है।

मटमैला रंग- यदि यूरिन पारदर्शी नहीं दिख रहा और मटमैला है, तो यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या किडनी में पस बनने का लक्षण हो सकता है। इसके साथ अक्सर जलन या दर्द की शिकायत भी होती है।

पेनकिलर: किडनी का 'साइलेंट किलर'

आजकल सिरदर्द, बदन दर्द या जोड़ों के दर्द के लिए बिना सोचे-समझे पेनकिलर दवाएं लेना एक आम बात हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी किडनी को हमेशा के लिए खराब कर सकती है?

पेनकिलर दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए

इबुप्रोफेन और डिक्लोफेनाक जैसी पेनकिलर दवाएं NSAIDS की कैटेगरी में आती हैं। इन्हें नॉन स्टीरायड एंटी इंफ्लेमेटरी दवाएं कहते हैं। ये दवाएं बहुत ज्यादा लेने से  किडनी में ब्लड फ्लो कम हो जाता है। जिससे किडनी के टिश्यू को नुकसान पहुंचता है। आसान भाषा में कहें तो बार बार पेनकिलर दवाओं से किडनी को चोट लग सकती है। लंबे समय तक दर्द निवारक लेने से किडनी धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी' कहते हैं।

इस बारे में फोर्टिस अस्पताल की नेफ्रोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ अनुजा पोरवाल का कहना है कि पेनकिलर दवाएं किडनी की दुश्मन हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं को बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। अपने आप सालों- साल पेनकिलर दवाएं लेने वाले मरीज अक्सर अस्पताल में किडनी फेल्यर के साथ पहुंचते हैं। इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि इंसान एक किडनी पर भी सेहतमंद तरीके से जी लेता है और किडनी अपने खराब होने का पता देर से देती है।

कब हो जाएं सावधान?

सिर्फ रंग ही नहीं, किडनी की सेहत के लिए इन लक्षणों पर भी गौर करें:

• रात के समय 2-3 बार से ज्यादा पेशाब आना।

• आंखों के नीचे या पैरों के टखनों में सूजन (Edema)।

• जल्दी थकान महसूस होना और भूख कम लगना।

• पेशाब करते समय तेज गंध (smell)  आना।

पानी से रखें किडनी को सेहतमंद

किडनी को लंबे समय तक जवान रखने के लिए संतुलित मात्रा में पानी पिएं। दिन भर में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं (यदि डॉक्टर ने कोई सीमा न बताई हो)। हालांकि मौसम के हिसाब से पानी पीने में थोड़ी कमी या बढ़ोतरी कर सकते हैं। यदि आप मधुमेह (Diabetes) या हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के मरीज हैं, तो हर छह महीने में 'किडनी फंक्शन टेस्ट' (KFT) और यूरिन रूटीन टेस्ट जरूर करवाएं।

किडनी डाइट: क्या खाएं और क्या न खाएं?

किडनी की सेहत काफी हद तक आपकी थाली पर निर्भर करती है। किडनी के फिल्टर को जाम होने से बचाने के लिए अपनी डाइट में ये बदलाव करें:

क्या खाएं (किडनी फ्रेंडली फूड):

• शिमला मिर्च और फूलगोभी: इनमें विटामिन-सी और फोलेट भरपूर होता है, जो किडनी के लिए सुरक्षित है।

• सेब और जामुन (Berries): इनमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो इन्फ्लेमेशन यानी सूजन को कम करते हैं।

• लहसुन और प्याज: ये सोडियम और पोटेशियम के विकल्प के रूप में स्वाद बढ़ाते हैं और सूजन कम करते हैं।

किससे बचें (परहेज):

नमक और चीनी का सेवन कम करें।

• अत्यधिक नमक: नमक में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जिससे किडनी की नसों पर दबाव पड़ता है।

• प्रोसेस्ड फूड: चिप्स, डिब्बाबंद सूप और जंक फूड में फास्फोरस और सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है।

• ज्यादा प्रोटीन: यदि किडनी की समस्या शुरू हो चुकी है, तो रेड मीट और अधिक दालों से बचें, क्योंकि यह किडनी पर 'यूरिया' का बोझ बढ़ाता है।

• कोल्ड ड्रिंक और सोडा: इनमें मौजूद आर्टिफिशियल शुगर और फास्फोरस किडनी की पथरी का कारण बनते हैं।