किराए के घर में कैसे दूर करें वास्तु दोष
आजकल बहुत से लोगों को किराए के घर में रहना पड़ता है। इनकी सबसे बड़ी खामी यह होती है कि आप इन घरों में अपनी मर्जी से बदलाव नहीं करवा सकते। कई बार इन घरों में वास्तु दोष भी होता है, जिसकी वजह से मन में ऊर्जा का असंतुलन महसूस होता है। मानसिक बेचैनी, नींद की समस्या, परिवार में बार-बार झगड़े या आर्थिक
आजकल बहुत से लोगों को किराए के घर में रहना पड़ता है। इनकी सबसे बड़ी खामी यह होती है कि आप इन घरों में अपनी मर्जी से बदलाव नहीं करवा सकते। कई बार इन घरों में वास्तु दोष भी होता है, जिसकी वजह से मन में ऊर्जा का असंतुलन महसूस होता है। मानसिक बेचैनी, नींद की समस्या, परिवार में बार-बार झगड़े या आर्थिक
आजकल बहुत से लोगों को किराए के घर में रहना पड़ता है। इनकी सबसे बड़ी खामी यह होती है कि आप इन घरों में अपनी मर्जी से बदलाव नहीं करवा सकते। कई बार इन घरों में वास्तु दोष भी होता है, जिसकी वजह से मन में ऊर्जा का असंतुलन महसूस होता है। मानसिक बेचैनी, नींद की समस्या, परिवार में बार-बार झगड़े या आर्थिक
आजकल बहुत से लोगों को किराए के घर में रहना पड़ता है। इनकी सबसे बड़ी खामी यह होती है कि आप इन घरों में अपनी मर्जी से बदलाव नहीं करवा सकते। कई बार इन घरों में वास्तु दोष भी होता है, जिसकी वजह से मन में ऊर्जा का असंतुलन महसूस होता है। मानसिक बेचैनी, नींद की समस्या, परिवार में बार-बार झगड़े या आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं इस वजह से होना आम हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वास्तु किराए के घरों पर भी असर करता है? और अगर ऐसा है तो क्या बिना कोई तोड़फोड़ किए इसे सुधारा जा सकता है? इस बारे में टैरो मेंटर और स्पिरिचुअल हीलर डॉ. मधु कोटिया का कहना है, ‘‘वास्तु केवल दीवारों और इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा के प्रवाह से जुड़ा विज्ञान है। चाहे घर आपका खुद का हो या किराए का, वस्तुओं की स्थिति, दिशा का सही उपयोग और पंचतत्त्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के अनुसार संतुलन हमारे मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। किराए का घर भी अपना बन सकता है, अगर उसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो। वास्तु और ग्रहों की समझ से हम अपने जीवन में संतुलन, शांति और समृद्धि ला सकते हैं, वह भी बिना किसी तोड़फोड़ के।’’
किराए के मकानों में अकसर पहले से बना लेआउट होता है, इसलिए कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं होता। फिर भी, गलत दिशा में फर्नीचर, तत्वों का असंतुलन या ऊर्जा मार्ग का अवरुद्ध होना वास्तु दोष का कारण बन सकता है।
उदाहरण के लिए, ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा), जो मानसिक स्पष्टता और शांति से जुड़ा होता है, अगर वहां भारी सामान या गंदगी हो तो तनाव, भ्रम और निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। दक्षिण-पश्चिम में शौचालय होने से पारिवारिक अस्थिरता आ सकती है, जबकि उत्तर दिशा में रसोई होने से आर्थिक हानि संभव है।
क्या है उपाय
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) अवरुद्ध
प्रभाव : मानसिक तनाव, उलझन, चिंता
उपाय : इस क्षेत्र को हमेशा साफ और हल्का रखें। यहां पानी का छोटा सा पात्र या हिमालयन सॉल्ट लैंप रखें। रोजाना कपूर का दीपक जलाएं।
दक्षिण-पश्चिम में शौचालय या कटाव
प्रभाव : आर्थिक अस्थिरता, जड़ों से कटाव
उपाय : शौचालय के बाहर पीले या भूरे रंग की दरी रखें। वहां एक कटोरी में सेंधा नमक रखें, जिसे हर हफ्ते बदलें। दक्षिण-पश्चिम दीवार पर पहाड़ की तसवीर लगाएं, जो स्थिरता का प्रतीक है।
बिस्तर के सामने आईना
प्रभाव : नींद की समस्या, ऊर्जा की कमी
उपाय : रात को आईने को कपड़े से ढक दें। कोशिश करें कि बिस्तर के ठीक सामने आईना ना हो, विशेषकर ऐसे घरों में जहां वॉर्डरोब पहले से बनी होती हैं।
उत्तर दिशा में रसोई
प्रभाव : कैरिअर और आर्थिक नुकसान
उपाय : रसोई में लाल परदे या लाल बल्ब का प्रयोग करें। गैस चूल्हे के पास एक तुलसी का पौधा रखें। उत्तर दिशा की दीवार पर हरे या नीले रंग की पेंटिंग्स लगाएं।