नियमित रूप से प्राणायाम करने से मन स्थिर होता है और मनोबल बढ़ता है, जो आज के समय की जरूरत है। इससे डिप्रेशन दूर करने में भी मदद मिलती है।

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नियमित रूप से प्राणायाम करने से मन स्थिर होता है और मनोबल बढ़ता है, जो आज के समय की जरूरत है। इससे डिप्रेशन दूर करने में भी मदद मिलती है। जहां प्राणायाम करें, वहां पर्याप्त हवा और रोशनी होनी चाहिए। मन एकदम शांत रहे। यदि मन विचलित हो, तो उस समय प्राणायाम ना करें। प्राणायाम के प्रत्येक चरण को पूरा करने में जल्दबाजी ना करें। कोई भी प्राणायाम अपनी सुविधा के अनुसार 10-15 बार कर सकते हैं।

कपालभाति प्राणायाम

कैसे करना है: इस श्वास तकनीक में निष्क्रिय सांस लेना और सक्रिय सांस छोड़ना शामिल है। इसलिए सामान्य रूप से श्वास लें। जितना हो सके उतनी मात्रा में सांस लें और जोर से सांस छोड़ें। सांस छोड़ने के दौरान अपने पेट की मांसपेशियों को रीढ़ की हड्डी की ओर जितना हो सके, खींचने की कोशिश करें। 2-5 मिनट के लिए ऐसा करें।

कौन ना करें: उच्च या निम्न रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, गैस्ट्रिक, अल्सर, मिर्गी, सिर का चक्कर, माइग्रेन का सिर दर्द, नकसीर, ग्लूकोमा, स्ट्रोक की मेडिकल हिस्ट्री वाले व्यक्तियों को इस योग मुद्रा से बचना चाहिए। जिन लोगों की हाल ही में पेट की सर्जरी हुई है, उन्हें किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में इस मुद्रा का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।

भ्रामरी प्राणायाम

कैसे करना है: सुखासन या किसी अन्य ध्यान मुद्रा में बैठ कर आंखें बंद कर लें। तर्जनी उंगलियों से दोनों कानों को बंद कर लें। मुंह बंद रखते हुए नाक से सांस लें और छोड़ें। लंबी गहरी सांस लें और फिर धीरे से नासिका को दबा कर मधुमक्खी की तरह गुनगुनाते हुए सांस छोड़ें। अभ्यास के दौरान मुंह बंद रखें। ध्वनि बहुत तेज नहीं होनी चाहिए, लेकिन कंपन पैदा होनी चाहिए। पांच राउंड/सत्रों का अभ्यास करें, बीच-बीच में रुकें।

कौन ना करें: भ्रामरी का अभ्यास गर्भवती या मासिकधर्म वाली महिलाओं को नहीं करना चाहिए। अत्यधिक उच्च रक्तचाप, मिर्गी, सीने में दर्द या कान में संक्रमण वाले व्यक्तियों को भी यह नहीं करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

कैसे करना है: आंखें बंद कर पद्मासन में बैठ जाएं। दायीं नासिका को बंद करने के लिए दाहिने अंगूठे का प्रयोग करें। बायीं नासिका से धीरे-धीरे श्वास लें। अपने फेफड़ों में अधिक से अधिक हवा भरें। मध्यमा उंगली से अपने बायीं नासिका को बंद करें और अपने दायीं नासिका से अंगूठा हटा कर सांस छोड़ें। अब दायीं नासिका से श्वास लें और इसे अंगूठे से बंद करें। बायीं नासिका से सांस छोड़ें। 2-5 मिनट के लिए इसका अभ्यास करें।

कौन ना करें: इसका अभ्यास उन लोगों को नहीं करना चाहिए, जो रक्तचाप की दवा ले रहे हैं। इसे श्वास को भीतर रोके बिना भी किया जा सकता है।

उज्जायी प्राणायाम

कैसे करना है: आरामदेह मुद्रा में बैठ कर स्वाभाविक रूप से सांस लें व छोड़ें। कुछ देर बाद अपना फोकस गले पर ले कर आएं। ऐसा महसूस करें या कल्पना करें कि सांस गले से आ और जा रही है। 2-5 सेकेंड के लिए रुकें। जब सांस धीमी और गहरी हो जाए, तब गले को संकुचित करें। ऐसा करने पर गले से सांस आने व जाने पर धीमी आवाज आनी चाहिए। सांस छोड़ते हुए अपने दाहिने नथुने को अपने दाहिने अंगूठे से बंद करें, और बाएं नथुने से सांस छोड़ें। इसी तरह बायीं नाक बंद कर दायीं नाक से सांस छोड़ें। इसे 10-12 बार दोहराएं।

कौन ना करें: अगर आप लगातार थकान और घबराहट महसूस कर रहे हैं, तो इस प्राणायाम का अभ्यास ना करें। हमेशा पेशेवर योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करें। शुरुआती दिनों में इस श्वास का अभ्यास दिन में 5 मिनट से अधिक नहीं करना चाहिए।